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अपनी इच्छा को प्रभु की इच्छा में मिला देना ही सच्चा प्रेम: संत मुरलीधर महाराज

कोलकाता. रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सुन्दरकाण्ड भक्त मंडल, कोलकाता के तत्वावधान में हनुमंतधाम (फोरशोर रोड, शिवपुर) में आयोजित श्रीरामकथा प्रवचन के दौरान संत मुरलीधर महाराज ने प्रेम की परिभाषा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजकल लोग प्रेम का सही अर्थ नहीं समझते। विवाह के प्रारंभिक दिनों में लोग कहते हैं कि तेरे बिना […]

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कोलकाता. रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सुन्दरकाण्ड भक्त मंडल, कोलकाता के तत्वावधान में हनुमंतधाम (फोरशोर रोड, शिवपुर) में आयोजित श्रीरामकथा प्रवचन के दौरान संत मुरलीधर महाराज ने प्रेम की परिभाषा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजकल लोग प्रेम का सही अर्थ नहीं समझते। विवाह के प्रारंभिक दिनों में लोग कहते हैं कि तेरे बिना जीना नहीं और कुछ समय बाद अदालत में कहते हैं कि तेरा चेहरा नहीं देखना चाहता। प्रेम की परिभाषा मीराबाई और भरत के चरित्र से समझी जा सकती है। अपनी इच्छा को प्रभु की इच्छा में मिला देना ही सच्चा प्रेम है।

राम-सीता के जनकपुर प्रसंग का उल्लेख

उन्होंने राम-सीता के जनकपुर प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब राम और लक्ष्मण जनकपुर पहुंचे तो वहां के लोगों ने उनके सौंदर्य को देखकर कहा कि ब्रह्माजी ने सांवले राम को ही जानकी के लिए वर बनाया है। पुष्प वाटिका में राम और सीता के प्रथम दर्शन से दोनों के हृदय में प्रेम अंकुरित हुआ। गौरी पूजन के दौरान जानकी को पार्वती का आशीर्वाद मिला कि उनकी मनोकामना पूर्ण होगी और राम ही उनके वर बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु-शिष्य संबंध में निष्काम प्रेम होता है और भगवान राम भक्तों की आवश्यकता को भलीभांति जानते हैं।

गणमान्य लोग उपस्थित रहे

कार्यक्रम का संचालन हरीश तिवाड़ी ने किया। श्रीरामकथा को सफल बनाने में संरक्षक श्यामसुन्दर अग्रवाल, मुख्य यजमान आशाराम झंवर और संदीप गुप्ता, दैनिक यजमान बाबूलाल शर्मा, नंदलाल पारीक, राधेश्याम कोठारी, संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार ताम्बी, सचिव शिवशंकर लाहोटी, आयोजन समिति के अध्यक्ष श्यामसुन्दर तोषनीवाल, सचिव ललित कुमार सिंघी, कैलाश शर्मा, सुशील बोथरा, बजरंग मल्ल, महेश शर्मा, सुमित दायमा सहित अन्य सदस्य सक्रिय रहे। इस अवसर पर घनश्याम दास पुगलिया, संतोष राठी, महावीर प्रसाद रावत सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।