
Hyperbaric Oxygen Therapy (photo- gemini ai)
Rishabh Pant Hyperbaric Oxygen Therapy: भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत पिछले कुछ सालों से लगातार चोटों से जूझ रहे थे। अब वे अपनी फिटनेस और रिकवरी पर खास ध्यान दे रहे हैं, खासकर आईपीएल 2026 से पहले। वे लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान हैं और जल्द मैदान पर वापसी के लिए उन्होंने Hyperbaric Oxygen Therapy (HBOT) शुरू की है।
हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी एक मेडिकल ट्रीटमेंट है, जिसमें मरीज को एक खास बंद चेंबर में सामान्य से ज्यादा एयर प्रेशर पर शुद्ध ऑक्सीजन दी जाती है। आम तौर पर ऑक्सीजन शरीर में रेड ब्लड सेल्स के जरिए पहुंचती है, लेकिन इस थेरेपी में ज्यादा दबाव होने के कारण ऑक्सीजन सीधे खून के तरल हिस्से यानी प्लाज्मा में भी घुल जाती है। इससे शरीर के उन हिस्सों तक भी ऑक्सीजन पहुंचती है, जहां ब्लड फ्लो कम या बाधित होता है। इससे शरीर के खराब या घायल टिश्यू तेजी से ठीक होने लगते हैं और नई त्वचा, नई ब्लड वेसल्स और कनेक्टिव टिश्यू बनने में मदद मिलती है।
थेरेपी के दौरान चेंबर का दबाव सामान्य वातावरण से 2 से 3 गुना ज्यादा कर दिया जाता है। इससे फेफड़े ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन ले पाते हैं। खून में ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य से 10 से 15 गुना तक बढ़ सकती है। इस अतिरिक्त ऑक्सीजन से सूजन कम होती है। घाव जल्दी भरते हैं। शरीर में नई रक्त वाहिकाएं बनती हैं। बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता बढ़ती है
यह सिर्फ स्पोर्ट्स इंजरी के लिए ही नहीं, बल्कि कई मेडिकल स्थितियों में इस्तेमाल होती है। डाइविंग के कारण होने वाली डीकंप्रेशन सिकनेस, कार्बन मोनोऑक्साइड पॉयजनिंग, डायबिटीज के पुराने घाव, गंभीर संक्रमण, स्ट्रोक या ब्रेन इंजरी, जलने के घाव और चोट से रिकवरी तेज करने के लिए उपयोगी है। ध्यान रखें, यह कोई सामान्य वेलनेस थेरेपी नहीं बल्कि डॉक्टर की निगरानी में किया जाने वाला मेडिकल इलाज है।
यह आम तौर पर सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन कुछ लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है:
जिन लोगों के फेफड़े में छेद (प्न्यूमोथोरैक्स), हाल की कान सर्जरी, गंभीर फेफड़े की बीमारी, गर्भावस्था या तेज बुखार है, उन्हें यह थेरेपी नहीं करानी चाहिए।
हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी कई मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हुई है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें तेजी से हीलिंग की जरूरत होती है। लेकिन इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है, ताकि फायदे और जोखिम दोनों को समझकर सही फैसला लिया जा सके।
Published on:
17 Feb 2026 05:54 pm
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