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GST Scam: 100 करोड़ के जीएसटी घोटाले में केंद्रीय जीएसटी इंस्पेक्टर नामजद, यूपी एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा

GST Scam News: गाजियाबाद में दर्ज 100 करोड़ रुपये के जीएसटी चोरी मामले में दिल्ली में तैनात केंद्रीय जीएसटी इंस्पेक्टर का नाम सामने आने से हड़कंप मच गया है। यूपी एसटीएफ की जांच में फर्जी फर्मों, नकली ई-वे बिल और रिश्वत के जरिए टैक्स चोरी का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 12, 2026

फर्जी फर्मों और नकली ई-वे बिल से टैक्स चोरी, यूपी एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

फर्जी फर्मों और नकली ई-वे बिल से टैक्स चोरी, यूपी एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

CGST Inspector Named in Rs 100 Crore GST Evasion Case: उत्तर प्रदेश में सामने आए करीब 100 करोड़ रुपये के जीएसटी चोरी मामले ने कर विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली में तैनात केंद्रीय जीएसटी (CGST) इंस्पेक्टर को आरोपी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा जुटाए गए नए और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल का नाम गाजियाबाद के कवि नगर थाने में दर्ज एफआईआर में शामिल किया गया है। एसटीएफ के अनुसार, आरोपी इंस्पेक्टर फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

फर्जी फर्मों और नकली ई-वे बिल से की गई टैक्स चोरी

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला एक संगठित टैक्स चोरी सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है, जिसने फर्जी कंपनियां बनाकर और नकली ई-वे बिल व इनवॉइस जारी कर सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया। एसटीएफ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह ने दर्जनों शेल कंपनियां बनाईं, जिनका कोई वास्तविक व्यापार नहीं था। इन फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन कागजों पर दिखाए गए और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत तरीके से दावा किया गया।

चार आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क का खुलासा

एसटीएफ ने शुक्रवार को इस मामले में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया ,हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस, दिल्ली निवासी स्क्रैप कारोबारी,जितेंद्र झा,पुनीत अग्रवाल, शिवम सिंह पूछताछ में इन आरोपियों ने फर्जी फर्मों के नेटवर्क और टैक्स चोरी की पूरी कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम जानकारियां दीं।

केंद्रीय जीएसटी इंस्पेक्टर पर गंभीर आरोप

एसटीएफ की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दिल्ली में तैनात केंद्रीय जीएसटी इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल ने इस पूरे घोटाले में विभागीय स्तर पर आरोपियों की मदद की। जांच एजेंसियों का दावा है कि इंस्पेक्टर ने फर्जी फर्मों को संरक्षण दिया। संदिग्ध लेन-देन पर कार्रवाई से बचाया। निलंबित फर्मों को दोबारा सक्रिय कराने में मदद की। इसके बदले में वह रिश्वत लेता था।

40 हजार रुपये लेकर फर्जी फर्म बहाल कराने का आरोप

जांच में सामने आया है कि एक फर्जी कंपनी एडॉन ऑटोमोबाइल (Adon Automobile), जो आरोपी पुनीत अग्रवाल से जुड़ी थी, को तीन महीने पहले संदेहास्पद गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया गया था। लेकिन आरोप है कि इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल ने 40 हजार रुपये की रिश्वत लेकर उस फर्म को दोबारा बहाल करा दिया, जिससे टैक्स चोरी का खेल फिर से शुरू हो गया।

हरियाणा के ‘फैसिलिटेटर’ की भी भूमिका

एसटीएफ ने जांच में यह भी खुलासा किया है कि इस घोटाले में हरियाणा निवासी आलोक नामक व्यक्ति की अहम भूमिका थी। आलोक को फर्जी कंपनियां उपलब्ध कराने वाला फैसिलिटेटर बताया जा रहा है। आरोप है कि आलोक, हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस को लंपसम कमीशन के बदले फर्जी फर्में उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल टैक्स चोरी के लिए किया जाता था।

कविनगर थाने में दर्ज है मामला

इस पूरे मामले की एफआईआर गाजियाबाद के कवि नगर थाना में दर्ज की गई है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

फरार इंस्पेक्टर की तलाश में टीमें तैनात

केंद्रीय जीएसटी इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल के फरार होने के बाद जांच एजेंसियों ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, गाजियाबाद और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश शुरू कर दी है। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उससे पूछताछ के बाद घोटाले से जुड़े अन्य अधिकारियों और लाभार्थियों की भूमिका भी सामने लाई जाएगी।

100 करोड़ के नुकसान का अनुमान

एसटीएफ के मुताबिक, इस संगठित टैक्स चोरी से सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा जांच के आगे बढ़ने के साथ और बढ़ सकता है। इस मामले ने एक बार फिर सरकारी विभागों में मौजूद भ्रष्टाचार और अंदरूनी मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अधिकारी पर कर चोरी रोकने की जिम्मेदारी थी, उसी पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगना व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

आगे की कार्रवाई

एसटीएफ का कहना है कि फरार इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी प्राथमिकता है,जब्त डिजिटल और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है, बैंक खातों और संपत्तियों की भी पड़ताल होगी। पोस्ट जांच रिपोर्ट और आरोपियों के बयानों के आधार पर आगे और एफआईआर व चार्जशीट दाखिल की जाएगी।