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सुविधा के साथ दुविधा बनी यूपीआइ, दुकानों पर लगे ‘ओनली कैश’ के बोर्ड

1 से 3 प्रतिशत तक वॉलेट टॉपअप, रिचार्ज और बिल पेमेंट पर लग रहा चार्ज

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जोधपुर शहर की कई दु​कानों पर नो - ऑनलाइन पेमेंट के बोर्ड लग चुके हैं

जोधपुर. डिजिटल इंडिया की मुहिम के बीच अब यूपीआइ और ऑनलाइन पेमेंट आम लोगों की जेब पर भार डालने लगे हैं। शहर के कई बाजारों में दुकानदारों ने ‘सिर्फ कैश पेमें’ के बोर्ड तक लगा दिए हैं। वजह है ऑनलाइन भुगतान पर बढ़ती प्लेटफॉर्म फीस और ट्रांजेक्शन चार्ज, जिससे उपभोक्ता और व्यापारी दोनों परेशान हैं।

पिछले कुछ महीनों में बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज, क्रेडिट कार्ड बिल, बिजली-पानी के बिल और वॉलेट लोड करने जैसे कामों पर अलग-अलग प्लेटफॉर्म फीस ली जा रही है। इससे डिजिटल भुगतान का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे आने लगा है और लोग छोटे भुगतान के लिए फिर से नकद का सहारा लेने लगे हैं। हालांकि सामान्य यूपीआई ट्रांजेक्शन (बैंक से बैंक) पर अभी भी अधिकांश ऐप कोई चार्ज नहीं लेते, लेकिन यूपीआई वॉलेट से लिंक कर भुगतान करने पर 1 से 2 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लग सकता है। कुछ प्लेटफॉर्म 2000 रुपये से अधिक के वॉलेट लोड पर 2 से 2.5 प्रतिशत तक शुल्क वसूलते हैं।

यहां पड़ रहा भार

- बिल पेमेंट और रिचार्ज पर भी अलग-अलग शुल्क तय हैं।

- कई ऐप 5 से 10 रुपए तक सुविधा शुल्क (कन्वीनियंस फीस) ले रहे हैं।

- क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान पर कुछ प्लेटफॉर्म 0.5 से 1 प्रतिशत तक चार्ज जोड़ रहे हैं।

- थर्ड-पार्टी ऐप से गैस बुकिंग या फास्टैग रिचार्ज पर भी 3 से 15 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क देखा जा रहा है।

छोटे व्यापारियों ने लगाए बोर्ड

जोधपुर में ऐसे छोटे व्यापारी जो कि दूध, नमकीन, पान बेचने का व्यापार करते हैं उन्होंने बोर्ड लगा दिए हैं। क्योंकि उनके पास 20 से 100 रुपए तक का भुगतान होता है और हर भुगतान पर चार्ज देना पड़ रहा है।

लोगों को लगी आदत, उसी का फायदा

कोविड के बाद लोगों ने ऑनलाइन पेमेंट को अपनाया। पहले तो इसको बढ़ावा देने के लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं लगता था। लेकिन बिल पेमेंट से लेकर रिचार्ज करने तक के काम में तीन से चार रुपए लग रहे।