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भारत, May 24, 2026

40 के बाद मां बनना कितना सुरक्षित? डॉक्टर ने बताए प्रेगनेंसी के जोखिम और ध्यान रखने योग्य बातें

Karishma Tanna Pregnancy at 42: सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना ने अपनी गोदभराई की फोटोज और वीडियो शेयर किए हैं, जिन्हें फैंस काफी ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि ज्यादा उम्र में मां बनने के दौरान किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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ज्यादा उम्र में मां बनने के रिस्क और सावधानियां| (file photo) image credit instagram| karishmaktanna

High-Risk Pregnancy Complications: अभिनेत्री करिश्मा तन्ना 42 साल की उम्र में मां बनने वाली हैं। हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर गोद भराई की तस्वीरें शेयर की हैं, जिसमें वे अपना बेबी बंप फ्लॉन्ट करती नजर आईं। अक्सर यह कहा जाता है कि ज्यादा उम्र में कंसीव करने से कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे में आइए, जीएमसी एवं जनाना अस्पताल, अलवर में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चारुल मित्तल से जानते हैं कि 42 की उम्र में नेचुरल प्रेगनेंसी के क्या रिस्क होते हैं और इस दौरान किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

40 के बाद प्रेग्नेंसी क्यों मानी जाती है हाई-रिस्क? (Why Pregnancy After 40 is Considered High-Risk?)

डॉक्टर चारु मित्तल के अनुसार, 42 साल की उम्र में मां बनना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह संभव है। इस उम्र में गर्भावस्था को 'हाई-रिस्क' (High-Risk) माना जाता है, इसलिए इस दौरान गाइनोलाजिस्ट के लगातार संपर्क में रहना चाहिए।

क्या 42 की उम्र में नेचुरल प्रेगनेंसी संभव है? (Possibility of Natural Pregnancy at 42)

वैसे तो प्रेगनेंसी में दिक्कतें किसी भी उम्र में हो सकती हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ये परेशानियां बढ़ जाती हैं। इसी कारण ज्यादा उम्र में हेल्दी बेबी के लिए कई बार एग फ्रीजिंग (Egg freezing) कराने का सुझाव दिया जाता है।

  • मिसकैरेज और जेनेटिक समस्याएं (Miscarriage and Genetic Issues): उम्र बढ़ने के साथ गर्भपात (Miscarriage) का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, बच्चे में क्रोमोसोम से जुड़ी 'डाउन सिंड्रोम' जैसी दिक्कतें होने की संभावना बढ़ सकती है।
  • हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज (High Blood Pressure & Diabetes): इस उम्र में 'जेस्टेशनल डायबिटीज' (प्रेगनेंसी में शुगर) और 'प्रीक्लेम्पसिया' (हाई बीपी) होने का खतरा ज्यादा रहता है।
  • प्रीमैच्योर डिलीवरी (Premature Delivery): समय से पहले डिलीवरी होने या बच्चे का वजन कम होने की आशंका बनी रहती है।
  • सिजेरियन डिलीवरी (C-Section): बढ़ती उम्र में होने वाली प्रेगनेंसी से जुड़ी परेशानियों के कारण अक्सर नॉर्मल डिलीवरी की जगह ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है।

किन टेस्ट्स की जरूरत पड़ती है? (Necessary Tests & Screenings)

  • नियमित जांच (Regular Checkups): समय-समय पर डॉक्टर के पास जाएं। इस दौरान अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के अलावा, डॉक्टर 'नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्टिंग' (NIPT) या जेनेटिक स्क्रीनिंग करवाने की सलाह दे सकते हैं।
  • हेल्दी डाइट (Healthy Diet): खाने में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, कैल्शियम और प्रोटीन को शामिल करें।
  • फोलिक एसिड (Folic Acid): डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड और प्रीनेटल विटामिन लेना शुरू करें, जो बच्चे के विकास में मदद करते हैं।
  • हाइड्रेशन और रेस्ट (Hydration & Rest): भरपूर पानी पिएं और पूरी नींद लें। शरीर को आराम देना बहुत जरूरी है।
  • तनाव मुक्त रहें (Stay Stress-free): अपनी उम्र को लेकर ज्यादा चिंता न करें और पॉजिटिव रहें।
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