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जबलपुर, Mar 12, 2025

शराब ठेकेदारों ने नहीं होने दिया ठेका, सहायक आबकारी आयुक्त निलंबित

कार्रवाई: दो साल से काम कर रहा था सिंडिकेट, मिलीभगत से ओवर प्राइसिंग कर करोड़ों वसूले थे

Liquor shop: हर शराब दुकानों में डेढ़ लाख रुपए की बिक्री अनिवार्य, टार्गेट पूरा करने रोज बेचने होंगे इतने रुपए की शराब

Liquor contractors : शराब ठेकेदारों का सिंडिकेट सरकार और प्रशासन पर भारी पड़ रहा है। जिसने शराब दुकानों का ठेका नहीं होने दिया। सांठ-गांठ उजागर होने पर सरकार ने सहायक आबकारी आयुक्त (जिला आबकारी अधिकारी) रविंद्र मानिकपुरी को निलंबित कर दिया है। प्रभार सागर के सहायक आयुक्त दीपक अवस्थी को सौंपा गया है।

शराब सिंडीकेट ने टेंडर का किया ‘अघोषित’ बहिष्कार

Liquor contractors : शराब की ओवर प्राइसिंग कर करोड़ों रुपए कमाए

दरअसल, यह सिंडिकेट जबलपुर में दो साल से काम कर रहा था। जिसने मिलीभगत से शराब की ओवर प्राइसिंग कर करोड़ों रुपए कमाए थे। इसका खुलासा होने पर ईओडब्ल्यू ने छापे की कार्रवाई कर अधिक दाम वसूलने पर चार शराब ठेकेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन आबकारी विभाग इस पर चुप्पी साधे रहा। शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसी सांठ-गांठ के चलते शराब ठेकेदारों ने मिलीभगत कर 9 मार्च को पहली नीलामी में शराब दुकानों का ठेका नहीं होने दिया।

Liquor contractors : जिले में 143 कम्पोजिट शराब दुकान, एक भी टेंडर नहीं

जिले में 143 कम्पोजिट शराब दुकानों में से एक के लिए भी टेंडर नहीं डाले गए। इस झटके के बाद सरकार ने रिपोर्ट ली तो पता चला कि इस सांठ-गांठ में आबकारी विभाग का अमला भी शामिल है। लिहाजा कार्रवाई की शुरूआत जिला आबकारी अधिकारी मानिकपुरी से शुरू की गई। जिन्हें निलंबित कर आबकारी आयुक्त कार्यालय ग्वालियर अटैच किया गया है। उनकी जगह सागर के सहायक आबकारी आयुक्त दीपक अवस्थी जबलपुर की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

Liquor contractors : अपनी शर्त पर ठेका चाहते हैं ठेकेदार

दो साल तक मनमर्जी से शराब दुकान चलाते हुए एमआरपी से भी ऊंचे दाम पर शराब का कारोबार करने वाले ठेकेदारों ने ईओडब्ल्यू की कार्रवाई के बाद भी अपनी हरकतें नहीं रोकी थी। बल्कि उल्टे शहर के साथ पूरे जिले के ठेकेदारों को सिंडिकेट में शामिल कर करोड़ों रुपए अतिरिक्त ग्राहकों से वसूले गए थे। लेकिन आबकारी विभाग ने किसी भी ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसका हश्र यह हुआ कि ठेकेदार अपनी शर्त पर ठेके लेने के लिए एक राय से ठेकों का अघोषित बहिष्कार कर रखा है। ताकि मजबूर होकर कम दर पर ठेके उन्हें आवंटित कर दिए जाएं।

Liquor contractors : 939 करोड़ रिजर्व प्राइस

सरकार ने शराब ठेकों के लिए 939 करोड़ रुपए का रिजर्व प्राइस रखा है। जो बीते वित्तीय वर्ष से करीब 20 फीसदी अधिक है। जबलपुर जिले में शराब ठेकों के लिए 45 समूह बनाए गए हैं, इनमे तहत 143 कंपोजिट शराब दुकानें संचालित होती हैं। नवीनीकरण, लॉटरी और ई टेंडर की प्रक्रिया की तिथि निकल चुकी है। अब दूसरी बार विभाग ने टेंडर के लिए नीलामी प्रक्रिया को अपनाया है। इसकी आखिरी तिथि भी 13 मार्च है।

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