
कानपुर।आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोपों में घिरे चर्चित लेखपाल आलोक दुबे को आखिरकार राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ दायर उनकी अपील को खारिज करते हुए यह कड़ी कार्रवाई की है। आदेश जारी होते ही राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया।
यह मामला उस समय प्रकाश में आया था जब आलोक दुबे राजस्व निरीक्षक के पद पर तैनात थे। जांच के दौरान यह सामने आया कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जमीनों के क्रय-विक्रय के कारोबार में सक्रिय भूमिका निभाई। आरोप है कि उन्होंने सरकारी दायित्वों का समुचित पालन नहीं किया और निजी लाभ के लिए पद का इस्तेमाल किया।
विभागीय जांच में यह भी पाया गया कि आलोक दुबे ने अपने पद पर रहते हुए आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच रिपोर्ट में कई ऐसे लेन-देन और संपत्तियों का उल्लेख किया गया, जो उनकी घोषित आय से कहीं अधिक पाए गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने पद और अधिकारों का उपयोग निजी लाभ के लिए किया।
जिलाधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ आलोक दुबे ने मंडलायुक्त के समक्ष अपील दायर की थी। हालांकि मंडलायुक्त ने पूरे मामले की सुनवाई और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद उनकी अपील को निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि अपीलकर्ता ने राजस्व निरीक्षक के रूप में रहते हुए अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग किया और निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए भूमियों के क्रय-विक्रय में संलिप्त रहे।
मंडलायुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आलोक दुबे, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक (वर्तमान लेखपाल) को तत्काल प्रभाव से पद और राजकीय सेवा से पदच्युत किया जाता है। आदेश की प्रति जिलाधिकारी कानपुर नगर समेत संबंधित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारी को भेज दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी पद का दुरुपयोग करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
07 Mar 2026 05:43 pm
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