झालावाड़, May 21, 2026

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज की फोटो: पत्रिका
Jhalawar Medical College: राजस्थान का झालावाड़ मेडिकल कॉलेज अब चिकित्सा क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर रहा है। न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेकियल प्लेक्सस और नर्व ट्रांसफर जैसी जटिल सर्जरी की सफलता ने इसे प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल बना दिया है, जहां इस गंभीर बीमारी का सफल और अत्याधुनिक उपचार किया जा रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी ने करीब एक वर्ष पूर्व यह सर्जरी शुरू की थी। तब से अब तक वे और उनकी टीम प्रदेश व देश के विभिन्न हिस्सों से आए मरीजों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें स्थायी अपंगता से बचा चुके हैं।
ब्रेकियल प्लेक्सस चोट मुख्य रूप से सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होती है, जिसमें कंधे और गर्दन के बीच की नसें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस प्रकार की चोट का उपचार अत्यंत जटिल और महंगा होता है, जिसे निजी अस्पतालों में करवाने पर लाखों रुपये तक का खर्च आता है। लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में यही जटिल सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क की जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।
इस अस्पताल की सफलता के कारण अब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं। दूर-दराज के मरीजों को भी यहां आधुनिक चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के अनपरा निवासी 18 वर्षीय युवक अजय, जो एक सड़क दुर्घटना के बाद लंबे समय तक विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए भटकते रहे, अंततः सोशल मीडिया के माध्यम से झालावाड़ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां उनका सफल और निःशुल्क ऑपरेशन किया गया, जिससे उन्हें नई जिंदगी मिली।
इसी तरह भरतपुर निवासी विष्णु कुमार, झालावाड़ निवासी देवीलाल और बारां निवासी आसाराम जैसे कई मरीजों ने भी यहां उपचार प्राप्त कर राहत पाई है। यह अस्पताल अब जटिल न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
डॉ. रामसेवक योगी के अनुसार पिछले एक वर्ष में 15 से 20 अत्यंत जटिल ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं। इस उपलब्धि में डॉ. रामावतार मालव, डॉ. अक्षय चोपड़ा, डॉ. साहिल रजा अंसारी, डॉ. असद, डॉ. अल्तमस तथा नर्सिंग स्टाफ कन्हैया की टीम का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। यह दर्शाता है कि छोटे शहरों के सरकारी अस्पताल भी समर्पण से बड़ी मिसाल कायम कर सकते हैं।
Updated on: 21 May 2026 10:48 am

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