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सविता व्यास
Post-Marital Romance Trend:जयपुर। जिस मां को बच्चों से बिछोह एक पल भी गंवारा नहीं होता, वही अब प्यार के जुनून में इस कदर डूब गई है कि अपने कलेजे के टुकड़ों को छोडक़र प्रेमी के साथ नया घर बसाने निकल पड़ी हैं। मां के आंचल से महरूम मासूम आज उसके चेहरे की बस एक झलक के लिए तरस रहे हैं। उसी चेहरे की, जिसके पीछे कभी वे नन्हे कदमों से दौड़ा करते थे। रात की खामोशी में अब लोरियों की जगह झूठे दिलासे गूंजते हैं- 'मम्मी जल्दी आ जाएंगी' लेकिन मां की गोद को तरसती सिसकियां अंधेरे को चीर रही हैं।
एक पिता ने हालात से समझौता करते हुए प्रेमियों को मिलाने का फैसला तो कर लिया, मगर बच्चों की रोज की तड़प हर दिन उनको परेशान करती है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मां के प्यार से वंचित ये बच्चे शायद ही मां को भगवान का दर्जा दे पाएं!
सबसे ज्यादा मामले किन राज्यों में?
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और विभिन्न सर्वे के मुताबिक, सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल हैं। यहां महिलाएं पति की कमाई पर ऐश कर, प्रेमी संग फुर्र हो रही हैं। उत्तर प्रदेश में 15,000, मध्य प्रदेश (8,000), बिहार (7,000), पश्चिम बंगाल (6,500) और राजस्थान में (5,500) मामले दर्ज हुए हैं। हैरत की बात यह है कि 2025 में ये ट्रेंड 15% बढ़ा है।
शादीशुदा जिदंगी से नाखुश थी महिला
केस 1 : सिरोही की कल्पना (बदला हुआ नाम) ने पति और बच्चों को छोड़ दिया, क्योंकि वह शादीशुदा जिंदगी से खुश नहीं थी। गैर मर्द से प्यार के जुनून में कल्पना बच्चों को छोडक़र चली गई। बच्चे आज भी तिल-तिल कर टूट रहे हैं। मां की जिम्मेदारी बहन निभा रही है। बच्चों को 'मां' शब्द को नफरत हो गई है।
प्रेमी संग रहने की जताई इच्छा
केस 2 : सीकर की ललिता (बदला हुआ नाम) सोशल मीडिया पर किसी और को दिल दे बैठी और 15 साल के वैवाहिक रिश्ते, 10 साल के बेटे और तीन साल की बेटी को पीहर में छोडक़र प्रेमी के साथ फरार हो गई। पुलिस ने ललिता को प्रेमी के साथ रंगे हाथों पकड़ा तो उसने पति के पास लौटने से इनकार कर दिया।
आधुनिक समाज में रिश्तों की परिभाषा बदली
समाजशास्त्री रश्मि ओझा का कहना है,'व्यक्तिगत स्वतंत्रता हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन जब माता-पिता होते हैं, तो फैसलों का असर सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर भी पड़ता है। मां से बिछोह बच्चों में असुरक्षा, गुस्सा और रिश्तों को लेकर अविश्वास पैदा कर सकता है, जिसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ता है। दुनिया कितनी भी बदल जाए लेकिन बच्चों की भावनात्मक जरूरतें आज भी वही हैं।
ये कारण आए सामने
2025 में 70 फीसदी मामलों में सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारण सामने आए हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं, महंगाई, तनाव और 'प्यार' का नशा घर जला देता है। ऐसे में महिलाओं को पति और बच्चे नहीं सिर्फ प्रेमी और शारीरिक जरूरत नजर आती है।
सामाजिक दबाव : पति से झगड़े और ताने महिलाओं को प्रेमी की आकर्षित करते हैं।
आर्थिक : काम की आजादी, नौकरी और पैसे की चाह महिलाओं को विद्रोही बना रही है।
मनोवैज्ञानिक : रोमांच की तलब, पुराने रिश्तों से ऊब, प्रेमी में सब कुछ नया और अलग दिखना।
वर्ष कुल मामले (देश) शहरी (%) ग्रामीण (%) राजस्थान में मामले
2021 -7 4,800 7 28 7 72 7420
2022 -7 5,100 7 29 7 71 7450
2023- 7 5,400 7 30 7 70 7480
2024 -7 5,700 7 31 7 69 7510
2025- 7 6,000 7 32 7 68 7540
समाधान की दिशा में पहल जरूर करें
पति-पत्नी के बीच नियमित, ईमानदार और बिना आरोप-प्रत्यारोप के बातचीत आवश्यक है। भावनात्मक जरूरतों को समय रहते समझना और स्वीकार करना चाहिए। यदि संबंधों में तनाव बढ़ रहा हो तो विवाह परामर्श या मनोचिकित्सकीय सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को उतना ही महत्व देना होगा जितना शारीरिक स्वास्थ्य को दिया जाता है।
एक-दूसरे को सुनना, समझना जरूरी
जब व्यक्ति को घर में मान्यता, स्नेह और संवाद नहीं मिलता, तो वह बाहर उस भावनात्मक पूर्ति की तलाश करता है। यह केवल महिलाओं तक सीमित नहीं, पुरुषों में भी समान रूप से देखा जाता है। ऐसी घटनाओं का सबसे गहरा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। विवाह कोई पूर्ण संस्था नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास से चलने वाला संबंध है। यदि हम एक-दूसरे को सुनना, समझना और समय देना सीख लें, तो कई टूटते रिश्तों को बचाया जा सकता है।
Updated on:
17 Feb 2026 03:40 pm
Published on:
17 Feb 2026 03:03 pm
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