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बार-बार मोहलत… बिना जिग-जैग तकनीक के चल रहे ईंट भट्टे, कर रहे आबोहवा खराब

ईंट-भट्टों से निकलने वाला धुआं राजधानी के आस-पास के कस्बों और गांवों की आबोहवा खराब कर रहा है। वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद कई ईंट-भट्टों ने अब तक जिग-जैग तकनीक नहीं अपनाई है। अब जो ईंट-भट्टे बिना इस तकनीक के चलते मिलेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके […]

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जयपुर

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Amit Pareek

Feb 02, 2026

ईंट-भट्टों से निकलने वाला धुआं राजधानी के आस-पास के कस्बों और गांवों की आबोहवा खराब कर रहा है। वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद कई ईंट-भट्टों ने अब तक जिग-जैग तकनीक नहीं अपनाई है। अब जो ईंट-भट्टे बिना इस तकनीक के चलते मिलेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने तैयारी कर ली है। नगर निगम सीमा से बाहर 10 किलोमीटर के दायरे तक सभी ईंट-भट्टों को जून 2024 तक जिग-जैग तकनीक अपनानी थी। इस क्षेत्र में करीब 103 ईंट-भट्टे आते हैं, जिनमें से 73 ने तकनीक अपना ली है, जबकि 30 भट्टों ने अभी तक इसे लागू नहीं किया। अब इन भट्टों से ईंट तैयार करते मिले तो मंडल कार्रवाई करेगा। वहीं निगम सीमा से 10 किलोमीटर बाहर के क्षेत्रों के सभी ईंट-भट्टों को भी 30 जून तक यह तकनीक अपनानी होगी।

25 फीसदी भट्टों ने नहीं अपनाई तकनीक

जयपुर जिले में चल रहे ईंट-भट्टों में से 25 फीसदी ने भी जिग-जैग तकनीक नहीं अपनाई है। निगम सीमा से 10 किलोमीटर बाहर के करीब 264 ईंट-भट्टों में से केवल 8 ही नई तकनीक पर चल रहे हैं। शेष सभी को जून तक यह तकनीक अपनानी होगी। जयपुर और दौसा में कुल 367 ईंट-भट्टे चल रहे हैं, जिनमें से केवल 81 ने ही जिग-जैग तकनीक अपनाई है।

टाइमलाइन ऐसे बढ़ती गई

22 फरवरी 2022 : केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर एनकैप शहरों में निगम सीमा से 10 किलोमीटर तक के सभी ईंट-भट्टों को एक साल में जिग-जैग तकनीक अपनाने के निर्देश दिए।

15 दिसंबर 2023 : मंत्रालय ने दूसरा नोटिफिकेशन जारी कर निगम सीमा से 10 किलोमीटर तक के भट्टों को फरवरी 2024 तक और बाहर के भट्टों को फरवरी 2025 तक का समय दिया।

22 जनवरी 2025 : मंत्रालय ने तीसरा नोटिफिकेशन जारी कर निगम सीमा से 10 किलोमीटर बाहर के भट्टों को जून 2026 तक का समय दिया।

जिग-जैग तकनीक के फायदे

जिग-जैग तकनीक में ईंट-भट्टे की चिमनी की ऊंचाई 27 मीटर होती है। इससे ईंधन की खपत कम होती है और वायु प्रदूषण भी घटता है। साथ ही ईंटों की गुणवत्ता बेहतर होती है।

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जिन भट्टों को 2025 तक जिग-जैग तकनीक अपनानी थी, फरवरी से वे अगर चलते मिले तो कार्रवाई की जाएगी। वहीं बाहर के क्षेत्र के सभी भट्टों को भी 30 जून तक यह तकनीक अपनानी होगी।

- विवेक गोयल, क्षेत्रीय अधिकारी, जयपुर दक्षिण

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