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राजस्थान में डोडा पोस्त बैन के बाद मेडिकेटेड नशा बढ़ा, कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में पुनर्विचार की उठाई मांग

पीलीबंगा विधायक विनोद कुमार ने बताया कि वर्ष 2005 से 2025 के बीच डोडा पोस्त के सेवन से मौत के मात्र दो मामले सामने आए हैं, जबकि मेडिकेटेड नशे से मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Feb 05, 2026

Doda

खेत में लगा अफीम का पौधा (फाइल फोटो)

जयपुर। विधानसभा में बुधवार को पीलीबंगा से कांग्रेस विधायक विनोद कुमार ने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर सरकार की नीतियों पर तीखा सवाल खड़ा करते हुए डोडा पोस्त पर लगे प्रतिबंध की पुनर्समीक्षा की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नशे पर अंकुश लगाने के नाम पर अपनाई गई नीति विफल साबित हुई है और इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में मेडिकेटेड नशा बेलगाम हो गया।

उन्होंने पर्ची के माध्यम से कहा कि श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित पूरे प्रदेश में नशा एक गंभीर सामाजिक संकट बन चुका है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 16 मार्च 2016 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोडा पोस्त के ठेकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़े हैं।

मेडिकेटेड नशे से मौत का आंकड़ा बढ़ा

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से 2025 के बीच डोडा पोस्त के सेवन से मौत के मात्र दो मामले सामने आए हैं, जबकि मेडिकेटेड नशे से मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। 31 दिसंबर 2023 से जनवरी 2025 के बीच ही मेडिकेटेड नशे से 65 युवाओं की मृत्यु सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, जबकि पिछले 15 वर्षों में यह संख्या कहीं अधिक होने की आशंका है।

प्राकृतिक नशा अपराध घोषित

विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार प्राकृतिक नशे को अपराध घोषित कर चुकी है, लेकिन दवाओं और केमिकल आधारित नशे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रही है।

क्यों नहीं लग रही रोक?

विनोद कुमार ने कहा कि नियंत्रित डोडा पोस्त खेती से न केवल राज्य को राजस्व मिलता था, बल्कि किसानों और श्रमिकों को रोजगार भी मिलता था। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब प्राकृतिक डोडापोस्त अपेक्षाकृत कम घातक साबित हुआ है, तो फिर घातक मेडिकेटेड नशे पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है।

उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर विधानसभा में व्यापक चर्चा कर वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार नीति पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि प्रदेश का युवा नशे की भेंट चढ़ने से बच सके।

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