
मरु- महोत्सव के दौरान स्वर्णनगरी इन दिनों देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों से गुलजार है। रेतीले धोरों, सोनार दुर्ग, हवेलियों, लोक-संगीत और ऊंट सफारी का आकर्षण विदेशी सैलानियों को खासा लुभा रहा है। सात समंदर पार से भारत के पश्चिमी सीमा के अंतिम छोर पर बसे इस सैकड़ों साल प्राचीन शहर के भ्रमण पर आए पर्यटक मरु- संस्कृति के रंग में पूरी तरह रंगे नजर आ रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और राजस्थानी खानपान उनके अनुभव को यादगार बना रहे हैं।
फ्रांस से आई पर्यटक एना मार्टिन ने कहा कि जैसलमेर का किला और यहां की पीली पत्थर की वास्तुकला अद्भुत है। ऐसा लगता है जैसे पूरा शहर सोने से बना हो। लोक कलाकारों का संगीत दिल को छू लेने वाला है।
इटली की रोसी ऊंट सफारी से खासे उत्साहित दिखी। उन्होंने बताया कि रेगिस्तान में सूर्यास्त देखना मेरे जीवन के सबसे सुंदर अनुभवों में से एक है। यहां की शांति और खुला आसमान मन को सुकून देता है।
इटली की ही पर्यटक सोफिया क्लाइन ने स्थानीय लोगों के व्यवहार की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां के लोग बहुत विनम्र और मेहमाननवाज हैं। हमने जीप सफारी के दौरान गांव में पारंपरिक भोजन किया, जो बेहद स्वादिष्ट था। यह सांस्कृतिक जुड़ाव खास लगा।
ऑस्ट्रेलिया से आए डेनियल ब्राउन ने मरु उत्सव शैली के कार्यक्रम को यादगार बताया। उनके अनुसार, लोकनृत्य और कालबेलिया प्रस्तुति ऊर्जा से भरपूर थी। कलाकारों की वेशभूषा और उनके बीच तालमेल शानदार है।
स्पेन के जॉनसन ने पटवों की हवेली और नाथमल की हवेली की नक्काशी को बेमिसाल बताया। उन्होंने कहा, इतनी बारीक कारीगरी मैंने पहले कहीं नहीं देखी। यह जीवित इतिहास जैसा अनुभव है।
बेल्जियम की डेंजी ब्राउन ने कहा, मैंने पहली बार रेगिस्तान देखा है। यहां की संस्कृति, संगीत और रंग बहुत जीवंत हैं। मैंने राजस्थानी पगड़ी भी पहनी और फोटो खिंचवाए — यह मेरे लिए खास स्मृति रहेगी।
पर्यटन कारोबार से जुड़े जोराराम के अनुसार, विदेशी सैलानी न केवल ऐतिहासिक धरोहरों में रुचि ले रहे हैं, बल्कि गांव पर्यटन, लोक कला और पारंपरिक जीवनशैली को भी करीब से समझना चाहते हैं। इससे स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी अच्छा लाभ मिल रहा है। जैसलमेर की मरु संस्कृति का यह आकर्षण वैश्विक स्तर पर लगातार मजबूत होता दिख रहा है।
Published on:
30 Jan 2026 09:03 pm
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