जयपुर, Jun 02, 2026

CM Bhajan Lal Sharma - File PIC
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने अपराध नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को लेकर अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, राज्य सरकार के संज्ञान में आया है कि कई असामाजिक तत्व अपने वाहनों में अवैध रूप से बड़े बदलाव करवाकर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध परिवहन और अन्य गंभीर गैर कानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे अपराधियों और नियमों का मखौल उड़ाने वाले आम वाहन मालिकों पर नकेल कसने के लिए राजस्थान परिवहन विभाग अब पूरे प्रदेश में एक विशेष चेकिंग अभियान शुरू करने जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों के बाद परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने राजस्थान के सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (RTOs) और जिला परिवहन अधिकारियों (DTOs) को विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।
इस अभियान के तहत उन सभी वाहनों के खिलाफ चालान, जब्ती और अन्य कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो मोटरयान अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के प्रावधानों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे। सरकार ने इस कार्रवाई से पहले आम जनता को अपने वाहनों को सुधारने का एक आखिरी मौका भी दिया है।
परिवहन विभाग ने राजस्थान के सभी वाहन स्वामियों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। यदि किसी भी नागरिक की गाड़ी में नियमों के विपरीत कोई भी अवैध मॉडिफिकेशन हो रखा है, खिड़कियों पर काली फिल्म लगी है, या फिर नियम विरुद्ध नंबर प्लेट लगी है, तो वे इस आधिकारिक आदेश के जारी होने की तिथि से ठीक 3 दिन के भीतर उसे अपने स्तर पर हटवा लें या बिल्कुल ठीक करवा लें।
यह 3 दिन की मोहलत केवल इसलिए दी गई है ताकि आम जनता को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और लोग स्वेच्छा से नियमों का पालन सुनिश्चित कर सकें। लेकिन जैसे ही यह निर्धारित 3 दिन की समय सीमा समाप्त होगी, वैसे ही राजस्थान के सभी शहरों, कस्बों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की विशेष प्रवर्तन टीमें तैनात हो जाएंगी। इस अवधि के बाद पकड़े जाने पर किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी और सीधे वाहन को सीज करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
परिवहन विभाग द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों में यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी वाहन स्वामी अपनी कार, बाइक या किसी भी व्यावसायिक वाहन की मूल संरचना में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं करवा सकता, जिससे उस वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में दर्ज मूल विवरण प्रभावित होता हो।
वाहन का प्रकार, उसकी कुल सीटिंग क्षमता, गाड़ी का मूल रंग, उसका आयाम या निर्माता कंपनी द्वारा तय किए गए विनिर्देशों से छेड़छाड़ करना पूरी तरह से गैर कानूनी और अवैध माना जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि युवा अपनी गाड़ियों के टायर बहुत ज्यादा बाहर निकलवा लेते हैं, बॉडी को कटवाकर नया रूप दे देते हैं या फिर बुलेट जैसी बाइकों के साइलेंसर बदलकर तेज आवाज पैदा करते हैं।
इस प्रकार के सभी तकनीकी बदलाव अब सीधे तौर पर भारी जुर्माने और कानूनी शिकंजे के दायरे में आएंगे। इसके साथ ही, यदि किसी वाहन पर सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना लाल या नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट, बीकन लाइट या हूटर लगा हुआ पाया जाता है, तो उसे मौके पर ही उतारकर जब्त कर लिया जाएगा।
सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले और आम राहगीरों को डराने वाले प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न के खिलाफ इस अभियान में सबसे सख्त रुख अपनाया गया है। निर्धारित ध्वनि मानकों से अधिक आवाज करने वाले किसी भी उपकरण या साइलेंसर को गाड़ी में पाए जाने पर परिवहन विभाग के अधिकारी उसे ऑन द स्पॉट नष्ट या जब्त करने की कार्रवाई करेंगे।
ऐसे मामलों में केवल आर्थिक चालान ही नहीं काटा जाएगा, बल्कि नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को तुरंत प्रभाव से अयोग्य घोषित करने या हमेशा के लिए निरस्त करने की सिफारिश भी संबंधित अथॉरिटी को भेजी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस तरह के तेज हॉर्न न केवल बुजुर्गों और मरीजों के लिए जानलेवा साबित होते हैं, बल्कि इनके अचानक बजने से सड़कों पर कई भयानक सड़क हादसे भी होते हैं।
राजस्थान के विभिन्न शहरों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए वाहनों के शीशों पर निर्धारित मानकों से अधिक काली फिल्म या किसी भी अन्य प्रकार की अपारदर्शी सामग्री लगाने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी। कई बार अपराधी अपनी पहचान छुपाने और गाड़ियों के भीतर अवैध सामान ले जाने के लिए पूरी तरह से काले शीशों का उपयोग करते हैं, जिससे पुलिस के लिए उन्हें समय पर चिन्हित करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, वाहनों की बॉडी, विंडशील्ड या अन्य किसी भी हिस्से पर नियम विरुद्ध शब्द, जातिसूचक शब्द, डराने वाले चिन्ह, स्टिकर, राजनीतिक या अनाधिकृत मोनोग्राम और लेखन प्रदर्शित करने पर भी मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गाड़ियों पर इस प्रकार की नंबर प्लेटें या लेखन लगाने की पूरी तरह से मनाही होगी जो आम जनता में किसी भी प्रकार का अनावश्यक प्रभाव या भय पैदा करती हों।
इस पूरे अभियान का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वाहनों पर 'हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट' (HSRP) की जांच करना है। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि जिन वाहन स्वामियों ने अभी तक अपनी गाड़ियों पर यह अनिवार्य प्लेट नहीं लगवाई है, वे तुरंत इसके लिए आवेदन करें। फर्जी नंबर प्लेट लगाना, जानबूझकर नंबर प्लेट को अपठनीय बनाना (जिससे नंबर साफ न दिखे), नंबर प्लेट को किसी स्टिकर, मिट्टी या अन्य सामग्री से ढंकना एक बहुत ही गंभीर और संज्ञेय अपराध माना जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति अपनी नंबर प्लेट पर अंकों के अलावा कोई अनाधिकृत शब्द, पद या चिन्ह लिखवाता है, तो उसके वाहन को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा। गंभीर मामलों में, जहां नंबर प्लेट बदलकर अपराध करने की नीयत साफ दिखाई देगी, वहां गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा और आरोपी के खिलाफ पुलिस थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि वाहनों में इस प्रकार के अवैध मॉडिफिकेशन का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि अपराधी किसी वारदात को अंजाम देने के बाद बहुत आसानी से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो जाते हैं। गाड़ियों का रंग और हुलिया बदल जाने के कारण सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में भी उनकी सही पहचान नहीं हो पाती। राजस्थान के सीमावर्ती और आंतरिक जिलों में अफीम, डोडा-पोस्त और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए अक्सर ऐसे ही मॉडिफाइड वाहनों का सहारा लिया जाता है।
इन वाहनों के जरिए न केवल मादक पदार्थों का अवैध परिवहन होता है, बल्कि हथियारों की तस्करी और अन्य अवांछित गतिविधियों की संभावनाएं भी बनी रहती हैं। इस राज्यव्यापी अभियान के माध्यम से सरकार इन सभी आपराधिक कड़ियों को एक साथ तोड़ना चाहती है। जब सड़कों पर हर एक वाहन पूरी तरह से वैध और नियमों के अनुसार संचालित होगा, तो अपराधियों के हौसले अपने आप पस्त हो जाएंगे और पुलिस के लिए भी कानून व्यवस्था बनाए रखना बहुत आसान हो जाएगा।
Updated on: 02 Jun 2026 08:39 am

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