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भाजपा नेता ने क्यों की आत्महत्या, परिवार के लिए जाएंगे बयान, पुलिस खोलेगी बड़े राज !

Jitendra Chaudhary BJP leader Suicide: भाजपा नेता व ठेकेदार जितेंद्र चौधरी की मौत के बाद शहर में चल रहे कथित अवैध सूदखोरी नेटवर्क पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

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BJP leader Suicide

BJP leader Suicide (Photo Source - Patrika)

Jitendra Chaudhary BJP leader Suicide: मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में सुदखोरों का जाल फैला हुआ हैं। उनके चंगुल में कई विभागों के अधिकारी व कर्मचारी भी फंसे हुए है। उनसे ब्याज भी तगड़ा वसूला जा रहा है। भाजपा नेता व ठेकेदार जितेंद्र चौधरी के आत्महत्या के बाद अब फिर से सूदखोरी के मामला उजागर हुआ है। हालांकि अभी तक पुलिस ने इस मामले में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की है। पुलिस का कहना है कि परिजन के बयान के बाद ही जांच आगे बढ़ेगी।

प्रताड़ित करने का लगा था आरोप

भाजपा नेता व ठेकेदार जितेंद्र चौधरी निवासी लवकुश नगर पर करीब 50 लाख रुपए का कर्ज गणेश सकरगाए का था। यह बात स्वंय चौधरी ने अपने बयान में कहीं थी। साथ ही प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाकर जहर पीना बताया था। इस मामले के दूसरे दिन भी मोघट पुलिस की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं की है, लेकिन इस मामले में शहर में चल रहे ब्याज के अवैध कारोबार को उजागर किया है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह से लोग व्याज वालों से परेशान होकर गलत कदम उठाते आए हैं लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं होती।

इससे शहर में दमदम से व्याज का अवैध कारोबार चल रहा है। चौधरी के आत्महत्या मामले में जांच कर रहे मोघट थाना प्रभारी निरीक्षक धीरेश धारवाल ने बताया कि तीसरे के बाद परिजनों ने बयान दर्ज करने के लिए कहा है। उनके आने के बाद भी इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ब्याज का ब्याज वसूला जाता

शहर में व्याज का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। रोज, सप्ताह व माह के हिसाब से ब्याज की दर तय है। 5 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक ब्याज लोगों से वसूला जा रहा है। कोई अगर एक किश्त भी चूक जाता है तो उससे ब्याज का ब्याज वसूला जाता है। मूल रकम से कहीं ज्यादा ब्याज वसूलने के बाद भी पिछा नहीं छोड़ते। सूदखोरों के डर से अपने शिकायत थाने तक नहीं पहुंचते। इससे इनके हौसले बढ़े हुए है।

यह भी अछुते नहीं

शहर में फलों के ठेले लगाने वाले भी ब्याज के दलदल में फंसे हुए हैं। इनसे रोज के हिसाब से 10 से 20 प्रतिशत ब्याज वसूला जा रहा है। सुबह गोदाम से माल लेने के बाद शाम में ब्याज सहित रुपए लौटाना होते हैं। रुपए नहीं देने पर ब्याज ओर अधिक तगड़ा लगा दिया जाता है। कई फल व्यवसायी गोदाम संचालकों के ब्याज में फंसे हुए हैं।