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जयपुर के चारों ओर लैंड पूलिंग योजनाएं: सुनियोजित विकास की दिशा में जेडीए की बड़ी तैयारी

राजधानी के सुनियोजित और संतुलित नगरीय विकास की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। शहर के चारों ओर विभिन्न क्षेत्रों में लैंड पूलिंग योजनाएं विकसित की जाएंगी, जिससे अनियोजित बसावट पर रोक लगेगी और आधुनिक नगर नियोजन को बढ़ावा मिलेगा।

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जयपुर

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Ashwani Kumar

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Ashwani Bhadauria

Feb 09, 2026

जयपुर। राजधानी के सुनियोजित और संतुलित नगरीय विकास की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। शहर के चारों ओर विभिन्न क्षेत्रों में लैंड पूलिंग योजनाएं विकसित की जाएंगी, जिससे अनियोजित बसावट पर रोक लगेगी और आधुनिक नगर नियोजन को बढ़ावा मिलेगा।

जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में सोमवार को चिंतन सभागार में लैंड पूलिंग योजनाओं की प्रगति और क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित हुई।

जेडीसी ने बताया कि जयपुर के आसपास कई क्षेत्रों में जेडीए की भूमि के साथ-साथ खातेदारों और काश्तकारों की निजी भूमि उपलब्ध है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में कृषि और अन्य गतिविधियां हो रही हैं, लेकिन भविष्य में यहां अव्यवस्थित कॉलोनियों के बसने की आशंका है। इसे देखते हुए जेडीए इन क्षेत्रों में नियोजित तरीके से लैंड पूलिंग योजनाएं लागू करने की संभावनाएं तलाश रहा है।

इन योजनाओं के लागू होने से सुव्यवस्थित सड़क नेटवर्क, पार्क, हरित क्षेत्र और आमजन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा सकेगा। इससे जयपुर का विस्तार योजनाबद्ध तरीके से होगा और नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं मिलेंगी।

बैठक में जोन 08, 10, 11, 12 और 14 के साथ महल रोड, अजमेर रोड, सीकर रोड और आगरा-दिल्ली रोड से सटे क्षेत्रों में लैंड पूलिंग योजनाएं लागू करने पर विशेष चर्चा हुई। जेडीसी ने संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित योजनाओं के प्रस्ताव तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत करें।

राजस्थान लैंड पूलिंग योजना अधिनियम–2016 के तहत टोंक रोड स्थित शिवदासपुरा, बरखेड़ा और चंदलाई गांवों की करीब 163 हेक्टेयर भूमि पर यह योजना पहले से लागू की जा रही है। इस योजना के तहत भूमि अधिग्रहण के बदले खातेदारों को उनकी कुल भूमि का 45 प्रतिशत हिस्सा विकसित भूमि के रूप में लौटाया जाएगा, जिससे किसानों और भूमि स्वामियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।