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डॉक्टरों ने स्टाफ मांगा, सीए ने टैक्स राहत, वकीलों ने उठाई सुरक्षा की मांग

आगामी केंद्रीय बजट को लेकर प्रोफेशनल वर्ग को काफी उम्मीदें हैं

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जयपुर. आगामी केंद्रीय बजट को लेकर प्रोफेशनल वर्ग को काफी उम्मीदें हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील और डॉक्टरों ने शनिवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में आयोजित टॉक-शो में टैक्स, हेल्थ सेक्टर, मेडिकल इंफ्रा, आइटीआर, ऑडिट और कंप्लायंस जैसे मुद्दे उठाए। इस वर्ग का कहना है कि बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग, युवा प्रोफेशनल और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा होना चाहिए।

पीएचसी पर न्यूनतम दो डॉक्टरों होने चाहिए। रिक्त पद तुरंत भरे जाएं। अभी एक ही पद होने से अवकाश के दिन डॉक्टर नहीं मिलते।
- डॉ. भरत कुमार पारीक, अध्यक्ष, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट

अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने की जरूरत है। केन्द्र के मानकों के मुताबिक प्रदेश में डॉक्टरों की नियुक्ति और वेतन दिए जाने चाहिए।
- डॉ. राजपाल सिंह मीणा, अध्यक्ष, जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (जार्ड)

पुरानी व नई आयकर प्रक्रिया में कर मुक्त मूल आय की सीमा बढ़ाई जाए। मध्यम वर्ग को वास्तविक कर राहत के लिए पुरानी प्रक्रिया में 2.5 से 3 लाख और नई प्रक्रिया में 4 से 5 लाख किया जाए।
- मोहित अग्रवाल, सीए

युवा वकील आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहे हैं। इनके लिए पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और आर्थिक सहायता योजना बजट में शामिल होनी चाहिए। लॉ कॉलेजों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का बजट बढ़ाना चाहिए।
- पंकज पचलंगिया, एडवोकेट

वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली-मेडिएशन, आर्बिट्रेशन को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड का प्रावधान हो। इससे अदालतों पर बढ़ता बोझ कम होगा।
- नीरज शर्मा, एडवोकेट

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रावधान बढ़ाए जाने की घोषणाएं जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच पातीं। एक्सरे व पैथोलॉजी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
- विमल बज, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल भारतीय समानता मंच

ग्राम पंचायत और राष्ट्रीय स्तर के होम्योपैथिक संस्थान खुलने चाहिए। आयुष चिकित्सकों का सेवाकाल 62 वर्ष का होना चाहिए।
-डॉ. राजेश मीना, प्रदेश संयोजक, होम्योपैथी चिकित्सा संघर्ष समिति

आइटी और एआइ सेक्टर को प्रोत्साहन देने के लिए जीएसटी 18 से घटाकर 5 किया जाना चाहिए।
- शुजाअत राजा, सचिव, कौंसिल ऑफ टैक्स प्रोफेशनल

सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए 30 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की है, लेकिन कोर्ट परिसरों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है। कोर्ट में कई महिलाएं आती हैंं, लेकिन उनके लिए सुविधाएं नहीं हैं।
- भावना सैनी, एडवोकेट

मकान खरीदने पर होम लोन ब्याज की कटौती सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख की जाए, जिससे घर खरीदने वालों को वास्तविक राहत मिल सके।
- कनिका गुप्ता, सीए

ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए विशेष प्रावधान करने चाहिए। गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने चाहिए, जिससे लोगों का शहरों की ओर पलायन रुक सके।
- अफसाना बानो, एडवोकेट

बढ़ती स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क आम आदमी के लिए बोझ बनते जा रहे हैं। बजट में इन पर युक्तिसंगत कटौती हो, ताकि संपत्ति विवाद कम हों और रियल एस्टेट सेक्टर को भी गति मिले।
- पंकज शर्मा, एडवोकेट

जिला स्तर पर ट्रोमा सेंटर की जरूरत है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही चिकित्सा सुविधाएं मुहैया हों।
- डॉ. लोकेन्द्र शर्मा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज टोंक

विदेशों में 24 घंटों में जीएसटी और कंपनी रजिस्ट्रेशन समेत तमाम तरह के रजिस्ट्रेशन हो जाते हैं। जबकि अपने देश में इस प्रक्रिया में ही 10 से 15 दिन बीत जाते हैं। इसमें सुधार किए जाएं।
- सज्जाद अजीज, एडवोकेट, टैक्स कंसल्टेंट

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