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खुद को बताया ‘नपुंसक’ लेकिन बेटी ने बना लिया था वीडियो, ‘…घर नहीं जाऊंगी’, दरिंदगी करने वाले बाप को नहीं मिली राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने इसे भरोसे का गंभीर विश्वासघात बताते हुए राज्य सरकार को पीड़िता को 7 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया।

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Rajasthan High Court Upholds Life Term for Father in Minor Daughter Rape Case Orders 7 Lakh Compensation

Rajasthan High Court Verdict (Patrika File Photo)

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपनी ही 14 वर्षीय बेटी से लगातार दुष्कर्म करने वाले पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि जब पिता ही बच्ची के शरीर और गरिमा का सबसे गंभीर उल्लंघन करता है, तो यह विश्वासघात केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत होता है। कोर्ट ने पीड़िता को राहत देते हुए राज्य सरकार से 7 लाख रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

न्यायाधीश विनित कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा खंडपीठ ने दोषी पिता की अपील खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर सही सजा सुनाई थी, जिसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

पीड़िता ने खुद बनाया वीडियो

पीड़िता ने पिता की ओर से किए गए यौन शोषण का वीडियो बना लिया। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से तर्क दिया कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अपीलार्थी नपुंसक है। खंडपीठ ने वीडियो देखा और पाया कि आरोपी का यौन संबंध बनाने में पूरी तरह अक्षम होने का दावा बेमानी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी-अपीलकर्ता का पिता होने के नाते उसकी सुरक्षा का कर्तव्य था।

कविता से बताई वेदना

हाईकोर्ट ने कविता के जरिए पीड़िता की वेदना को शब्द दिए। कहा, आज भी वातावरण में करुण पुकारों की प्रतिध्वनि सुनाई देती है, बेटियां पीड़ा सहते हुए जीवन व्यतीत कर रही हैं।

समाचारों की सुर्खियां किसी अबला के रौंदे जाने की कथा कहेंगी; किसी मासूम के रक्त से समाज का माथा पुनः कलंकित होगा और वह अबोध प्रश्न फिर हवा में तैरता रहेगा, मेरा अपराध क्या था? क्या बेटी होना ही मेरा दोष है?

हाईकोर्ट में नाबालिग बेटी बोली, नहीं रहना माता-पिता के साथ

राजस्थान हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण करते हुए नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के अनुसार बालिका गृह में ही रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि बालिग होने तक लड़की उदयपुर स्थित बालिका गृह में रहेगी। इसके बाद वह अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र होगी।

न्यायाधीश विनित कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ के समक्ष चित्तौड़गढ़ जिला निवासी पिता ने एक व्यक्ति पर खुद की नाबालिग बेटी को अवैध बंधक बनाने का आरोप लगाया था।

खंडपीठ के निर्देश पर दो फरवरी को नाबालिग को कोर्ट में पेश किया गया, जहां लड़की ने कहा कि उसके पिता अवैध गतिविधियों में शामिल हैं, इसलिए वह अपने घर नहीं जाना चाहती। कोर्ट को उस समय लड़की की मानसिक स्थिति स्थिर नहीं लगी। इसलिए काउंसलिंग के लिए बालिका गृह भेज दिया गया था।