कटनी, May 24, 2026

Dog attacks rise in Katni district
कटनी. रात के 11 बजे… बस स्टैंड से घर लौट रहे कॉलेज छात्र शुभम तिवारी पर अचानक छह आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह सडक़ किनारे खड़ी गाड़ी पर चढ़ गया, लेकिन तब तक एक कुत्ते ने उसके पैर में काट लिया। अगले दिन उसे जिला अस्पताल पहुंचकर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ा। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि शहर से गांव तक फैल चुके उस डर की तस्वीर है, जिसने लोगों का रात में घर से निकलना मुश्किल कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में जिले में 19 हजार से ज्यादा लोग डॉग बाइट का शिकार हुए हैं। वर्ष 2024-25 में करीब 9 हजार 300 व वर्ष 2025-26 में 10 हजार 300 मामले सामने आए, जबकि अप्रैल व मई माह में अबतक करीब 1500 लोग अस्पताल पहुंचे हैं। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल के एंटी रेबीज सेंटर में रोज लंबी कतारें लग रही हैं। यह आकड़े अस्पताल में लगाए जा रहे एंटी रेबीज इजेक्शन पर आधारित हैं। इसके बावजूद नगर निगम का एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर सक्रिय नहीं है और जिले में एक भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं बन पाया है। आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और डॉग बाइट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी चिंता जता चुका है। इसके बावजूद कटनी में प्रशासन इन्हें पकडऩे व नसबंदी अभियान शुरू नहीं कराई गई है।
छह दिन की यह है तस्वीर
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कटनी रेलवे स्टेशन के बाहर रात के समय आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। कई यात्री बच्चों और सामान को संभालते हुए तेजी से निकलते दिखे। ऑटो चालकों का कहना है कि देर रात यहां सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
बस स्टैंड परिसर में कचरा पॉइंट के आसपास 10 से ज्यादा कुत्ते बैठे मिले। बस रुकते ही वे यात्रियों के बीच दौडऩे लगे। महिलाएं और बच्चे डरकर दूर हटते नजर आए।
सुबह के समय कई स्कूलों और कॉलोनियों के बाहर कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चे सबसे ज्यादा भय में रहते हैं। कई बार बच्चे गिरकर घायल भी हो चुके हैं।
जिला अस्पताल के एंटी रेबीज सेंटर में हर दिन 80 से 100 लोग इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। कई मरीजों को पांच-पांच इंजेक्शन का पूरा कोर्स लेना पड़ रहा है। माधवनगर निवासी राजेश यादव ने बताया कि मैं दूध लेने निकला था। अचानक पीछे से कुत्ते ने काट लिया। अब पांच इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। अभिभावक रीना पटेल ने बताया कि बेटा स्कूल से लौट रहा था, तभी गली के कुत्तों ने हमला कर दिया। अब वह अकेले बाहर जाने से डरता है।
नगर निगम ने कटायेघाट क्षेत्र में लगभग तीन लाख रुपए की लागत से एबीसी सेंटर तैयार कराया, लेकिन यहां कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती न होने के कारण यह निष्क्रिय पड़ा हुआ है। नगरनिगम की कुत्ता पकडऩे वाली गाड़ी भी कभी-कभार नजर आती है। दो समाजसेवी संस्थाएं निजी स्तर पर डॉग केयर सेंटर चला रही हैं, लेकिन बढ़ती संख्या के सामने ये व्यवस्थाएं बेहद छोटी साबित हो रही हैं।
कई कॉलोनियों में पालतू कुत्तों को बिना पट्टे के घुमाया जा रहा है। कई मामलों में वैक्सीनेशन भी नहीं कराया जाता। पिछले साल पालतू कुत्तों के काटने की शिकायतें भी सामने आईं, लेकिन कार्रवाई बेहद सीमित रही। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि कचरा पॉइंट के आसपास कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। भोजन की तलाश में वे झुंड बनाकर घूमते हैं और राहगीरों पर हमला कर देते हैं।
शहर में लगभग तीन हजार कुत्ते हैं। इनके ऑपरेशन के लिए कटायेघाट के पास सेंटर बनाया गया है। उसमें कुछ जरूरी कार्य पूरे कराए जा रहे हैं। जल्द ही नियमानुसार कुत्ते पकडऩे सहित अन्य जरूरी कार्रवाई की जाएंगी।
Published on: 24 May 2026 07:40 pm

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