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राजस्थान में सोलर ऊर्जा तेजी से बढ़ी, पवन ऊर्जा की रफ्तार धीमी, सरकार से मदद की मांग

राज्य में 35 गीगावॉट से ज्यादा सोलर प्रोजेक्ट्स लगा दिए, लेकिन पवन ऊर्जा सिर्फ 5.2 गीगावॉट ही है। डेवलपर्स ने पवन ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिए सरकार से मदद मांगी।

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जयपुर

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Ankit Sai

Jan 12, 2026

Wind Energy

पवन ऊर्जा फोटो-पत्रिका

जयपुर: राजस्थान में सोलर ऊर्जा तेजी से बढ़ी है, लेकिन पवन ऊर्जा पीछे है। राज्य ने 35 गीगावॉट से ज्यादा सोलर प्रोजेक्ट्स लगा दिए हैं। लेकिन कुल नवीकरणीय ऊर्जा में पवन ऊर्जा सिर्फ 5.2 गीगावॉट ही है। जबकि राज्य में पवन ऊर्जा की संभावना बहुत ज्यादा है। करीब 185 गीगावॉट, और इसका इस्तेमाल भी 40 से 55 प्रतिशत तक बेहतर रहता है।

100m ऊंचाई पर 284 GW की क्षमता

राजस्थान में 100 मीटर की ऊंचाई पर पवन ऊर्जा की क्षमता 284 गीगावॉट तक बताई जाती है। लेकिन अभी पवन ऊर्जा ज्यादातर इस्तेमाल नहीं हो रही है। समता पावर के डीडी अग्रवाल ने कहा, अगर पवन ऊर्जा ज्यादा बनेगी तो बिजली उत्पादन ज्यादा एकसमान रहेगा और पुराने पावर प्लांट्स पर कम दबाव पड़ेगा। उन्होंने IWPA की बात से सहमति जताते हुए कहा कि सरकार को सोलर पार्कों की तरह पवन ऊर्जा पार्क भी बनाने चाहिए।

पवन ऊर्जा की बैटरी स्टोरेज बढ़ाना जरूरी

देश भर के पवन ऊर्जा वाले कंपनियों के प्रतिनिधि हाल ही में राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन (RRECL) के बड़े अधिकारियों से मिले। उन्होंने कहा कि फतेहगढ़ और रामगढ़ जैसे इलाकों को खास तौर पर पवन ऊर्जा के लिए चिन्हित किया जाए। इन लोगों ने चेतावनी दी कि अगर सिर्फ सोलर ऊर्जा पर ही बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया तो बिजली ग्रिड की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। इसलिए पवन ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज को भी साथ में बढ़ाना बहुत जरूरी है।

पवन प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन की मांग

इंडियन विंड पावर एसोसिएशन (IWPA) और विंड टरबाइन बनाने वाली कंपनियों के संगठन ने सरकार से मांग की कि पवन प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन पहले से आरक्षित कर दी जाए। RRECL के चेयरमैन और MD रोहित गुप्ता ने कहा, जमीन आरक्षित करने का मामला बड़ा है। हम इसे अच्छे से जांचेंगे और फिर फैसला करेंगे।

पवन, सोलर ऊर्जा का एक साथ इस्तेमाल

IWPA राजस्थान के चेयरमैन राजेंद्र व्यास ने कहा कि राज्य को सिर्फ ज्यादा बिजली बनाने पर नहीं, बल्कि भरोसेमंद बिजली देने पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए पवन, सोलर और बैटरी स्टोरेज को मिलाकर प्लान करना होगा। उन्होंने बताया कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अध्ययन कहते हैं कि पवन और सोलर को साथ में इस्तेमाल करने से 24 घंटे सस्ती बिजली मिल सकती है। दो हिस्सा सोलर और एक हिस्सा पवन के साथ बैटरी लगाने से आज के सोलर ज्यादा वाले तरीके से बेहतर नतीजे मिलेंगे।


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