
फाइल फोटो- पत्रिका
Right to Education कोटा। आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर शिक्षा मंत्री के बयान और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में अंतर सामने आया है। इससे निजी विद्यालय संचालकों में नाराजगी बढ़ गई है।
जोधपुर में 11 जनवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने आरटीई में बदलाव को लेकर दिए गए बयान में कहा था कि आरटीई में प्रवेश के लिए वार्ड की बाध्यता समाप्त कर पूरे जिले को आधार बनाया जाएगा, ताकि अभिभावकों को अधिक विकल्प मिल सकें। हालांकि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से शनिवार को सत्र 2026-27 के लिए जारी टाइम-फ्रेम में पिछले वर्ष की तरह ही वार्ड-वाइज प्राथमिकता को लागू रखने की बात कही गई है।
निजी स्कूल संचालक संघ के जिलाध्यक्ष जमना शंकर प्रजापति व अन्य संघ पदाधिकारियों का कहना है कि वार्ड आधारित व्यवस्था जारी रहने से कई अभिभावकों को अपनी पसंद के विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल पाता और भ्रम की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मंत्री की ओर से किए गए सार्वजनिक वादों का पालन किया जाए तथा प्रवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि घोषित सुधार लागू नहीं किए गए तो इस मुद्दे को लेकर आगे भी आवाज उठाई जाएगी। संघ का कहना है कि इससे पहले भी शिक्षा मंत्री ने निजी स्कूलों में अध्ययनरत पांचवीं कक्षा के बच्चों से व्यवस्था शुल्क के नाम पर 50 रुपए प्रति बच्चे के हिसाब से नहीं लेने की बात कही थी, लेकिन विभाग की ओर से जारी आदेश में यह भी वसूला जा रहा है।
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं के बच्चों से विभाग सुविधा शुल्क वसूल नहीं करेगा। स्कूल की तरफ से ही प्रति बच्चा 50 रुपए सुविधा शुल्क जमा होगा। आरटीई के तहत जारी आदेशों में वार्ड के बच्चे को पहले प्राथमिकता मिलेगी। उसके बाद शहर के अन्य बच्चों को। जोधपुर में दिए गए बयान का यह तात्पर्य नहीं था कि प्रवेश का आधार पूरा जिला होगा।
राजस्थान के प्राइवेट स्कूलों में पहली बार नर्सरी से लेकर पहली क्लास तक यानी चार कक्षाओं में राइट टू एजुकेशन के तहत एडमिशन हो पाएगा। इसके लिए 20 फरवरी से आवेदन शुरू हो जाएंगे, जबकि 6 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि इस बार नर्सरी से पहली क्लास तक यानी कुल चार कक्षाओं में आरटीई से फ्री एडमिशन दिया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की सहायक निदेशक और आरटीई एडमिशन प्रभारी चंद्र किरण पंवार ने बताया कि नर्सरी क्लास में 3 से 4 साल तक और फर्स्ट क्लास में 6 से 7 साल तक के स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जाएगा।
दरअसल, पहले आरटीई के तहत केवल नर्सरी और पहली क्लास में ही एडमिशन हो पाता था। पेरेंट्स या तो नर्सरी या फिर पहली क्लास के लिए ही आवेदन कर सकते थे। इस बार शिक्षा विभाग ने इसमें बदलाव करते हुए चार क्लासों को जोड़ा है। इसके तहत नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और पहली क्लास में एडमिशन हो पाएंगे।
प्री प्राइमरी 3 प्लस यानी नर्सरी में 3 साल से अधिक और 4 साल से कम उम्र के स्टूडेंट्स, प्री प्राइमरी 4 प्लस यानी एलकेजी में 4 से 5 वर्ष तक के स्टूडेंट्स, प्री प्राइमरी 5 प्लस यानी यूकेजी में 5 वर्ष से अधिक और 6 वर्ष से कम आयु के स्टूडेंट्स और फर्स्ट क्लास में 6 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष से कम उम्र के स्टूडेंट्स को एडमिशन मिल सकेगा।
सभी प्राइवेट स्कूलों में पिछले 3 सालों में नर्सरी से फर्स्ट क्लास तक के एडमिशन की संख्या को देखा जाएगा। यह संख्या पहले से शिक्षा विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध है। इस संख्या के आधार पर एक एवरेज संख्या तय होगी। इसी संख्या की 25% सीट पर फ्री एडमिशन दिया जाएगा। अगर इस संख्या के आधार पर एलकेजी में 10 सीट आती है और नर्सरी से प्रमोट होकर 8 स्टूडेंट्स आ गए हैं तो शेष 2 सीट पर एडमिशन होगा। इसी तरह यूकेजी में अगर कुल 10 सीट है और 5 सीट खाली है तो 5 पर एडमिशन होगा। ऐसा ही फॉर्मूला क्लास फर्स्ट के लिए रहेगा।
कई बार नर्सरी में एडमिशन लेने के बाद स्टूडेंट्स एलकेजी या यूकेजी में स्कूल छोड़ देते हैं। ऐसे में प्राइवेट स्कूल इस खाली सीट पर फ्री एडमिशन नहीं दे पाते थे। अब ये खाली सीटें भर जाएंगी, जिससे प्रदेश में फ्री एडमिशन पाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
Published on:
15 Feb 2026 04:50 pm
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