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पोकरण में जनसभा, ओरण बचाने को लेकर आमजन से मांगा सहयोग

ओरण टीम की ओर से तनोट से जयपुर तक की जा रही पदयात्रा गत दो दिनों से पोकरण क्षेत्र में है। पदयात्रियों का यहां पहुंचने पर स्वागत व अभिनंदन किया गया। इसके साथ ही मंगलवार को जनसभा का भी आयोजन किया गया।

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ओरण टीम की ओर से तनोट से जयपुर तक की जा रही पदयात्रा गत दो दिनों से पोकरण क्षेत्र में है। पदयात्रियों का यहां पहुंचने पर स्वागत व अभिनंदन किया गया। इसके साथ ही मंगलवार को जनसभा का भी आयोजन किया गया। गौरतलब है कि जिले भर ओरण, गोचर, चारागाह सहित तालाबों के पायतन व आगोर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग को लेकर ओरण टीम के सुमेरसिंह सांवता, भोपालसिंह झलोड़ा के नेतृत्व में सदस्यों ने तनोट से पदयात्रा शुरू की थी, जो जयपुर तक जाएगी। गत दो दिनों से पदयात्री पोकरण क्षेत्र में है। सोमवार को रामदेवरा में दर्शनों के बाद पदयात्रियों ने गोमट के पास रात्रि विश्राम किया। मंगलवार दोपहर पदयात्री गोमट गांव से पदयात्रा करते हुए पोकरण पहुंचे। गोमट गांव के गड़ीसर तालाब के पास नगरपालिका नेताप्रतिपक्ष नारायण रंगा के नेतृत्व में लोगों ने स्वागत किया। इसी तरह जैसलमेर रोड पर शक्तिस्थल के सामने खंगारसिंह, विरेन्द्रसिंह, देवेन्द्रसिंह मोडरडी, जूंझारसिंह लूणा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की ओर से पदयात्रियों का स्वागत व अभिनंदन किया गया। डीजे पर चल रहे भजनों पर झूमते हुए पदयात्री और समर्थक जैसलमेर रोड, मदरसा रोड, जयनारायण व्यास सर्किल, स्टेशन रोड होते हुए पंचायत समिति सांकड़ा कार्यालय के आगे स्थित मैदान में पहुंचे।

जनसभा में उमड़ी भीड़

पंचायत समिति के आगे स्थित मैदान में संत महादेवपुरी डेलासर, नारायणभारती ब्रह्मसर, रामस्नेही संत दीपाराम, बांदोलाई के संत अनूपपुरी के सानिध्य में जनसभा का आयोजन किया गया। ओरण टीम के सुमेरसिंह सांवता व भोपालसिंह झलोड़ा ने कहा कि ओरण, गोचर, चारागाह पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा है। यहां लोगों का मुख्य व्यवसाय ही पशुपालन है। ऐसे में ओरण, गोचर, चारागाह नहीं बचेंगे तो लोगों का रोजगार समाप्त हो जाएगा। सभा के दौरान संत नारायणभारती, महादेवपुरी, केशरसिंह पारेवर, भगवानसिंह नेतसी, अरविंदसिंह अवाय, धर्मवीरसिंह सांकड़ा, प्रकाश व्यास जाखण, चतुरसिंह जाम, सरदारसिंह दव, बलवंतसिंह जोधा, हरीश धणदे, उगमसिंह सोढ़ाकोर, विरेन्द्रसिंह रामगढ़, शकूरखां नवतला, आसूसिंह आसकंद्रा, मूलचंद आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन आसूराम तेजमालता ने किया।

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