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77 वें गणतंत्र दिवस पर सीएम योगी का संदेश, न्याय समता बंधुता से मजबूत होगा लोकतंत्र

77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और संविधान के मूल मूल्यों को याद दिलाया। उन्होंने न्याय, समता और बंधुता को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि देश में जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 26, 2026

न्याय, समता और बंधुता ही भारतीय लोकतंत्र की आत्मा (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

न्याय, समता और बंधुता ही भारतीय लोकतंत्र की आत्मा (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

77 वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों और देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संविधान के मूल मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और संविधान की भावना पर आधारित प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का जीवंत आधार है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में संविधान के तीन महत्वपूर्ण शब्दों न्याय, समता और बंधुता को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “हमेशा याद रखिए भारत के संविधान के तीन शब्द  न्याय, समता और बंधुता। हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के न्याय मिले। देश के अंदर जाति, मत, मजहब, क्षेत्र और भाषा के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।”

संविधान की भावना को अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि भारत एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समानता पर आधारित राष्ट्र है। संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार दिए हैं और राज्य का कर्तव्य है कि वह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय और विकास पहुंचाए। उन्होंने कहा कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शासन, प्रशासन और समाज के हर स्तर पर दिखाई देना चाहिए। गरीब, वंचित, पिछड़े और कमजोर वर्गों को न्याय दिलाना ही सच्चे अर्थों में संविधान के प्रति सम्मान है।

समता और सामाजिक सौहार्द पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समता का अर्थ केवल अवसरों की समानता नहीं, बल्कि सम्मान की समानता भी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तब तक संभव नहीं है, जब तक वहां आपसी सम्मान और सौहार्द का भाव न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के नाम पर भेदभाव देश की एकता और अखंडता के लिए घातक है। “भारत की शक्ति उसकी विविधता में है। हमें इस विविधता को विभाजन नहीं, बल्कि एकता का आधार बनाना होगा,” मुख्यमंत्री ने कहा।

बंधुता से मजबूत होगा राष्ट्र

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बंधुता की भावना को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि बंधुता का अर्थ है, एक-दूसरे के प्रति विश्वास, सहयोग और अपनापन। जब समाज में बंधुता मजबूत होती है, तब लोकतंत्र भी सशक्त होता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में अफवाहों, नफरत और विभाजन की राजनीति से सावधान रहने की आवश्यकता है। देश को आगे बढ़ाने के लिए आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करना होगा।

स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को नमन

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को नमन किया। उन्होंने कहा कि उनके त्याग और बलिदान के कारण ही आज हम एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत में सांस ले पा रहे हैं। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक ऐसे संविधान की रचना की, जो हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान देता है।

विकास और सुशासन की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार संविधान की भावना के अनुरूप विकास और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जब हर नागरिक को न्याय और अवसर मिलेगा, तभी प्रदेश और देश तेजी से आगे बढ़ेगा।

युवाओं से विशेष अपील

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और उनके विचार, आचरण और संकल्प से ही भारत की दिशा तय होगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नफरत और विभाजन से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।

गणतंत्र दिवस का संदेश

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ-साथ हमारे कर्तव्य भी हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम सब संविधान के मूल्यों न्याय, समता और बंधुता को अपने आचरण में उतार लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बना रहेगा, बल्कि सबसे सशक्त और समावेशी राष्ट्र भी बनेगा।