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राजस्थान में ED की बड़ी कार्रवाई, 15.97 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क, हाड़ौती में 2000+ लोगों से ऐसे ठगे थे 194.67 करोड़ रुपए

ED Big Action: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में बहुचर्चित अपेक्षा समूह चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है।

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कोटा

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Akshita Deora

Jan 29, 2026

Enforcement Directorate (ED)

Enforcement Directorate (Photo: Patrika)

Apeksha Group Chit Fund Scam: बहुचर्चित अपेक्षा समूह चिटफंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जयपुर आंचलिक कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 15.97 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्तियों में कुल 37 अचल संपत्तियां और 1.50 करोड़ रुपए की एक चल संपत्ति शामिल है।

कुर्क की गई 37 अचल संपत्तियां कृषि और आवासीय भूमि के रूप में हैं, जो बूंदी, बारां और कोटा जिलों में स्थित हैं। ये संपत्तियां मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गाशंकर मेरोठा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक, शोभा रानी सहित अन्य आरोपियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा समूह से संबंधित 1.50 करोड़ रुपए के बैंक खाते को भी कुर्क किया गया है। यह कार्रवाई 22 जनवरी को की गई।

ये था पूरा मामला

यह पूरा मामला वर्ष 2012 से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि अपेक्षा समूह ने वर्ष 2012 से 2020 के बीच निवेशकों को असाधारण और अव्यावहारिक लाभ का लालच देकर करीब 194.76 करोड़ रुपए की राशि एकत्र की।

समूह का मुख्य संचालन कोटा से किया जा रहा था और इसकी गतिविधियां राजस्थान के कई जिलों तक फैली हुई थीं। पुलिस की ओर से मुरली मनोहर नामदेव और अन्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने इस प्रकरण में जांच शुरू की।

ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आपराधिक और दुर्भावनापूर्ण इरादे से ऐसी योजनाएं तैयार कीं, जिनका उद्देश्य केवल भोले-भाले और आर्थिक रूप से कमजोर निवेशकों को फंसाना था। निवेश पर भारी मुनाफे का कोई वैध आधार या वित्तीय तंत्र मौजूद नहीं था।

लाभ देकर पुन: करवाया निवेश

जांच में यह भी सामने आया कि शुरुआती वर्षों में निवेशकों को नाममात्र का लाभ देकर भरोसा बनाया गया। यह राशि या तो नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों से दी जाती थी या पुराने निवेशकों को मिले लाभ को दोबारा निवेश कराने के लिए प्रेरित किया जाता था।

इससे योजनाओं के सफल होने का भ्रम पैदा किया गया, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी व्यवस्था अस्थिर थी और इसका विफल होना तय था।

कोविड-19 महामारी के दौरान स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपनी जमा राशि और लाभ लौटाने की मांग की। उस समय समूह इन मांगों को पूरा करने में असमर्थ रहा और योजनाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गईं। इसके बाद निवेशकों ने ठगी की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं।

आरोपी हो चुके है गिरफ्तार

पुलिस जांच में अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी मुरली मनोहर नामदेव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा संजय कश्यप को हरियाणा से गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से लैपटॉप, बड़ी संख्या में चेक और नकद राशि बरामद हुई।

अन्य सहयोगियों दुर्गा शंकर मेरोठा, अनिल कुमार और गिरिराज नायक की भूमिका भी जांच में सामने आई है। कोटा पुलिस ने इस मामले में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए हैं और अब तक 2300 से ज्यादा पीड़ित सामने आ चुके हैं।

मामले की फैक्ट फाइल

  • जांच की शुरुआत : 2019 में, कोटा और बूंदी जिलों में।
  • पहली कार्रवाई : मुरली मनोहर नामदेव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज।
  • मामले का खुलासा : एसआइटी और कोटा पुलिस ने निवेशकों से शिकायत मिलने के बाद शुरू किया।
  • इतने वर्षों तक हुई चालित : 2012 से 2020 तक
  • मुख्यालय: कोटा
  • प्रभावित जिले: कोटा, बूंदी, बारां
  • कुर्क की गई संपत्तियां: 37 अचल संपत्तियां (कृषि और आवासीय भूमि)
  • चल संपत्ति: समूह का बैंक खाता 1.50 करोड़ रुपए के साथ
  • निवेशकों की संख्या: 2300 से अधिक पीड़ित सामने आए

पुलिस और ईडी की कार्रवाई

  • 12 कंपनियों का रिकॉर्ड रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) जयपुर से प्राप्त
  • 20 बैंक खातों को सीज
  • लैपटॉप और 250 चेक बरामद
  • 50 से अधिक मुकदमे दर्ज
  • जांच जारी : अन्य डायरेक्टर और निवेशकों के बैंक खाते व संपत्ति नेटवर्क की पड़ताल
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