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आज का सवाल – शहर में जगह-जगह आवारा श्वानों की समस्या को लेकर आप क्या सोचते हैं?

जैसलमेर में पिछले लम्बे समय से आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या आमजन सहित सैलानियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।

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आज का सवाल - शहर में जगह-जगह आवारा श्वानों की समस्या को लेकर आप क्या सोचते हैं?
जैसलमेर में पिछले लम्बे समय से आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या आमजन सहित सैलानियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। ये श्वान आए दिन लोगों को काट कर उन्हें घायल कर देते हैं। इससे शहर की छवि पर भी आंच आती है।

खतरे का सबब बन गए हैं श्वान

शहर के भीतरी भागों में आवारा श्वानों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। ये श्वान आवाजाही करने वाले लोगों के लिए खतरा बन गए हैं। कई बार नगरपरिषद से गुहार लगाने के बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदारों को उचित कार्रवाई कर लोगों को राहत दिलानी चाहिए।

  • रमेश खत्री, स्थानीय निवासीकोई नहीं दे रहा ध्यानजैसलमेर के कई गली-मोहल्ले ऐसे हैं, जहां स्ट्रीट डॉग्स की बहुतायत है। वे यातायात व्यवस्था में भी बाधा बनते हैं और कई बार अचानक किसी को भी शिकार बनाने से भी नहीं चूकते। यह समस्या काफी बढ़ गई है, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता।
  • घनश्याम बिस्सा, निवासी बिस्सा पाड़ारस्मी अदायगी कर रहे जिम्मेदारस्वर्णनगरी नाम से मशहूर जैसलमेर में श्वानों की समस्या का समाधान करने में जिम्मेदार केवल औपचारिकताओं का निर्वहन करते नजर आते हैं। जबकि यह विषय वर्तमान में देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा हुआ है।
  • लोकेश कुमार, व्यवसायीकब मिलेगी निजातशहर के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों गांधी चौक, हनुमान चौराहा सहित अंदरूनी इलाकों से लेकर आवासीय कॉलोनियां व मुख्य मार्ग तक शामिल हैं, में श्वानों की समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। विशेषकर रात व अलसुबह के समय में ये श्वान हर किसी के लिए संकट का कारण बन जाते हैं।
  • नवीन वाधवानी, स्थानीय निवासीअगले सप्ताह का सवाल - जैसलमेर में विद्युत आपूर्ति में व्यवधान के समाधान में लगने वाला समय बहुत अधिक है, इस पर आप क्या सोचते हैं?