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AI Summit 2026: एआई की मदद से बनेंगे गहने, भारत में लॉन्च हुई ग्रीन लग्जरी ज्वेलरी, अब यूं तराशे जाएंगे हीरे

India AI Impact Summit 2026: अब भारत में एआई को पूरी तरह से लाने की तैयारी की जा चुकी है। गहनों में भी एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। क्या है पूरा मामला, चलिए जानते हैं।

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India AI Impact Summit 2026

India AI Impact Summit 2026 (सोर्स- एक्स)

India AI Impact Summit 2026: देश की राजधानी में आयोजित इंडिया एआई इम्पेक्ट समिट के बीच एक ऐसी झलक सामने आई जिसने तकनीक और परंपरा के मेल को नई दिशा दे दी। भारत मंडपम में शुरू हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 2026 सम्मेलन में जहां खेती, रेलवे और टेक्नोलॉजी में एआई के उपयोग पर चर्चा हुई, वहीं ज्वेलरी सेक्टर से जुड़ी एक अनोखी पहल ने सबका ध्यान खींच लिया। अब हीरे-जवाहरात की दुनिया में भी एआई अपनी चमक बिखेरने जा रहा है।

लैब में विकसित होंगे हीरे (India AI Impact Summit 2026)

दरअसल, लैब में हीरे विकसित करने वाली कंपनी 'कैराटिक्स जोवेला प्राइवेट लिमिटेड' ने अपने नए लग्जरी ब्रांड Daimante को भारतीय बाजार में पेश किया है। ये ब्रांड एआई आधारित डिजाइन और पारंपरिक भारतीय कारीगरी के संगम से तैयार ज्वेलरी पेश कर रहा है। कंपनी का मानना है कि भविष्य का डायमंड उद्योग तकनीक, नैतिकता और टिकाऊपन के संतुलन पर आधारित होगा।

कारीगरों पर खत्म होती है कहानी (India AI Impact Summit 2026)

इस ब्रांड की हर ज्वेलरी पीस की शुरुआत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होती है। मॉडर्न एल्गोरिद्म डिजाइन की रूपरेखा तैयार करते हैं, जिनमें संरचना, पैटर्न और सौंदर्यशास्त्र का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके बाद अनुभवी भारतीय कारीगर अपनी पारंपरिक कला से इन डिजाइनों को वास्तविक आकार देते हैं।

कंपनी ने अपने शिल्पकारों को एआई टूल्स के साथ काम करने का प्रशिक्षण भी दिया है, ताकि तकनीक और मानवीय स्पर्श का संतुलन बना रहे। डिजाइन से लेकर डायमंड ग्रोथ, गोल्ड सोर्सिंग और फिनिशिंग तक की पूरी प्रक्रिया भारत में ही पूरी की जाती है। ये पहल ‘मेक इन इंडिया’ की सोच को भी मजबूती देती है।

टैलिस्मन कलेक्शन से शुरुआत

ब्रांड ने अपने सफर की शुरुआत ‘टैलिस्मन’ नामक पेंडेंट-केंद्रित कलेक्शन से की है। ये संग्रह प्राचीन प्रतीकों से प्रेरित है, जो शक्ति, सुरक्षा और बदलाव का संदेश देते हैं। हर आभूषण को केवल फैशन एक्सेसरी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

यह कलेक्शन रिसाइकल्ड 14 और 18 कैरेट गोल्ड में तैयार किया गया है और इसमें IGI प्रमाणित लैब-ग्रो डायमंड्स का इस्तेमाल हुआ है। यहां IGI यानी इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट से प्रमाणन गुणवत्ता की गारंटी देता है। शुरुआती कीमत 30,000 रुपये रखी गई है, जिससे युवा ग्राहकों के लिए डिजाइनर डायमंड ज्वेलरी अपेक्षाकृत सुलभ हो गई है।

किस तकनीक से बनते हैं ये हीरे?

ब्रांड लैब में टाइप II-A श्रेणी के डायमंड विकसित करता है, जिन्हें सीवीडी तकनीक से तैयार किया जाता है। इनकी चमक, संरचना और मजबूती प्राकृतिक हीरों जैसी ही होती है, लेकिन इनके निर्माण में खनन से जुड़ी पर्यावरणीय क्षति शामिल नहीं होती।

कंपनी के सीईओ सनी कुमार के अनुसार, एआई उन डिजाइनों को संभव बनाता है जिनकी कल्पना पारंपरिक तरीकों से कठिन होती। हालांकि, अंतिम रूप देने में कारीगरों की भूमिका ही सबसे अहम रहती है।

क्वालिटी, पारदर्शिता और भरोसा

सभी डायमंड्स रिन्यूएबल एनर्जी से तैयार किए जाते हैं। ज्वेलरी पीस IGI या सॉलिटेयर जेमोलॉजिकल लेबोरेट्रीज से प्रमाणित हैं और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) हॉलमार्क के साथ आते हैं। ग्राहकों को लाइफटाइम एक्सचेंज और बायबैक की सुविधा भी दी जा रही है। फिलहाल ये डिजिटल-फर्स्ट मॉडल पर काम कर रहा है। कंपनी जल्द ही पुणे में अपना पहला ऑफलाइन स्टोर खोलने की तैयारी में है और इसके बाद दूसरे बड़े शहरों में विस्तार की योजना है।