
ठगी (photo-patrika)
CG Thagi News: निवेशकों से करोड़ों रुपए ठग कर कोरबा शहर से भागने वाली चिटफंड कंपनियों के अधिकांश डायरेक्टर पकड़ में नहीं आ रहे हैं। इससे न्याय की आस लगाए बैठे निवेशक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है। ऐसा ही एक मामला चिटफंड कंपनी डॉल्फिन पावर लिमिटेड का सामने आया है। इस कंपनी के डायरेक्टर कौशिक दत्ता और अनिरुधो पाल लंबे समय से फरार हैं।
कौशिक दत्ता की गिरफ्तारी के लिए कोरबा के सत्र न्यायालय ने 30 मई 2024 को स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसी मामले में अनिरुधो पाल को भी गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट ने 7 दिसंबर 2024 को वारंट जारी किया था। दोनों वारंट पुलिस के पास है। डेढ़ साल से ज्यादा का समय गुजर गया है, लेकिन दोनों में से कोई डायरेक्टर पुलिस की पकड़ में नहीं आया है। अनिरुधो पाल पटियाला पंजाब के लोहरी गेट क्षेत्र का रहने वाला है। कौशिक दत्ता भी दूसरे राज्य से ताल्लुक रखता है। अनिरुधो पाल कंपनी का डायरेक्टर है जबकि कौशिक दत्ता एडिशनल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत है। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी के कारण इसका सीधा असर मामले की सुनवाई पर पड़ रहा है।
बताया जाता है कि इस मामले में 28 अप्रैल 2025 को अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में साक्ष्य को पूरा कर लिया गया है। इस मामले में अभी तक अभियोजन पक्ष ने 9 लोगों की गवाही कराई है, इसमें धोखाधड़ी के शिकार निवेशकों के साथ-साथ इस मामले की जांच करने वाली पुलिसकर्मी शामिल हैं। जरूरी अन्य पक्षों की गवाही भी अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कराई है। अब अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य संकलन का कार्य पूरा करा लिया गया है। कोर्ट में अब यह मामला अंतिम चरण में है। अभियुक्त अनिरुधो पाल और कौशिक दत्ता को कोर्ट में उपस्थित होकर धोखाधड़ी के इस मामले में अपना पक्ष रखना है। इसके बाद कोर्ट आगे निर्णय लेगी। लेकिन दोनों ही डायरेक्टर पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
शहर के तुलसी नगर क्षेत्र में रहने वाले कैलाश राम जांगड़े वर्ष 2011 में बालको से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद जांगड़े को जो पैसे मिले थे, उन्होंने उसे एक बैंक में जमा किया था। इस बीच वर्ष 2013 में याश ओगरे एवं नरोत्तम ओगरे जो नवापारा लेवई के रहने वाले थे, जांगड़े के घर पहुंचे। दोनों ने जांगड़े को बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर छानबीन किया है और डॉल्फिन इंफ्रा पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड सभी बिंदुओं पर खरी उतरी है। इस कंपनी में निवेश करने पर राशि जल्द ही दोगुनी हो जाएगी। कंपनी राशि लेकर नहीं भागेगी। दोनों एजेंटों ने कैलाश राम जांगड़े को भरोसे में लेने के लिए यह भी कहा कि वे स्टाम्प पेपर पर भी इसे लिखकर देने को तैयार हैं। दोनों एजेंटों की कैलाश राम के साथ बातचीत चल रही थी तब कैलाश राम की पत्नी और पुत्र सूर्यकांत भी वहां मौजूद थे।
एजेंटों ने कैलाश राम को इतना अधिक प्रलोफन दिया कि वे एजेंटों की बातों में फंस गए। उन्होंने कार्पोरेशन बैंक में जमा जीवन भर की पूंजी को तोड़ दिया और तीन किस्तों में 15 लाख रुपए निकाला। इस राशि को एजेंटों के माध्यम से डॉल्फिन इंफ्रा पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड में डलवा दिया। एजेंटों ने आश्वासन दिया था कि जमा राशि के बदले हर माह ब्याज भी मिलेगा, लेकिन कैलाश राम को जुलाई 2014 के बाद ब्याज भी नहीं मिला। जब जांगड़े ने एजेंटों से संपर्क किया तो उन्होंने पीड़ित को घुमाया और बताया कि कंपनी ने अपना दफ्तर बंद कर दिया है, कर्मचारी भाग गए हैं, तब जांगड़े ने इसकी शिकायत सीएसईबी चौकी में की।
कंपनी के डायरेक्टर कौशिक दत्ता और अनिरुधो पाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 120बी और चिटफंड से निवेशकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत केस दर्ज किया गया। कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 434/15 पर केस दर्ज किया। जांगड़े के साथ धोखाधड़ी की यह घटना 31 मई 2013 से 30 अक्टूबर 2015 के बीच हुई।
इस मामले में पुलिस ने वर्ष 2015 में मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन पुलिस को इस मामले में जांच करने में पांच साल लग गया। इस अवधि में दो और निवेशक जगमोहन पाटले और ईश्वरी प्रसाद लहरे भी शिकायत लेकर पहुंचे। पुलिस ने डॉल्फिन पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज मामले में पीडि़त के तौर पर कैलाश राम जांगड़े के अलावा जगमोहन और ईश्वरी प्रसाद के नाम को भी शामिल कर लिया। 12 मई 2020 को पुलिस की ओर से इस मामले की जांच पूरी की गई और कोर्ट में अभियोग पत्र पेश किया गया।
पुलिस ने दूसरे राज्यों में हुई चिटफंड के मामले में जेल में बंद आरोपी कौशिक दत्ता और अनिरुधो पाल को पकड़कर कोरबा ले आई। इन्हें प्रोडेक्शन रिमांड पर कोरबा लाया गया था और यहां की कोर्ट में पेश किया गया था। कानून की प्रक्रिया आगे बढ़ी तो दोनों आरोपियों को कोरबा से किसी और जेल में शिफ्ट कर दिया गया और उन्हें बाद में दूसरे कोर्ट से जमानत मिली, तब से आरोपी कहां हैं इसकी जानकारी कोरबा पुलिस को नहीं है।
अल्प समय में राशि दोगुना करने का झांसा देकर कंपनी ने छत्तीसगढ़ के निवेशकों को काफी नुकसान पहुंचाया। एक अनुमान के मुताबिक कंपनी ने निवेशकों से एक करोड़ से ज्यादा की ठगी की। पुलिस के छानबीन में यह भी पता चला है कि अनिरुधो पाल आदतन बदमाश है। उसके खिलाफ पटियाला में पहले से कई मामले दर्ज हैं।
Published on:
01 Mar 2026 03:04 pm
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