
high court hearing indore nagar nigam brts removal tender scam (Patrika.com)
MP News: हाईकोर्ट आदेश के 11 माह बाद भी बीआरटीएस नहीं हटाए जाने को लेकर बुधवार को हुई सुनवाई में इंदौर नगर निगम की चालाकी पकड़ में आ गई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ल और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष निगम ने एक बार फिर कहा कि पहले जो ठेकेदार काम कर रहा था, उसने मना कर दिया। अब इसे तोडऩे को नया टेंडर जारी किया है।
निगम ने टेंडर की कॉपी दी, जिसे याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागडिय़ा ने पढ़कर सुनाया। इसमें बीआरटीएस से निकलने वाले स्क्रैप और बिल्डिंग मटेरियल आदि को हटाने-बेचने की जानकारी थी। बागडिय़ा ने इसे निगम का खेल करार देते हुए कहा कि, टेंडर (BRTS Removal Tender) में अभी भी रेलिंग हटाने के लिए ये लोग तैयार नहीं हैं।
इस पर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल (Municipal Commissioner Kshitij Singhal) असहज हो गए और सॉरी-सॉरी कहते हुए कोर्ट से माफी मांगने लगे। साथ ही बोले कि इस टेंडर में रेलिंग हटाने का काम भी शामिल है। इस पर वहां मौजूद निगम के अन्य अफसर उनके पास पहुंचे और टेंडर की जानकारी देने लगे। इसके बाद निगमायुत ने मोबाइल में कोर्ट को टेंडर के इंग्लिश वर्जन की सॉफ्ट कॉपी देते हुए बताया कि इसमें रेलिंग हटाना शामिल है। इस पर बागडिय़ा ने दलील दी कि, जनता से जुड़े मुद्दे पर कोर्ट गंभीर है, लगातार सुनवाई कर रही है ताकि जनता को राहत मिल पाए, ऐसे में निगम अफसरों का ये रवैया उनकी गंभीरता साबित कर रहा है। कोर्ट ने भी इस रवैये को लेकर आपत्ति जताई।
निगम ने बीआरटीएस रेलिंग तोडऩे के बारे में बताया कि नया शार्ट टेंडर जारी किया है। इसमें 15 लगेंगे। फिर 7 दिन उसे फायनल करने में लगेंगे। इस पर बागडिय़ा ने आपत्ति ली। बोले कि बाद में जब निगम को ही ये काम करना है तो अभी क्यों नहीं कर रही? नया ठेकेदार आएगा या नहीं, नहीं आया तो क्या होगा? इसकी गारंटी नहीं है। निगम के पास साधन-संसाधन हैं तो वह क्यों नहीं हटा रहा? कोर्ट ने भी इस पर सहमति जताई और एक बार फिर दोहराया कि बीआरटीएस हटाने का फैसला कोर्ट ने नहीं, सरकार ने लिया था। उसे पूरा करने में इतनी हिचकिचाहट क्यों? भोपाल में तो तुरंत हटा दिया, इंदौर में भी उसी तरह काम करवाया जाए। इस पर निगमायुक्त ने बताया कि निगम रेलिंग हटा सकता है लेकिन बस स्टॉप हटाने के संसाधन उसके पास नहीं हैं।
शहर के बिगड़ैल ट्रैफिक को लेकर दायर याचिकाओं में से एक में बदहाल यातायात का मुद्दा उठाया गया। बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि शहर में यातायात सिग्नल बंद रहते हैं। सड़क के दोनों ओर वाहन पार्क किए जाते हैं। शहरभर में पार्किंग के नाम पर बेसमेंट बने हैं, लेकिन उनका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। निगम के सहयोग के बगैर कुछ नहीं हो सकता, लेकिन वह कार्रवाई नहीं करता। इस पर कोर्ट ने निगमायुक्त से कहा कि आप एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जो कोर्ट द्वारा गठित समिति के साथ समन्वय कर सके।
कोर्ट द्वारा गठित समिति सदस्यों ने बताया कि जब्त वाहन थानों में सालों साल खड़े रहते हैं। कोई देखने वाला नहीं है। तुकोगंज थाना क्षेत्र में तो एक बस 50 साल से सड़क पर खड़ी है। हालत यह है कि थोड़ी सी हलचल में ही बस भरभराकर गिर सकती है। यह बस किस मामले में जब्त हुई थी, क्या मामला है, किसी को नहीं पता। इस पर कोर्ट ने कहा कि मालखाना, रिकॉर्ड रूम हर जगह स्थान नहीं बचा है।
ठेकेदार काम नहीं करे तो नगर निगम खुद करे
हाईकोर्ट द्वारा पिछली सुनवाई पर जारी निर्देशों के पालन को लेकर निगम ने रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया, बीआरटीएस हटाने को नया टेंडर जारी किया है। यहां एलिवेटेड ब्रिज को लेकर मुख्य सचिव ने बैठक बुलाई थी, जिसमें पीडब्लूडी ने 15 फरवरी से ब्रिज का काम शुरू करने की बात कही। जितनी जगह ये बनेगा, उतनी पर बैरिकेडिंग करने की बात भी कही। साथ ही एसीएस (नगरीय प्रशासन) ने भी निर्देश दिए कि जहां 3.1 किमी में एलिवेटेड ब्रिज नहीं है, वहां सेंट्रल डिवाइडर और लाइटिंग का काम शुरू कर तय समयसीमा में पूरा किया जाए, यह काम शुरू कर दिया है। साथ ही रेलिंग हटाने के लिए लिए टेंडर जारी किया जाए और तेजी से काम करवाया जाए। ठेकेदार काम पूरा नहीं करे तो निगम खुद करे। कोर्ट में ये बात भी सामने आई कि पीडब्लूडी 6.6 किमी लंबे एलिवेटेड ब्रिज का काम फरवरी में शुरू कर देगा। जहां-जहां से रेलिंग हटाई जाएगी, वहां पीडब्लूडी अस्थायी डिवाइडर बनाएगा। (MP News)
Published on:
29 Jan 2026 03:11 am
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