
Dr Kirodi Lal Meena - File PIC
राजस्थान के कृषि विभाग और बीज व्यापार से जुड़ी जांचों को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद अब सीधे राज्य सरकार के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में तब्दील हो चुका है। दरअसल, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान राज्य बीज निगम के मौजूदा डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई और उनके एक रिश्तेदार स्वतंत्र ज्याणी को 2.43 करोड़ रुपए की रिश्वत राशि के साथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह राशि प्रदेश के इतिहास में किसी एकल ट्रैप के दौरान पकड़ी गई सबसे बड़ी रिश्वत राशियों में से एक मानी जा रही है।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद राजस्थान कांग्रेस पूरी तरह से भजनलाल सरकार और विशेष रूप से कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस कार्रवाई को सरकार के संरक्षण में चलने वाली खुली डकैती करार दिया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि कृषि विभाग द्वारा पिछले दिनों की गई तमाम छापेमारी का मुख्य मकसद नियमों का पालन करवाना नहीं, बल्कि व्यापारियों में डर पैदा करके करोड़ों रुपए की अवैध वसूली (उगाही) को अंजाम देना था।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के मुख्यालय से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई और उनके रिश्तेदार स्वतंत्र ज्याणी के खिलाफ एक प्रतिष्ठित बीज उत्पादक कंपनी और स्थानीय खाद-बीज व्यापारियों के संघ द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कृषि विभाग की टीम द्वारा पिछले दिनों बीकानेर, सीकर और अन्य जिलों में जो छापेमारी की कार्रवाई की गई थी, उसमें भारी अनियमितताओं का डर दिखाकर और कानूनी कार्रवाई को रफा-दफा करने के एवज में करोड़ों रुपए की रिश्वत की मांग की जा रही थी।
एसीबी की टीम ने शिकायत का पूरी तरह से गोपनीय तकनीकी वेरिफिकेशन करवाया, जिसमें घूस मांगे जाने की बात पूरी तरह सच पाई गई। इसके बाद शनिवार को एसीबी की विशेष टीम ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को 2.43 करोड़ रुपए की नकद और डिजिटल ट्रांजैक्शन की सौदेबाजी के दौरान धर दबोचा। पुलिस टीम ने आरोपियों के ठिकानों और कार्यालयों की तलाशी शुरू कर दी है, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक खातों की कड़ियां और अन्य संपत्तियों के विवरण हाथ लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस पूरी कार्रवाई के तुरंत बाद सोशल मीडिया और मीडिया के सामने आकर भजनलाल सरकार पर तीखे तीरों की बौछार कर दी। डोटासरा ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग में छापेमारी की आड़ में लंबे समय से केवल और केवल कमीशनखोरी और अवैध उगाही का एक बड़ा खेल खेला जा रहा था, जिसका आज एसीबी ने प्रामाणिक रूप से भंडाफोड़ कर दिया है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कई गंभीर सवाल उठाते हुए कहा-
मंत्री के साथ घूमते थे आरोपी: यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि पकड़े गए ये दोनों रिश्वतखोर बीकानेर और सीकर के अलावा जोधपुर, भीलवाड़ा और श्रीगंगानगर में भी हुई छापेमारी के दौरान खुद कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के साथ उनके मुख्य चेहरे के रूप में मौजूद थे।
500 करोड़ रुपए की उगाही का आरोप: डोटासरा ने दावा किया कि जोधपुर और सुजानगढ़ में भी इसी तरह कार्रवाई का डर दिखाकर व्यापारियों से करोड़ों रुपए ऐंठे गए हैं। पूरे राजस्थान में कार्रवाई और धमकी के नाम पर इस छापेमारी सिंडिकेट द्वारा करीब 500 करोड़ रुपए की उगाही किए जाने के गंभीर आरोप हैं।
डोर ऊपर तक जुड़े होने की आशंका: डोटासरा ने सीधे मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब कृषि मंत्री के ठीक बगल में बैठने वाले अधिकारी करोड़ों रुपये की रिश्वत लेने का साहस कर रहे थे, तो यह पैसा आखिर कहां तक पहुंच रहा था? क्या इसकी डोर ऊपर तक जुड़ी हुई है या फिर मंत्री जी इस भारी भ्रष्टाचार से पूरी तरह बेखबर थे? उन्होंने कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्नदाता के विश्वास के साथ किया गया बहुत बड़ा विश्वासघात है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मामले को लेकर सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर जमकर तंज कसा है। जूली ने कहा कि भाजपा राज में असल में भ्रष्टाचार रोकने का एक नया मॉडल तैयार किया गया है, जिसके तहत पहले बड़ी बीज कंपनियों और स्थानीय छोटे व्यापारियों पर विभाग के जरिए बड़े-बड़े छापे मरवाए जाते हैं, और फिर पीछे से अपने खास लोगों को भेजकर उनसे करोड़ों रुपए की एकमुश्त वसूली कर ली जाती है।
टीकाराम जूली ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि एसीबी द्वारा राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई और उनके रिश्तेदार की 2.43 करोड़ की रिश्वत लेते हुए हुई यह गिरफ्तारी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि सरकार का पूरा प्रशासनिक अमला किस कदर भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से इस पूरे रैकेट की किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने और इसकी पूरी डोर कहाँ तक जुड़ी है, उसका जनता के सामने खुलासा करने की मांग की है।
इस पूरी कार्रवाई के बाद सबसे ज्यादा राजनीतिक संकट कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के सामने खड़ा हो गया है। दरअसल, अभी पिछले ही दिनों जब सीकर में कृषि विभाग के कर्मचारियों पर स्थानीय व्यापारियों ने 20 लाख रुपए की घूस मांगने के आरोप लगाए थे और दुकानें बंद कर हड़ताल की थी, तब मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी विभागीय टीम का खुलकर बचाव किया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेहद आक्रामक होकर एक पोस्ट लिखी थी।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने उस आधिकारिक बयान में साफ शब्दों में लिखा था, "नकली बीज माफियाओं के खिलाफ हमारी टीम ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्रवाई की। झूठे आरोप लगाकर किसानों की लड़ाई को कमजोर नहीं किया जा सकता। यदि भ्रष्टाचार का एक भी आरोप सिद्ध हो जाए तो पद छोड़ दूँगा। लेकिन किसानों के हितों से समझौता कभी नहीं होगा।"
अब जबकि बीज निगम के खुद के डायरेक्टर ही 2.43 करोड़ रुपए की भारी घूस लेते हुए एसीबी के हत्थे चढ़ गए हैं, तो कांग्रेस ने किरोड़ी लाल मीणा के इसी पुराने ट्वीट और वादे को री-ट्वीट करते हुए उनसे तुरंत नैतिकता के आधार पर अपने मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग शुरू कर दी है।
Published on:
08 Jun 2026 09:50 am
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