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सड़क पर बिखर गया परिवार का सहारा… हादसे में पिता ने तोड़ा दम, बेटा अस्पताल में जिंदगी से लड़ रहा जंग

Road Accident: कवर्धा जिले में सड़क दुर्घटनाएं अब चेतावनी नहीं, बल्कि भयावह वास्तविकता बन चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि औसतन हर तीन में से दो लोग जान गंवा रहे हैं।

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सड़क हादसे में पिता की मौत व पुत्र गंभीर (फोटो सोर्स- पत्रिका)

सड़क हादसे में पिता की मौत व पुत्र गंभीर (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Kawardha Road Accident: कवर्धा जिले में सड़क दुर्घटनाएं अब चेतावनी नहीं, बल्कि भयावह वास्तविकता बन चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि औसतन हर तीन में से दो लोग जान गंवा रहे हैं। पुलिस के वर्ष 2025 के आंकड़े और शुक्रवार को नेशनल हाईवे पर हुई ताजा घटना यह साबित करती है कि यदि अब भी समाज और प्रशासन नहीं चेते, तो यह सिलसिला और भी घातक रूप ले सकता है।

शुक्रवार दोपहर बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर ट्रांसपोर्ट नगर के पहले तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने मोटरसाइकिल सवार पिता-पुत्र को कुचल दिया। हादसे में 60 वर्षीय विजय खांडेकर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके 26 वर्षीय पुत्र राजा खांडेकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल युवक को प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर किया गया है।

जानें कैसे हुआ दर्दनाक हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे हुई यह टक्कर इतनी भीषण थी कि विजय खांडेकर ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यदि सुरक्षा उपायों का पूरी तरह पालन किया गया होता, विशेषकर हेलमेट का उपयोग और सुरक्षित गति, तो संभव है कि चोटें गंभीर होतीं, लेकिन जान बच सकती थी। सडक़ दुर्घटनाओं में सिर की चोटें ही अधिकांश मौतों का कारण बनती हैं। हेलमेट का सही उपयोग मृत्यु की आशंका को काफी हद तक कम कर देता है।

कवर्धा की सड़कें आज जो संदेश दे रही हैं वह स्पष्ट है सडक़ पर लापरवाही का कोई स्थान नहीं। जीवन अमूल्य है इसे बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। सुरक्षित चलें, सतर्क रहें और दूसरों को भी नियमों के पालन के लिए प्रेरित करें।

दुर्घटनाओं में 55 प्रतिशत मामलों में मौत

पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक जिले में कुल 357 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 196 लोगों की मौत हुई, जबकि 409 लोग घायल हुए। यदि इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सामने आता है कि कुल दुर्घटनाओं में लगभग 55 प्रतिशत मामलों में मौत हुई। इसका अर्थ है कि हर दो से तीन दुर्घटनाओं में एक व्यक्ति अपनी जान गंवा रहा है। यह अनुपात अत्यंत चिंताजनक है और दर्शाता है कि जिले में सड़क सुरक्षा की स्थिति गंभीर है।

आजीवन विकलांगता का दंश झेल रहे

सड़क दुर्घटनाओं से घायलों में से कई स्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं। यानी दुर्घटनाओं का असर केवल मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक लोग आजीवन विकलांगता का दंश झेल रहे हैं। हर मौत के पीछे एक परिवार की कहानी छिपी होती है। किसी मां की गोद सूनी हो जाती है, किसी बच्चे के सिर से पिता का साया उठ जाता है तो कहीं किसी महिला की मांग उजड़ जाती है। कई परिवारों की आर्थिक रीढ़ टूट जाती है। कमाने वाले सदस्य के न रहने से घर की जिम्मेदारियां संकट में पड़ जाती हैं।

हादसों के पीछे प्रमुख कारण

विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रमुख कारणों में तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, ओवरटेकिंग की होड़, नशे में ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना शामिल हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों की तेज आवाजाही भी जोखिम बढ़ाती है। अक्सर देखा गया है कि दोपहिया वाहन चालक हेलमेट को नजरअंदाज कर देते हैं।

चारपहिया वाहन चालक सीट बेल्ट को औपचारिकता समझते हैं। मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहा है। वहीं दुर्घटनाओं का सबसे अधिक कारण शराब के नशे वाहन चालान होता है। बाइक सवार या फिर बड़े वाहन चालक सेवन कर वाहन चालन करते हैं जिससे दुर्घटना निश्चित हो जाती है।

लोखान पुलिया से अनियंत्रित होकर गिरा कंटेनर ट्रेलर, हादसा टला

शुक्रवार दोपहर ही पंडरिया ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र स्थित लोखान पुलिया पर एक बड़ा हादसा टल गया। एक कंटेनर ट्रेलर अचानक अनियंत्रित होकर पुलिया से नीचे जा गिरा। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, अन्यथा बड़ा नुकसान हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय कंटेनर ट्रेलर पुलिया से गुजर रहा था तभी चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। देखते ही देखते भारी वाहन पुलिया से नीचे उतर गया। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। सूचना मिलने पर संबंधित विभाग और पुलिस टीम भी घटनास्थल पर पहुंची।