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आयुष्मान भारत मिशन २५० करोड़ रुपए गायब

छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत मिशन के अंतर्गत वर्ष २०१८- १९ में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से रेलीगेयर हेल्थ इंश्योरेंस कपनी को २५० करोड़ रुपए से अधिक का फायदा पहुंचाया गया है।

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 हेल्थ इंश्योरेंस कपनी को २५० करोड़ रुपए से अधिक का फायदा पहुंचाया

हेल्थ इंश्योरेंस कपनी को २५० करोड़ रुपए से अधिक का फायदा पहुंचाया

अजय श्रीवास्तव। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत मिशन के अंतर्गत वर्ष २०१८- १९ में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से रेलीगेयर हेल्थ इंश्योरेंस कपनी को २५० करोड़ रुपए से अधिक का फायदा पहुंचाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित माडल टेंडर व मार्गदर्शिका के क्लाज - ६ में कहा गया था कि अदा किए गए प्रीमियम की तुलना में क्लेम रेशियो प्राप्त करने में विफल रहने की स्थिति में बीमा कंपनी को क्लेम रेशियो के प्रतिशत के आधार पर बचत राशि वापस किया जाने का प्रावधान था। प्रशासनिक लागत 10, 12 या 15 प्रतिशत की राशि को काटकर शेष जमा राशि को वापस किया जाना था। यानि ढाई सौ करोड़ बाकी बचने पर करीब १० प्रतिशत की प्रशासनिक लागत काट कर बकाया लौटा देना था। ऐसा नहीं हुआ।

राज्य ने प्रावधान को ही हटा दिया : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वेबसाइट में जारी किए गए निविदा दस्तावेज में इस प्रीमियम वापसी के प्रावधान (क्लॉज ६ को) को ही हटा दिया गया है। प्रीमियम के रुप में बीमा कंपनी को लगभग 550 करोड़ रुपए ( रुपए 11 सौ प्रति परिवार प्रीमियम की दर से 50 लाख परिवार के लिए ) का भुगतान किया जाना था। जबकि योजना पर बीमा एजेंसी के द्वारा पूरे साल में दो सौ से ढाई सौ करोड़ रुपए का ही भुगतान किए जाने का अनुमान है। जिससे साल भर का क्लैम रेशियो का पचास प्रतिशत से भी कम किया गया था। एक अनुमान के मुताबिक 550 करोड़ रुपए के प्रीमियम पर इस कपंनी ने 45 प्रतिशत ही खर्च किया गया था, कुछ डाक्यूमेंटेशन चार्ज काटकर शासन को शेष ढाई से तीन सौ करोड़ रुपए बीमा कंपनी को लौटाने थे। शासन व प्रशासन के नुमाइंदों ने माडल टेंडर डाक्यूमेंट्स में इस वापसी वाली कंडिका को ही हटा दिया। इस वजह से इंश्योरेंस कंपनी ने शासन को लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए वापस नहीं लौटाया है।

अधिक राशि के इलाज में अपनाया गलत तरीका: संशोधन से पहले के प्रावधान में पचास हजार रुपए से अधिक अतिरिक्त इलाज की जरुरत होने पर क्लैम का भुगतान बीमा कंपनी को किया जाना था। जिसकी प्रतिपूर्ति राज्य नोडल एजेंसी के द्वारा बीमा कंपनी को की जानी थी। जबकि संशोधन के अनुसार पचास हजार रुपए से ज्यादा के इलाज की जरुरत होने पर क्लैम का प्रोसेस बीमा कंपनी के द्वारा किया जाने का था। इसके लिए संबंधित अस्पताल को भुगतान करने के लिए इसे राज्य नोडल एजेंसी के सामने प्रस्तुत करने की बात कही गई थी। पचास हजार रुपए से अधिक के इलाज के मामलों में इलाज की संपूर्ण राशि का भुगतान राज्य नोडल एजेंसी के द्वारा किए जाने का प्रावधान नहीं था। इसे गलत तरीके से लागू कर बीमा कंपनी को फायदा पहुंचाया गया।

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