
थाईलैंड की राजकुमारी सिरिवन्नवरी नारिरतना 10 फरवरी तक राजस्थान के दौरे पर हैं। उनकी सुरक्षा के लिए जयपुर से लेकर जोधपुर तक कड़ा पहरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस राजकुमारी को देखने के लिए जयपुर की सड़कों पर लक्जरी गाड़ियों का काफिला गुजर रहा है, वह खुद एक मशहूर फैशन डिजाइनर, गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी और सेना में मेजर भी हैं?
राजकुमारी सिरिवन्नवरी शुक्रवार को जयपुर एयरपोर्ट से सीधे ऐतिहासिक रामबाग पैलेस पहुँचीं। उनकी यात्रा के दौरान सुरक्षा के इतने पुख्ता इंतजाम हैं कि एयरपोर्ट पर आम जनता के लिए फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जयपुर में शनिवार को वे आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस और त्रिपोलिया बाजार का भ्रमण करने निकलीं। यहाँ वे राजस्थान की हस्तशिल्प कला और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से देख रहीं हैं।
जयपुर के बाद राजकुमारी का अगला पड़ाव 'ब्लू सिटी' जोधपुर होगा। यहाँ वे मेहरानगढ़ किला, उम्मेद भवन पैलेस और जसवंत थड़ा जाएंगी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इस दौरे के लिए हाई-लेवल मीटिंग कर प्रोटोकॉल सुनिश्चित किया है। यह दौरा भारत और थाईलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला माना जा रहा है।
राजकुमारी का व्यक्तित्व जितना शाही है, उतना ही आधुनिक और प्रेरणादायक भी। आइए जानते हैं उनके जीवन के उन पहलुओं को जो उन्हें दुनिया की अन्य राजकुमारियों से अलग बनाते हैं:
सिरिवन्नवारी का नाम पेरिस फैशन वीक में बड़े सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने इटली और थाईलैंड से फैशन डिजाइनिंग की डिग्री ली है। उनका अपना लक्जरी ब्रांड 'Sirivannavari' है। वे केवल ब्रांड की मालकिन नहीं हैं, बल्कि खुद डिजाइनिंग की बारीकियां संभालती हैं।
वह केवल शाही महलों तक सीमित नहीं रहीं। 2005 के दक्षिण-पूर्वी एशियाई खेलों (SEA Games) में उन्होंने थाईलैंड की बैडमिंटन टीम का प्रतिनिधित्व किया और स्वर्ण पदक जीता। खेलों के प्रति उनका यह समर्पण आज भी जारी है।
बैडमिंटन के बाद उन्होंने घुड़सवारी की कठिन कला 'ड्रेसेज' (Dressage) में महारत हासिल की। वे कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में थाईलैंड के लिए पदक जीत चुकी हैं और अपने घोड़ों को खुद प्रशिक्षित करती हैं।
वर्ष 2008 में फोर्ब्स मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 20 सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली युवा रॉयल्स में शामिल किया था। उनका स्टाइल और करियर के प्रति विजन उन्हें वैश्विक आइकॉन बनाता है।
2007 में महान डिजाइनर पियरे बाल्मेन के निमंत्रण पर उन्होंने पेरिस में अपना कलेक्शन पेश किया था। उनके काम में थाई विरासत और मॉडर्न कट का बेजोड़ संगम दिखता है।
राजकुमारी का जीवन संघर्षों से भी भरा रहा। माता-पिता के तलाक के बाद उनकी मां उन्हें ब्रिटेन ले गई थीं। कई वर्षों तक वे अपने पिता (वर्तमान राजा) से दूर रहीं, बाद में उन्हें वापस थाईलैंड बुलाकर शाही दर्जा दिया गया।
सिरिवन्नवरी एक बेहतरीन कवयित्री भी हैं। वे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों को न केवल पसंद करती हैं, बल्कि उन्हें बड़े स्तर पर प्रायोजित भी करती हैं।
वे अपने डिजाइनों के जरिए थाईलैंड के पारंपरिक रेशम (Silk) को प्रमोट करती हैं। उनका मकसद स्थानीय बुनकरों की कला को पेरिस और न्यूयॉर्क जैसे बाजारों तक पहुँचाना है।
वे एक बड़ी डॉग लवर हैं। उनके पास कई पालतू कुत्ते हैं और वे पशु कल्याण से जुड़ी चैरिटी संस्थाओं के लिए भी काम करती हैं।
राजकुमारी सिर्फ कला और खेल में ही नहीं, बल्कि सैन्य अनुशासन में भी आगे हैं। वे थाई रॉयल आर्मी में 'मेजर' के पद पर तैनात हैं और उन्होंने कठोर सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
Updated on:
07 Feb 2026 07:31 pm
Published on:
07 Feb 2026 03:53 pm
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