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मिले नए मम्मी-पापा: 45 गुमनाम जिंदगियों को मिली नई पहचान, दो सात समंदर पर बना नया आसरा

45 गुमनाम जिंदगियों को मिली नई पहचान, दो सात समंदर पर बना नया आसरा बालमीक पांडेय मासूमों को मिला मां-बाप का साया, सूने आंगनों में लौटी किलकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल से अनाथ बच्चों की सूनी दुनिया में लौटी मुस्कान

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कटनी

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Balmeek Pandey

Feb 12, 2026

Abandoned children were given adoption

Abandoned children were given adoption

बालमीक पांडेय @ कटनी. नौ माह तक मां की कोख में पलने के बाद जब किसी बच्चे को दुनिया में आने पर लावारिश छोड़ दिया जाता है, तो उसकी नन्ही सी जिंदगी अनजाने अंधेरों में खो जाती है। कोई मंदिर की सीढिय़ों पर, कोई अस्पताल के बाहर तो कोई सफर के दौरान गुम हो जाता है। लेकिन कटनी जिले में ऐसी गुमनाम जिंदगियों को अब नई पहचान और नया परिवार मिल रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग और केंद्रीय दत्तक अभिग्रहण अभिकरण (कारा) के माध्यम से अनाथ आश्रमों में रह रहे बच्चों को कानूनी रूप से लीगल फ्री कराकर उनके जीवन में खुशियों की नई सुबह लाई जा रही है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक 8 बच्चों को गोद दिलाया जा चुका है, जिनमें से 2 बच्चों को इंटर कंट्री अडॉप्शन के तहत अमेरिका के दंपत्तियों ने अपनाया है।

यह है 2013 से स्थिति

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2013 से अब तक 45 बच्चों को नया घर और मां-बाप का प्यार मिल चुका है। वर्तमान में भी आधा दर्जन से अधिक बच्चों की दत्तक प्रक्रिया जारी है। संतान की चाह रखने वाले दंपत्ति कारा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन बच्चों का चयन कर रहे हैं और कलेक्टर व एडीएम न्यायालय के आदेश से बच्चों को विधिवत दत्तक माता-पिता को सौंपा जा रहा है। यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि टूटी किस्मतों को जोडऩे का संवेदनशील प्रयास है। जिन आंगनों में कभी सन्नाटा था, वहां अब मासूमों की किलकारियां गूंज रही हैं। मां-बाप की ममता से घर महक उठे हैं और लावारिश कहे जाने वाले बच्चे अब किसी के जीवन की सबसे बड़ी खुशी बन चुके हैं।

यह अपनाई गई प्रक्रिया

लावारिश मिले बच्चों का रेस्क्यू कराए जाने के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के माध्यम से शिशु गृह में रखकर देखभाल होती है। 2 साल तक के बच्चों को 60 दिन में व बड़े बच्चों को 4 माह में लीगल फ्री कराया जा रहा है। माता-पिता का पता न चलने पर केंद्रीय दत्तक गृहण अभिकरण (कारा) पोर्टल में बच्चों का पंजीयन किया जाता है। गोद लेने वाले दंपत्ति भी पंजीकृत होते हैं। वेटिंग लिस्ट के अनुसार नंबर आने पर ऑनलाइन बच्चे दिखाए जाते हैं। दंपत्ति को 24 घंटे में बच्चे को रिजर्व करते हुए एक माह में स्वीकृति कराते हुए कलेक्टर व एडीएम कोर्ट से गोद दिलाया जा रहा है। मनीष तिवारी के अनुसार रिश्तेदारों के बच्चे गोद लेना हो तो वे भी कारा में पंजीयन करना होगा।

