16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan: फर्जी दस्तखत और डमी कैंडिडेट के दम पर लूटी सरकारी नौकरियां, सैकड़ों ‘फर्जी’ कार्मिक बर्खास्त

राजस्थान में सरकारी भर्ती फर्जीवाड़ा बड़े संगठित अपराध के रूप में उजागर हुआ है। अलवर की लिपिक भर्ती और जालोर की रीट शिक्षक भर्ती में फर्जी दस्तावेज, डमी अभ्यर्थी और फोटो बदलकर नौकरी पाने के मामले सामने आए। अब तक 123 कार्मिकों पर केस दर्ज, सैकड़ों की जांच जारी है।

4 min read
Google source verification

जयपुर

image

Arvind Rao

Feb 16, 2026

Rajasthan Recruitment Scam Fake Signatures Dummy Candidates Used to Grab Govt Jobs Hundreds Sacked

फर्जी दस्तखत और डमी कैंडिडेट के दम पर लूटी सरकारी नौकरियां (पत्रिका फाइल फोटो)

जयपुर: राजस्थान में सरकारी नियुक्तियों के पीछे चल रहा फर्जीवाड़े का खेल एक बड़े संगठित अपराध के रूप में सामने आया है। अलवर जिला परिषद की लिपिक भर्ती हो या जालोर में रीट के जरिए बने शिक्षक, जांच की आंच ने व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं।

कहीं फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे कुर्सियां हथियाई गईं, तो कहीं 'डमी अभ्यर्थियों' और फोटो बदलकर परीक्षा दिलाने वाले गिरोह ने सेंधमारी की। एसओजी की गहन पड़ताल और जिला कलेक्टरों की जांच रिपोर्ट के बाद अब तक सैकड़ों सरकारी कार्मिकों पर गाज गिरी है, जिससे यह साफ हो गया है कि प्रदेश में 'मेरिट' नहीं बल्कि 'जालसाजी' के दम पर सिस्टम में घुसपैठ की कोशिश की गई थी।

लिपिक भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर

जिला परिषद अलवर की साल 2022 की लिपिक भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में फर्जी दस्तावेजों, कूटरचित प्रमाणपत्रों तथा भर्ती शाखा के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के गंभीर मामले उजागर हुए हैं।

भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त लिपिक सीमा गुर्जर का अनुभव प्रमाण पत्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद अलवर के फर्जी हस्ताक्षरों से जारी किया गया था। यह प्रमाण पत्र जिला परिषद अलवर की भर्ती शाखा के डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज कर उसकी एक प्रति कार्यालय फाइल में भी संलग्न की गई। इस प्रकरण की जांच जिला कलेक्टर की ओर से वर्ष 2025 में की गई, जिसकी रिपोर्ट पंचायती राज विभाग को भेजी गई।

रिपोर्ट के आधार पर नवंबर 2025 में सीमा गुर्जर को सेवा से बर्खास्त करते हुए थाना अरावली विहार, अलवर में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसी भर्ती में नियुक्त लिपिक कृष्णा कुमारी शर्मा का कंप्यूटर प्रमाणपत्र भी फर्जी पाया गया। यह तथ्य भी जिला कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में प्रमाणित हुआ। नवंबर 2025 में उन्हें भी सेवा से बर्खास्त कर थाना अरावली विहार अलवर में मुकदमा दर्ज कराया गया।

इसके अतिरिक्त जिला परिषद अलवर के सीईओ के फर्जी हस्ताक्षरों से जारी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर नीलम शर्मा और जगदीश शर्मा ने जयपुर जिला परिषद में क्लर्क पद पर नौकरी प्राप्त की। इनके दस्तावेजों का फर्जी सत्यापन भी जिला परिषद अलवर से जारी किया गया। इस मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की ओर से बनीपार्क थाना, जयपुर में प्रकरण दर्ज कराया। दोनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

इसी भर्ती में आयु सीमा पार कर चुके रुक्मणी नंदन शर्मा को भी लिपिक पद पर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के पांच माह बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया तथा एसओजी ने अरावली विहार थाना, अलवर में मुकदमा दर्ज कराया है।

