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शांत रहना है तो राम से जुड़े: संत मुरलीधर

कोलकाता परोपकार (सेवा) परम धर्म है, ऐसा वेद कहते हैं। जो दूसरों के हित के लिए प्राण देते हैं तो संत उसकी प्रशंसा करते हैं।संत दर्शन से समस्त समस्त पाप मिट जाते हैं। भगवान की कृपा से संत का दर्शन होता है। भगवान की माया से पूरा जगत काममय दिखता है।यह काम ही हमें राम […]

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कोलकाता परोपकार (सेवा) परम धर्म है, ऐसा वेद कहते हैं। जो दूसरों के हित के लिए प्राण देते हैं तो संत उसकी प्रशंसा करते हैं।संत दर्शन से समस्त समस्त पाप मिट जाते हैं। भगवान की कृपा से संत का दर्शन होता है। भगवान की माया से पूरा जगत काममय दिखता है।यह काम ही हमें राम से दूर करता है। जहां काम है ,वहां राम नहीं। जहां राम है, वहां काम नहीं। काम से कौन मुक्त हुआ? वहीं मुक्त हुआ जिसको पर राम की कृपा मिली। भगवान शंकर रामजी के परम भक्त है। भगवान शंकर जगत पिता हैं। प्रयागराज में याज्ञवल्क्य ॠषि भारद्वाज मुनि से कहते हैं, जिनको भगवान शंकर के चरणों में प्रेम नहीं वह राम भक्त नहीं हो सकता। राम भक्त का पहला लक्षण है वह शिवप्रेमी हो। जो शिव प्रेमी नहीं, उसे रामजी सपने में भी अच्छे नहीं लगते।जो छल-कपट रहित हैं, उसे रामजी अपना प्रिय मनाते हैं। राम ने सुग्रीव से कहते हैं,वही व्यक्ति मुझे प्रिय है, जिसके आचरण में छल-कपट नहीं होता।

राम भक्त का पहला लक्षण है वह शिवप्रेमी हो

शिव जैसा कोई राम प्रेमी नहीं। शिव को साक्षात अनुभव करना हो तो कैलाश (हिमालय) अवश्य जाए।दुनिया से जुड़ोंगे तो अशांत रहोगे। शांत रहना है तो राम से जुड़े। भगवान शंकर रामजी से जुडें है, इसलिए शांत है। एक दिन कैलाश में वट वृक्ष के नीचे शांत मुद्रा में भगवान शिव को देखकर पार्वती बोली, आप विश्वनाथ है, मेरे नाथ हैं। आपकी महिमा तीनों लोक में हैं। आप अपनी दासी मानकर, कृपाकर मेरी अज्ञानता को मिटाए। शिव ने कहा, कैसे मिटेगी? पार्वती ने कहा, आप मुझे राम कथा से सुनाए। कथा से मेरी अज्ञानता मिटेगी। दुनिया की कथा सुनोगे तो मनोरंजन होगा जबकि राम कथा सुनोगे तो आत्मरंजन होगा। भगवान शंकर ने कहा राम कथा गंगा की तरह सभी को पवित्र करती है। राम कथा सुनने से सारे संशय मिट जाते हैं। निर्गुण ब्रह्म जब भक्तों पर करुणा करता हैं तो साकार ब्रह्म के रूप में अवतार लेता हैं।ये बातें रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष में सुन्दरकाण्ड भक्त मण्डल, कोलकाता के तत्वावधान में श्रीराम कथा पर प्रवचन करते हुए परम पूज्य संत मुरलीधर महाराज ने हनुमंतधाम (फोरशोर रोड,शिवपुर)में कही।

संचालन भागवत मर्मज्ञ हरीश तिवाड़ी ने किया

कार्यक्रम का संचालन भागवत मर्मज्ञ हरीश तिवाड़ी ने किया। श्रीरामकथा को सफल बनाने में कथा के संरक्षक श्याम सुन्दर अग्रवाल, मुख्य यजमान आशाराम झंवर, संदीप गुप्ता, दैनिक यजमान पवन दायमा व ललित कुमार सिंघी संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार ताम्बी, सचिव शिवशंकर लाहोटी,स्वागत समिति के अध्यक्ष श्याम सुन्दर तोषनीवाल, विश्वनाथ ताम्बी, चम्पालाल राठी, केशरदेव तिवाड़ी, राकेश सारडा, कैलाश सोनी, महेश शर्मा, निर्मल बोथरा, सुमित दायमा हनुमान मल, निर्मल सेठिया, पवन तोषनीवाल,गोपाल दास गुप्ता,सुशील शर्मा,बजरंग तोषनीवाल,सहित अन्य सदस्य सक्रिय है।इस अवसर पर जयंत गुप्ता,श्रीकिशन सर्राफ, शंकरलाल लडिया , नारायण प्रसाद लोहिया, अशोक शर्मा(आशु महाराज), रामनिवास जोशी, पुरुषोत्तम तिवारी, मूलचंद राठी, राजकुमार धनानिया, राजू छंगानी , कंवारीलाल चांडक, सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।