इन बच्चों को हाल में मिले माता-पिता
केस 01

रोहित को 7 मार्च 2024 को कटनी रेलवे स्टेशन के बाहर लावारिश अवस्था में पाया गया था। बालक को चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर बाल संरक्षण गृह में प्रवेश दिया गया। परिजनों की तलाश के प्रयास असफल रहे। विधिसम्मत प्रक्रिया पूर्ण कर 12 जून को बालक को लीगल फ्री घोषित किया गया और बाद में न्यायालयीन आदेश से मुंबई की दंपत्ति को दत्तक ग्रहण कराया गया।

केस 02

माही 19 फरवरी को कटनी रेलवे स्टेशन के पास रोती हुई अवस्था में मिली थी। सूचना मिलने पर चाइल्ड लाइन ने बालिका को संरक्षण में लिया। बाल कल्याण समिति के आदेश से शासकीय संरक्षण गृह में रखा गया। परिजनों की पहचान के लिए समाचार प्रकाशन कराया गया, पर दावा नहीं आया। 24 सितंबर को बालिका को लीगल फ्री घोषित कर गुजरात निवासी दंपत्ति को दत्तक सौंपा गया।

केस 03

रयान को उसके जैविक माता-पिता द्वारा बाल कल्याण समिति के समक्ष 26 मार्च को स्वेच्छा से सौंपा गया। निर्धारित पुनर्विचार अवधि पूर्ण होने के बाद 3 जुलाई को बालक को दत्तक हेतु मुक्त किया गया। समस्त कानूनी प्रक्रिया पूर्ण कर न्यायालय के आदेश से महाराष्ट्र निवासी दंपत्ति को बालक का दत्तक ग्रहण कराया गया, जिससे उसे नागपुर महाराष्ट्र में स्थायी परिवार मिल सका।

केस 04

समर 8 अप्रेल को कटनी रेलवे स्टेशन के पास भटकते हुए मिला। बालक की उम्र कम होने के कारण वह अपना पता नहीं बता सका। पुलिस और चाइल्ड लाइन की मदद से परिजनों की तलाश की गई, पर सफलता नहीं मिली। बाल कल्याण समिति ने उसे संरक्षण गृह में रखा। 20 नवंबर को लीगल फ्री घोषित कर न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत दत्तक सौंपा गया। लखनऊ की फैमिली को सौंपा गया।

केस 05

14 दिसंबर 2021 को सागर को रेलवे लाइन के पास अत्यंत असुरक्षित अवस्था में पाया गया था। बालक को तत्काल संरक्षण में लेकर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। लंबे समय तक परिजनों की तलाश और समाचार प्रकाशन के बावजूद कोई दावा सामने नहीं आया। विधिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 15 दिसंबर को बालक को दत्तक के लिए मुक्त किया गया। अकरान्सस अमेरिया के दंपत्ति को सौंपा गया।

केस 06

रीना को अनाथ अवस्था में संरक्षण गृह में रखा गया था। बालिका के संबंध में आवश्यक जांच, काउंसलिंग और कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। बाल कल्याण समिति और न्यायालय के आदेश से 15 दिसंबर को बालिका को दत्तक के लिए लीगल फ्री घोषित किया गया। बाद में कारा पोर्टल के माध्यम से चयनित दंपत्ति को विधिवत दत्तक सौंपकर उसे सुरक्षित अरकांसस अमेरिका में भविष्य प्रदान किया गया।

वर्जन

इस वर्ष अबतक 8 अनाथ बच्चों को लीगल फ्री कराते हुए केंद्रीय दत्तक गृहण अभिकरण के माध्यम से अडॉप्शन कराया गया है। 2013 से अबतक 40 से अधिक बच्चों को गोद दिलाया गया है। अभी कुछ बच्चों की प्रक्रिया चल रही है। कभी अनाथालय की दीवारों के सहारे जी रहे ये बच्चे अब मां की ममता और पिता के स्नेह में पल रहे हैं। मासूम आंखों में जो खालीपन था, अब वहां चमक है, मुस्कान है और भविष्य की नई उम्मीदें हैं।

वनश्री कुर्वेती, महिला सशक्तिकरण अधिकारी।