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Stem Cell Therapy: पार्किंसन और हार्ट फेल्योर के इलाज में बड़ी सफलता, जापान ने स्टेम-सेल थेरेपी को दी मंजूरी

Stem Cell Therapy: जापान ने पार्किंसन और गंभीर हार्ट फेल्योर के इलाज के लिए नई स्टेम-सेल थेरेपी को मंजूरी दी है। जानिए कैसे काम करती है यह नई तकनीक और क्यों इसे बड़ी मेडिकल सफलता माना जा रहा है।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 07, 2026

Stem Cell Therapy

Stem Cell Therapy (Photo- gemini ai)

Stem Cell Therapy: मेडिकल साइंस की दुनिया में एक बड़ी खबर सामने आई है। जापान ने पार्किंसन रोग और गंभीर हार्ट फेल्योर के इलाज के लिए नई स्टेम-सेल आधारित थेरेपी को मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है, जिनके पास अभी तक सीमित इलाज के विकल्प थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जापान की फार्मा कंपनी सुमितोमो फार्मा को अपने पार्किंसन रोग के इलाज के लिए बनाई गई दवा एमचेप्रि (Amchepry) को बनाने और बेचने की अनुमति मिल गई है। इस इलाज में मरीज के दिमाग में स्टेम-सेल ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, जिससे खो चुकी तंत्रिका कोशिकाओं को दोबारा विकसित करने में मदद मिल सकती है।

हार्ट फेल्योर के मरीजों के लिए भी नई उम्मीद

सिर्फ पार्किंसन ही नहीं, बल्कि गंभीर हार्ट फेल्योर के इलाज के लिए भी जापान ने एक नई थेरेपी को मंजूरी दी है। “रीहार्ट” (ReHeart) नाम की यह तकनीक मेडिकल स्टार्टअप कंपनी क्यूरिप्स ने विकसित की है। इस थेरेपी में खास तरह की हार्ट मसल शीट का इस्तेमाल किया जाता है, जो दिल के कमजोर हिस्से पर लगाई जाती है। इससे नई रक्त वाहिकाएं बनने में मदद मिलती है और दिल की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार ये दोनों उपचार इस साल गर्मियों तक मरीजों के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

iPS सेल तकनीक क्या है

इन दोनों इलाजों की खास बात यह है कि इनमें iPS सेल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। iPS यानी इंड्यूस्ड प्लूरिपोटेंट स्टेम सेल। ये ऐसी कोशिकाएं होती हैं जिन्हें शरीर की सामान्य कोशिकाओं से तैयार किया जाता है और बाद में इन्हें किसी भी प्रकार की कोशिका में बदला जा सकता है। इस तकनीक पर काम करने के लिए जापान के वैज्ञानिक शिन्या यामानाका को साल 2012 में नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है। उनकी रिसर्च ने स्टेम-सेल रिसर्च के क्षेत्र में बड़ी क्रांति ला दी थी।

पार्किंसन के मरीजों पर हुआ परीक्षण

रिपोर्ट्स के अनुसार इस नई थेरेपी का परीक्षण सात पार्किंसन मरीजों पर किया गया था, जिनकी उम्र 50 से 69 साल के बीच थी। इन मरीजों के दिमाग के दोनों हिस्सों में लाखों कोशिकाएं प्रत्यारोपित की गईं। दो साल तक इन मरीजों की निगरानी की गई और किसी बड़े साइड इफेक्ट की जानकारी सामने नहीं आई। सात में से चार मरीजों में बीमारी के लक्षणों में सुधार भी देखा गया।

क्या है पार्किंसन रोग

पार्किंसन एक पुरानी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो शरीर की मूवमेंट को प्रभावित करती है। इस बीमारी में हाथ-पैर कांपना, चलने में परेशानी और शरीर का संतुलन बिगड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। दुनिया भर में करीब एक करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। फिलहाल उपलब्ध इलाज केवल लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं, लेकिन बीमारी को पूरी तरह रोक नहीं पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेम-सेल आधारित नई थेरेपी भविष्य में पार्किंसन और हार्ट फेल्योर जैसे गंभीर रोगों के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि अभी भी इन तकनीकों पर और शोध की जरूरत बताई जा रही है।

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