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खंडवा, Jun 06, 2026

इंदौर-इच्छापुर हाईवे के बाईग्राम, भैरोघाट और चोरल घाटों से मिलेगी मुक्ति, पहाड़ों में बन रही हाईटेक टनल

Indore-Ichhapur Highway : राह होगी आसान... पहाड़ों का सीना चीरकर निकालजी जा रही टनल। इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर बाईग्राम, भैरोघाट और चोरल के घाटों से मिलेगी मुक्ति, सीधे पहुंचेंगे इंदौर। आधुनिक तकनीक से चल रहा हाईवे निर्माण का काम।

Indore-Ichhapur Highway

इंदौर-इच्छापुर हाईवे के घाटों से मिलेगी मुक्ति (Photo Source- Patrika)

Tunnel Construction : मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित इंदौर - इच्छापुर (शाहपुर) हाईवे का काम तेजी से चल रहा है। इस हाईवे पर तेजाजी नगर इंदौर से बलवाड़ा के बीच 33.4 किमी मार्ग में सबसे कठिन तीन घाट सेक्शन हैं। इन्हीं घाटों पर एनएचएआई नई तकनीक से तीन जगह पहाड़ों का सीना चीरकर सुरंगों (टनल) के जरिए राह निकाल रहा है। न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) से बन रही तीन टनलों में से दो का काम लगभग पूरा हो चुका है, जबकि तीसरी टनल का निर्माण जारी है। दिसंबर 2026 तक इस मार्ग से वाहन सरपट दौड़ सकेंगे।

इंदौर-एदलाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर के तहत मध्यप्रदेश में कुल 203 किमी फोरलेन सड़क का निर्माण करीब 3900 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। इसमें इंदौर से शाहपुर तक कुल 185.3 किमी मार्ग पांच चरणों में बनाया जा रहा है। इस मार्ग में इंदौर के भंवरकुआं से तेजाजी नगर तक 6.5 किमी सड़क का काम पूरा हो चुका है। हाई स्पीड कॉरिडोर के तहत तेजाजी नगर इंदौर से बलवाड़ा खरगोन तक 33.4 किमी मार्ग में बाईग्राम, भैरोघाट और चोरल के बीच पड़ने वाले घाटों पर टनल (सुरंगों) के माध्यम से सफर आसान किया जा रहा है। यहां 35 से 50 मीटर ऊंचे पहाड़ों के बीच तीन स्थानों पर सुरंगें बनाई जा रही हैं।

इतनी बन चुकी टनल

भैरोघाट में 575 मीटर और बाईग्राम घाट में 480 मीटर लंबी टनल का काम अंतिम चरण में है। वहीं चोरल घाट पर 550 मीटर लंबी टनल के लिए एनएटीएम तकनीक से खुदाई का कार्य किया जा रहा है। हाईवे प्रोजेक्ट के डिप्टी मैनेजर चेतन पटेल ने बताया कि दिसंबर अंत तक इसका कार्य भी पूरा हो जाएगा।

यह है एनएटीएम तकनीक

एनएचएआई न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) से टनल का निर्माण कर रहा है। इस तकनीक का उपयोग सड़क और रेलवे परियोजनाओं में किया जाता है। इसमें पहाड़ों को चरणबद्ध तरीके से काटा जाता है और उनकी प्राकृतिक स्थिति को यथासंभव सुरक्षित रखा जाता है। टनल में सेंसर लगाकर चट्टानों की गतिविधि, दबाव और बैठने की स्थिति की लगातार निगरानी की जाती है। यदि पहाड़ के अंदर 10 मीटर चौड़ी सड़क टनल बनानी हो तो पहले 2-3 मीटर हिस्से की खुदाई की जाती है, फिर तुरंत शॉटक्रीट और रॉक बोल्ट लगाए जाते हैं। इसके बाद अगला हिस्सा खोदा जाता है। इससे पहाड़ की प्राकृतिक मजबूती और संरचना बनी रहती है।

दो घंटे में तय होगा खंडवा-इंदौर का सफर

वर्तमान में खंडवा से इंदौर तक 130 किमी का सफर तय करने में करीब साढ़े तीन से चार घंटे लगते हैं। इसमें सबसे अधिक समय घाट सेक्शन में ही लगता है। तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक घाट सेक्शन में टनल बनने के बाद खंडवा-इंदौर के बीच का सफर घटकर करीब दो से ढाई घंटे का रह जाएगा। धनगांव-बलवाड़ा के बीच मोरटक्का का नया पुल शुरू होने पर वाहन सीधे बायपास से निकल सकेंगे और सनावद-बड़वाह शहरों में प्रवेश करने की आवश्यकता भी नहीं होगी।

यह है हाई स्पीड कॉरिडोर की स्थिति

-पहला चरण: भंवरकुआं से तेजाजी नगर (6.5 किमी, 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण
-दूसरा चरण: तेजाजी नगर से बलवाड़ा (33.4 किमी), 86 प्रतिशत कार्य पूर्ण
-तीसरा चरण: बलवाड़ा से धनगांव (40.4 किमी), 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण
-चौथा चरण: धनगांव से बोरगांव (58 किमी) , 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण
-पांचवां चरण: बोरगांव से शाहपुर, बुरहानपुर (47 किमी), 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण

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