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जयपुर, May 28, 2026

Rajasthan: परिवहन विभाग के अफसरों को प्रमोशन की नहीं चाह, डीटीओ से ARTO बनने में खुद अटका रहे अपनी ही डीपीसी

Promotion Controversy: राजस्थान के परिवहन विभाग में डीटीओ पद पर कार्यरत अफसर पदोन्नति की चाह नहीं रखते। पदोन्नति बचने के लिए विभाग के ये अफसर डेफर खेल का सहारा ले रहे हैं। दरअसल, विभाग में डीटीओ से सहायक प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) पद पर पदोन्नति होती है।

Rajasthan Transport Department Promotion defer game

राजस्थान परिवहन विभाग में प्रमोशन में अफसरों का डेफर खेल,पत्रिका फोटो

Promotion Controversy: राजस्थान के परिवहन विभाग में डीटीओ पद पर कार्यरत अफसर पदोन्नति की चाह नहीं रखते। पदोन्नति बचने के लिए विभाग के ये अफसर डेफर खेल का सहारा ले रहे हैं। दरअसल, विभाग में डीटीओ से सहायक प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) पद पर पदोन्नति होती है। एआरटीओ का पद के काम के लिहाज से ठंडा और डमी पोस्ट माना जाता है।

दूसरी ओर, डीटीओ के पास वाहनों के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, टैक्स वसूली और प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) जैसे सीधे पब्लिक डीलिंग के काम होते हैं। इसी मलाईदार फील्ड पोस्टिंग के प्रशासनिक रसूख और वित्तीय नियंत्रण को न छोड़ने के चक्कर में अफसर जानबूझकर अपनी पदोन्नति रुकवा रहे हैं।

जानबूझकर डीपीसी प्रक्रिया पूरी नहीं करते अफसर

डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) से पहले अनिवार्य रूप से दिए जाने वाले संतान संबंधी घोषणा, अचल संपत्ति विवरण और वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) जैसे जरूरी दस्तावेज ये अफसर जानबूझकर समय पर जमा नहीं कराते। दस्तावेज नहीं मिलने का नतीजा यह होता है कि विभाग इन्हें 'डेफर' (स्थगित) श्रेणी में डाल देता है। इनकी पदोन्नति नहीं होती। ऐसे में पदोन्नति नहीं होने पर अफसर पूर्व के पद पर ही जमे रहते हैं।

डेफर श्रेणी की आड़ में सालों-साल डीटीओ सीट पर कब्जा

कुछ मामलों में राजस्थान परिवहन विभाग के अफसर अपने खिलाफ लंबित मामूली चार्जशीट या पेनल्टी के मामलों का निस्तारण भी जानबूझकर अटकाए रखते हैं, ताकि पदोन्नति टलती रहे। इसका फायदा यह होता है कि ये वर्षों तक डीटीओ की मलाईदार सीट पर जमे रहते हैं और बाद में सीधे आरटीओ (प्रादेशिक परिवहन अधिकारी) पद पर प्रमोट होने के इंतजार में रहते हैं।

ये अफसर बचे पदोन्नति से

विभागीय वरिष्ठता सूची के अनुसार, विनय बंसल, मक्खन लाल जांगिड़, दयाशंकर गुप्ता, समीर जैन और राधेश्याम शर्मा जैसे कम से कम पांच पात्र अफसर इस सूची में शामिल हैं, जो एआरटीओ बनने की बजाय डीटीओ की सीट पर जमे हैं।

परिवहन विभाग पर उठे बड़े सवाल

1-दस्तावेज नहीं देने वाले अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं

2-डेफर श्रेणी के अफसरों को डीटीओ पद पर क्यों बनाए रखा जाता है

3-क्या उच्च स्तर पर बैठे अधिकारियों की मिलीभगत से डेफर सिस्टम फल-फूल रहा

क्या बोले जिम्मेदार

--डीपीसी में अगर इस तरह की दिक्कतें हो रही हैं तो समाधान करवाया जाएगा। कौनसे डीटीओ को किस कारण से डेफर श्रेणी में हैं इसकी जांच करवाई जाएगी।

भवानी सिंह देथा, एसीएस परिवहन विभाग

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