शिक्षक भर्ती में भी गड़बड़ियां

जिला परिषद अलवर की शिक्षक भर्ती में भी अनियमितताएं सामने आई हैं। शिक्षक कमल सिंह तथा खेल कोटे में फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्त शिक्षक मनोज कुमार को सेवा से बर्खास्त किया गया है और दोनों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। कमल सिंह वर्तमान में न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेश (स्टे) के आधार पर सेवा में कार्यरत हैं।

128 लिपिकों की जांच जारी

इन सभी मामलों में जिला परिषद अलवर की भर्ती शाखा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गंभीर भूमिका सामने आई है। प्रकरणों की जांच अब राज्य सरकार स्तर पर चल रही है। वर्तमान में 128 लिपिकों की जांच की जा रही है, जिनमें कई नियुक्तियों के फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है।

हाल ही में जिला परिषद अलवर ने तत्कालीन भर्ती शाखा के लिपिक राजेश यादव को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 (सीसीए) के तहत आरोप पत्र जारी किया है। इन मामलों को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एवं बानसूर विधायक देवी सिंह ने विधानसभा में प्रश्न उठाकर विस्तृत जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

123 सरकारी कार्मिकों के खिलाफ मामला दर्ज

जालोर जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बैठाने, फर्जी फोटो लगाने और अनुचित तरीकों से परीक्षा दिलवाकर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। वर्ष 2018 से 2022 के बीच हुई रीट भर्ती की जांच में यह गड़बड़ियां सामने आई हैं। इन मामलों की जांच एसओजी कर रही है।

फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 7 और 8 अगस्त 2025 को एसओजी ने 123 कार्मिकों (अधिकांश शिक्षक) के खिलाफ डमी अभ्यर्थी बैठाने, फर्जी फोटो लगाने और अनुचित तरीके से पेपर हल कराने के आरोपों में प्रकरण दर्ज किए हैं। इनमें से 115 शिक्षक जालोर जिले के हैं।

एसओजी जयपुर के पुलिस उप अधीक्षक कमल नारायण की और प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि अभ्यर्थियों की ओर गलत तरीकों से सरकारी नौकरियां प्राप्त करने के तथ्य राज्य सरकार के संज्ञान में आने के बाद प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक विभाग में पिछले पांच वर्षों में भर्ती किए गए कर्मचारियों की जांच के लिए आंतरिक समितियों का गठन किया गया।

जांच के दौरान परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी और वर्तमान में कार्यरत कार्मिकों के शैक्षणिक दस्तावेज, आवेदन पत्र, फोटो, हस्ताक्षर एवं प्रवेश पत्र आदि का गहन सत्यापन किया गया। जिन कर्मचारियों की भर्ती संदिग्ध पाई गई। इसके बाद सरकार की 6 जून 2024 को समस्त विभागों को ऐसे मामलों की जांच के आदेश दिए।

49 में से 41 आरोपी जालोर जिले के

7 अगस्त 2025 को दर्ज प्रकरण में 49 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जिनमें से 41 शिक्षक जालोर जिले के हैं। जांच में लगभग सभी के प्रवेश पत्र और अन्य दस्तावेजों में फोटो व हस्ताक्षर का मिलान नहीं पाया गया।

73 के खिलाफ मामला, 71 जालोर से

8 अगस्त 2025 को दर्ज दूसरे प्रकरण में 73 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इनमें से 71 शिक्षक जालोर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पदस्थापित मिले। इस प्रकरण में पाली जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय ढाल में कार्यरत शिक्षक भी आरोपी हैं।

एसओजी के अनुसार, दोनों दिनों में दर्ज मामलों में सामने आए तथ्य गंभीर हैं और यह संगठित तरीके से किए गए फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हैं। मामले की जांच जारी है और आगे और नाम सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया गया है।
जिन भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की ओर से फर्जी डिग्री लगाने की पुष्टि हो जाती है। उन अभ्यर्थियों को डिबार कर दिया जाता है। फिर वह अभ्यर्थी किसी भी भर्ती एजेंसी की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते। बोर्ड की कई भर्तियों में अभ्यर्थियों ने फर्जी डिग्री लगाई थी। उनकी डिग्री से संबंधित तो कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन जांच के पास दोषी पाए जाने पर अलग-अलग एजेंसियां अभ्यर्थियों पर कार्रवाई करती है।

-आलोक राज, अध्यक्ष राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड