
बजट पर रोक के बाद संचालन पर मंडराया खतरा, शासन से मांगा गया मार्गदर्शन (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
58 Madarsa Mini ITI Face Shutdown in UP: प्रदेश के मदरसों में संचालित 58 मिनी आईटीआई केंद्रों पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा इन केंद्रों के बजट पर रोक लगाए जाने के बाद इनके संचालन पर संकट गहरा गया है। विभाग ने मानकों की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन को पत्र भेजकर आगे की कार्यवाही और बजट आवंटन को लेकर मार्गदर्शन मांगा है। यदि शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो इन केंद्रों का संचालन एक साथ बंद हो सकता है, जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका है।
प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से मदरसों में मिनी आईटीआई केंद्र स्थापित किए गए थे। इन केंद्रों में इलेक्ट्रिशियन, फिटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, टेलरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते रहे हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना था, ताकि छात्र आत्मनिर्भर बन सकें और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। हालांकि हाल ही में इन केंद्रों के संचालन, आधारभूत संरचना, प्रशिक्षकों की नियुक्ति और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद विभागीय स्तर पर मानकों की जांच कराई गई।
सूत्रों के अनुसार, जांच में कई केंद्रों में आवश्यक मानकों की कमी पाई गई। कहीं प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव मिला तो कहीं उपकरणों और प्रयोगशालाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। कुछ स्थानों पर छात्र उपस्थिति और प्रशिक्षण की नियमितता पर भी सवाल उठे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने बजट जारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी है। विभाग ने शासन को पत्र लिखकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं कि किन शर्तों के आधार पर बजट आवंटन किया जाए और किन सुधारों के बाद संचालन जारी रखा जा सके।
इन 58 मिनी आईटीआई केंद्रों में सैकड़ों छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यदि बजट जारी नहीं हुआ और संचालन बंद हुआ, तो सबसे बड़ा झटका इन्हीं छात्रों को लगेगा। कई छात्र ऐसे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और इन्हीं केंद्रों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रोजगार की उम्मीद कर रहे हैं। अभिभावकों में भी इस निर्णय को लेकर चिंता देखी जा रही है। एक अभिभावक ने कहा कि बच्चे यहां से हुनर सीख रहे हैं। अगर सेंटर बंद हो गए तो उनका समय और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।”
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी विशेष संस्थान के खिलाफ नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शासन की मंशा है कि छात्रों को मानक के अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिले। यदि कहीं कमियां हैं तो उन्हें दूर किया जाए, उसके बाद ही नियमित बजट जारी किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होगा और छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति सुधार का अवसर भी बन सकती है। यदि मानकों की सख्ती से समीक्षा की जाए और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो ये मिनी आईटीआई केंद्र बेहतर ढंग से संचालित हो सकते हैं। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि प्रशिक्षकों की नियमित नियुक्ति, उपकरणों का अद्यतन, उद्योगों से तालमेल और प्लेसमेंट सहायता जैसे कदम उठाए जाएं तो इन केंद्रों की उपयोगिता और प्रभाव बढ़ सकता है।
मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि कमियां हैं तो उन्हें दूर किया जाए, लेकिन अचानक बजट रोकने से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
कुछ संगठनों ने शासन से मांग की है कि जब तक अंतिम निर्णय न हो, तब तक अंतरिम बजट जारी किया जाए ताकि प्रशिक्षण बाधित न हो।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती है,एक ओर गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना, दूसरी ओर छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण को बाधित होने से बचाना। यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं तो सुधारात्मक कदम उठाना आवश्यक है। वहीं, यदि कमियां सीमित स्तर की हैं, तो समयबद्ध सुधार योजना बनाकर संचालन जारी रखा जा सकता है। अब निगाहें शासन के निर्णय पर टिकी हैं। विभाग द्वारा भेजे गए पत्र पर विचार के बाद ही स्पष्ट होगा कि क्या सभी 58 केंद्रों का संचालन अस्थायी रूप से रोका जाएगा। या फिर सुधार की शर्तों के साथ बजट जारी किया जाएगा। क्या नए सिरे से मान्यता प्रक्रिया लागू की जाएगी। जब तक अंतिम आदेश जारी नहीं होता, तब तक स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।
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Published on:
16 Feb 2026 09:53 am
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