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राजस्थान पुलिस की साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर सबसे बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, हैरान कर रहा ‘कंबोडिया कनेक्शन’!

पुलिस ने एक ऐसी बड़ी स्ट्राइक की है, जिसने सिम विक्रेताओं और साइबर ठगों के बीच के नापाक गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है।

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राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराध के एक ऐसे विशाल नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जिसके तार कंबोडिया जैसे देशों से जुड़े हुए हैं। यहाँ पुलिस ने एक ऐसी बड़ी स्ट्राइक की है, जिसने सिम विक्रेताओं और साइबर ठगों के बीच के नापाक गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है।

दरअसल, सीमावर्ती जिले अनूपगढ़ पुलिस ने शहर की 9 प्रमुख दुकानों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर करीब 957 संदिग्ध सिम कार्ड जारी किए। इन सिमों के जरिए पूरे भारत में 17 करोड़ 14 लाख 86 हजार 564 रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया गया।

'लालच' ने बनाया देशद्रोही!

अनूपगढ़ थानाधिकारी ईश्वर प्रसाद जांगिड के नेतृत्व में हुई इस जांच ने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने बताया कि इन 9 सिम विक्रेताओं ने चंद रुपयों के कमीशन के चक्कर में बिना किसी सत्यापन और पहचान के संदिग्ध लोगों को थोक में सिम कार्ड बेच दिए।

  • प्रमुख आरोपी दुकानें: लोकेश मोबाइल, नवदीप टेलीकॉम, कमल मोबाइल शॉप, मान टेलीकॉम, श्रीराम टेलीकॉम, श्री श्याम टेलीकॉम, बालाजी इलेक्ट्रॉनिक्स, मान किराना स्टोर और परिहार टेलीकॉम।
  • धाराएं: इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और आईटी एक्ट की धारा 66 सी व 66 डी के तहत संगीन मामले दर्ज किए गए हैं।

सात समंदर पार से ठगी का जाल

पुलिस की प्राथमिक जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह है इन सिमों का कंबोडिया कनेक्शन। अनूपगढ़ से जारी ये सिम कार्ड कभी स्थानीय नेटवर्क पर सक्रिय ही नहीं हुए। एक्टिवेशन के तुरंत बाद इन्हें कंबोडिया भेज दिया गया।

वहां बैठे साइबर अपराधी इन भारतीय नंबरों का इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देने, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और निवेश के नाम पर लोगों को ठगने के लिए कर रहे थे। चूंकि नंबर भारतीय होते थे, इसलिए शिकार होने वाले लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।

आंकड़ों का मायाजाल: किस दुकान ने कितनी 'आग' लगाई?

जांच में सामने आया कि कुछ दुकानों ने ठगी के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए।

  • लोकेश मोबाइल: सर्वाधिक 331 सिम जारी कीं।
  • कमल मोबाइल शॉप: केवल 2 सिम बेचीं, लेकिन उन दो नंबरों से रिकॉर्ड 8.18 करोड़ रुपये की ठगी हुई।
  • नवदीप टेलीकॉम: 140 सिम के जरिए 35 लाख का फ्रॉड और 15 साइबर शिकायतें मिलीं।
  • श्री श्याम टेलीकॉम: इनकी सिमों से 3.14 करोड़ का फ्रॉड हुआ।

नियमों की धज्जियां: 3 दिन में 2 और 7 दिन में 3 सिम

उप निरीक्षक गोविंद सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, इन विक्रेताओं ने दूरसंचार विभाग (DoT) के नियमों को पैरों तले रौंद दिया।

  • फर्जी एक्टिवेशन: कई मामलों में एक ही आईडी पर मात्र 3 दिन के भीतर 2 सिम और 7 दिन में 3 से ज्यादा सिम जारी की गईं।
  • सत्यापन का अभाव: ग्राहकों के अंगूठे के निशान और फोटो का दुरुपयोग कर एक्स्ट्रा सिम एक्टिवेट की गई और उन्हें साइबर गैंग्स को सप्लाई किया गया।

ऐसे खुला राज

गृह मंत्रालय के I4C (इंडियन साइबर अपराध समन्वय केंद्र) और नेशनल साइबर पुलिस पोर्टल (1930) के समन्वय से जब इन नंबरों का 'ट्रैक रिकॉर्ड' निकाला गया, तब जाकर ठगी के इस भयावह आंकड़े का पता चला।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन स्थानीय दुकानदारों को सिम सप्लाई करने वाले मास्टरमाइंड कौन हैं और वे किन अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के संपर्क में थे?

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