जयपुर, Jun 06, 2026

Rajasthan Cheap Electricity : फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan Cheap Electricity : उद्योगों को अपेक्षाकृत सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए नई टैरिफ व्यवस्था लाने पर मंथन किया जा रहा है। प्रस्तावित मॉडल के तहत दिन के समय, जब सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन अधिक रहता है और बिजली की उपलब्धता पर्याप्त होती है, तब उद्योगों को कम दर पर बिजली दी जा सकती है। मकसद है कि अक्षय ऊर्जा के बेहतर उपयोग के साथ उद्योगों की उत्पादन लागत कम करना है। इससे दिन में उपलब्ध अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर उद्योग अपनी गतिविधियों को कम दर वाले समय में संचालित कर बिजली खर्च घटा सकेंगे।
1- 6 से 7.50 रुपए यूनिट दर है इंडस्ट्री की बिजली दर।
2- 9367 करोड़ रुपए की बिजली खपत अनुमानित होगी इस वित्तीय वर्ष में।
प्रस्तावित मॉडल में बिजली की दरें समय के अनुसार तय की जा सकती हैं। दिन में जब सौर ऊर्जा उत्पादन ज्यादा होता है और बिजली की उपलब्धता अधिक रहती है, तब टैरिफ कम रखा जा सकता है। इससे उद्योग अपनी बिजली खपत को कम टैरिफ वाले समय में शिफ्ट कर सकेंगे।
राजस्थान राज्य विद्युत विनियामक आयोग कुछ समय पहले टाइम ऑफ यूज (टीओयू) टैरिफ कंसेप्ट लाया है, जिसके तहत दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से बिजली की दरें तय की जानी है। इस मॉडल से लोग अपने रोजमर्रा के काम ऐसे समय में करेंगे जब बिजली सस्ती होगी। इससे न केवल बिल कम होगा, बल्कि पीक समय में बिजली व्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा। हालांकि, यह कंसेप्ट सभी के लिए है।
राजस्थान सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का अग्रणी राज्य है। विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र के साथ यहां सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। दिसंबर 2025 तक राज्य की सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता 35,000 मेगावाट (35 गीगावाट) को पार कर चुकी है, जो देश की कुल सौर क्षमता का लगभग 27 फीसद है। यह क्षमता राज्य की कुल बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। भदला सोलर पार्क जैसी विश्व स्तरीय परियोजनाएं यहां स्थापित हैं।
सौर ऊर्जा से लाखों घरों को स्वच्छ बिजली मिल रही है, कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है तथा किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। केंद्रीय और राज्य सरकार की नीतियों, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर तथा पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं ने इस सफलता को गति दी है। राजस्थान अब भारत का ग्रीन एनर्जी हब बनने की ओर अग्रसर है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार कर रहा है।
राजस्थान पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के प्रमुख राज्यों में शामिल है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे क्षेत्रों में निरंतर तेज हवाएं राज्य को पवन ऊर्जा की प्रचुर संभावनाएं प्रदान करती हैं। दिसंबर 2025 तक राज्य की पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता 5,195.82 मेगावाट (लगभग 5.2 गीगावाट) पहुंच चुकी है, जिससे राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। यह क्षमता राज्य की कुल बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जैसलमेर पवन ऊर्जा क्लस्टर जैसी बड़ी परियोजनाएं यहां संचालित हैं। पवन ऊर्जा से लाखों घरों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध हो रही है।
Published on: 06 Jun 2026 07:15 am

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