जैसलमेर, May 30, 2026

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केस-1: ऑनलाइन परीक्षा के दौरान तकनीकी ब्रेकडाउन
एक कोचिंग छात्र ने बताया कि ऑनलाइन टेस्ट के दौरान तीन बार बिजली ट्रिप हुई। हर बार इंटरनेट कनेक्शन बाधित हुआ और पुनः लॉगिन में समय लगा। कुल मिलाकर लगभग आधे घंटे का शैक्षणिक नुकसान हुआ। छात्र के अनुसार समस्या लंबी कटौती नहीं बल्कि बार-बार आने वाले छोटे ब्रेक हैं।
केस-2: रात की बिजली अस्थिरता और जीवन प्रभावित
आवासीय क्षेत्रों में रात के समय बार-बार बिजली जाने की स्थिति देखी गई। कूलर और पंखे बंद होते ही कमरों का तापमान तेजी से बढ़ता है। कुछ मिनट की ट्रिपिंग भी नींद के पैटर्न को पूरी तरह प्रभावित कर देती है, जिससे बुजुर्ग और बच्चे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
केस-3: डिजिटल भुगतान और छोटे व्यवसाय पर दबाव
स्थानीय बाजार के दुकानदारों के अनुसार यूपीआई और डिजिटल बिलिंग सिस्टम बिजली पर निर्भर हैं। ट्रिपिंग के समय भुगतान प्रक्रिया रुक जाती है और ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है। इससे कारोबार की गति धीमी होती है और भीड़ प्रबंधन भी प्रभावित होता है।
जैसलमेर शहर व समीपवर्ती क्षेत्र में बिजली आपूर्ति का परिदृश्य तकनीकी रूप से स्थिर दिखने के बावजूद उपभोक्ताओं की पीड़ा छिपाए नहीं छिप रही। बेरोकटोक विद्युत आपूर्ति के दावों के बीच ग्राउंड लेवल पर बार-बार होने वाली ट्रिपिंग और माइक्रो कट एक अलग कहानी बयान कर रहे हैं। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि गत एक सप्ताह में कई क्षेत्रों में दिन भर में 5 से 10 मिनट के अल्पकालिक व्यवधान कई बार दर्ज हो रहे हैं। यह व्यवधान आधिकारिक कटौती में शामिल नहीं होते, लेकिन वास्तविक उपयोग पर इसका सीधा असर पड़ता है। जानकारों के अनुसार बिजली आपूर्ति का मूल्यांकन केवल घंटों की उपलब्धता से पूरा नहीं होता, बल्कि उसकी निरंतरता और गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
- दिन में कई बार अल्पकालिक ट्रिपिंग दर्ज
-ग्रामीण क्षेत्रों में फॉल्ट रिस्पांस समय अधिक
-रात के समय वोल्टेज में उतार-चढ़ाव अधिक महसूस
-माइक्रो कट की घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड में सीमित रूप से दर्ज
बिजली अब केवल घरेलू सुविधा नहीं रही, बल्कि डिजिटल लाइफलाइन बन चुकी है। ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग, ई-कॉमर्स, और वर्क फ्रॉम होम सिस्टम पूरी तरह स्थिर बिजली आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में कुछ मिनट का व्यवधान भी व्यापक प्रभाव डाल रहा है।
डिस्कॉम के अधिशासी अभियंता प्रदीप बारूपाल के अनुसार कुछ क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से ट्रिपिंग और फॉल्ट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। जैसे ही किसी खराबी की सूचना मिलती है, विभागीय टीम को तुरंत मौके पर भेजकर सुधार कार्य शुरू किया जाता है। विभाग का दावा है कि अधिकतर मामलों में फॉल्ट को कम समय में ठीक करने की व्यवस्था सक्रिय है, ताकि उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली बाधित न रहनी पड़े।
उभर रहे प्रमुख सवाल
-क्या माइक्रो इंटरप्शन को सिस्टम रिकॉर्ड में शामिल किया जाता है?
-फॉल्ट सुधार की औसत वास्तविक समय सीमा क्या है?
-शहरी और ग्रामीण सेवा गुणवत्ता में कितना अंतर है?
-शिकायत निवारण प्रणाली कितनी प्रभावी है?
Published on: 30 May 2026 08:54 pm


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