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‘सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण’… वसुंधरा राजे ने खेजड़ी बचाओ आंदोलन को दिया खुला समर्थन

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने खेजड़ी बचाओ आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। उन्होंने एक्स पर ट्वीट करते हुए अपनी एक फोटो भी साझा की है।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Feb 03, 2026

Vasundhara Raje Scindia

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे (फोटो-@VasundharaBJP)

जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने राज्य वृक्ष खेजड़ी की सुरक्षा को लेकर चल रहे आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर राजस्थानी लोकोक्ति “सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण” लिखते हुए पर्यावरण संरक्षण की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। राजे का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है, जब बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण कानून की मांग को लेकर सैकड़ों पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर बैठे हैं।

वसुंधरा राजे ने अपने पोस्ट में खेजड़ी को केवल पेड़ नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति से जुड़ा देववृक्ष बताया। उन्होंने लिखा कि 'खेजड़ी राजस्थान की पहचान है, जिसे सदियों से पूजा जाता रहा है और जिसकी रक्षा करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।' उनके इस ट्वीट से विश्नोई समाज और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के आंदोलन को बड़ी राजनीतिक ताकत मिली है।

वसुंधरा राजे ने ट्वीट में क्या लिखा?

उन्हों ट्वीट करते हुए लिखा- 'खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। हमारे यहाँ खेजड़ी की पूजा की जाती हैं। मैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूँ। जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है। राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इसे बचाना चाहिए। मैं खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूँ।'

आमरण अनशन पर पर्यावरण प्रेमी

गौरतलब है कि बीकानेर जिला कलेक्ट्रेट के सामने पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले “खेजड़ी बचाओ महापड़ाव” जारी है। दूसरे दिन मंगलवार को 458 पर्यावरण प्रेमियों ने अन्न-जल त्याग कर अनशन शुरू कर दिया। आंदोलनकारी राज्य विधानसभा में ट्री प्रोटेक्शन बिल लाने और 50 साल से पुराने खेजड़ी सहित अन्य पेड़ों को किसी भी सरकारी परियोजना के लिए न काटे जाने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन को साधु-संतों का भी समर्थन

धरना स्थल पर 50 संतों की मौजूदगी में दिनभर प्रवचन, भजन और पर्यावरण पर चर्चा चली। आंदोलन में विश्नोई महासभा के पदाधिकारी, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, दिव्यांग, वन्यजीव रक्षक शहीद निहालचंद धारणिया के 92 वर्षीय पिता हनुमानाराम सहित कई लोग शामिल हैं। बीकानेर के अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर और बाड़मेर से भी लोग पहुंचे हैं।

प्रशासन अलर्ट

प्रशासन ने कलक्ट्रेट के आसपास बैरिकेडिंग कर पुलिस तैनात कर दी है और सादी वर्दी में सीआईडी भी निगरानी कर रही है। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी से सरकार पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।

सरकार पर दबाव

अब वसुंधरा राजे के समर्थन के बाद यह आंदोलन केवल पर्यावरण मुद्दा नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इससे सरकार पर विधानसभा सत्र में कानून लाने का दबाव और बढ़ेगा।

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