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भारत, Jun 06, 2026

पूरी रात आते हैं सपने और सुबह लगती है थकान? मनोचिकित्सक से जानें क्या होता है ये Sleep Disorder

Sleep Disorder Hyperonirism Hindi: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप रात को सोए तो अच्छे से थे, लेकिन सुबह उठकर ऐसा लगता है जैसे रातभर सोए ही नहीं! इसे हाइपेरोनिरिज्म (Hyperonirism) कहते हैं।

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नींद के बाद भी थकी हुई युवती- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Sleep Disorder Hyperonirism Cause: हम सब यही सोचते हैं कि दिनभर की थकान के बाद रात को जब सोएंगे, तो सुबह एकदम तरोताजा उठेंगे। लेकिन कुछ लोगों के साथ इसका बिल्कुल उल्टा होता है। वे रात को बिस्तर पर तो जाते हैं, पर सुबह उठते ही ऐसा लगता है मानो रातभर भारी मजदूरी कर रहे थे।

मनोचिकित्सक डॉक्टर आदित्य सोनी (MD, Psychiatrist) बताते हैं कि इसे हाइपेरोनिरिज्म (Hyperonirism) या एपिक ड्रीमिंग (Epic Dreaming) कहते हैं। आइए इसके लक्षण के बारे में जानते हैं:

क्या होता है हाइपेरोनिरिज्म (Hyperonirism)?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, हाइपेरोनिरिज्म नींद से जुड़ी एक ऐसी परेशानी है, जिसमें इंसान को बहुत ही लंबी, गहरी नींद और सपने आते हैं। ये सपने ऐसे नहीं होते कि थोड़ी देर आए। ये बिल्कुल किसी लंबी फिल्म की तरह चलते रहते हैं, एक सीन खत्म हुआ तो दूसरा शुरू हो गया। ऐसा लगता है जैसे आपका शरीर तो सो रहा है, लेकिन दिमाग रातभर जागकर पिक्चर देख रहा है।

डॉ. आदित्य सोनी कहते हैं कि इस बीमारी में सोते समय भी मरीज का दिमाग शांत नहीं हो पाता, जिससे सुबह उठने पर शरीर और मन दोनों बुरी तरह थक जाते हैं।

रातभर सपने आने से सुबह थकान क्यों होती है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हाइपेरोनिरिज्म में इंसान का दिमाग गहरी नींद में जा ही नहीं पाता। वह पूरी रात बस सपनों के ताने-बाने बुनने में ही व्यस्त रहता है। अब आप खुद सोचिए, जब दिमाग पूरी रात काम करेगा, तो उसे आराम कब मिलेगा? यही वजह है कि 8-9 घंटे बिस्तर पर लेटने के बाद भी सुबह उठकर इंसान का सिर भारी रहता है और शरीर टूटा-टूटा सा लगता है।

हाइपेरोनिरिज्म (Hyperonirism) के लक्षण क्या होते हैं?

  • आंख बंद करते ही सपनों का दौर शुरू हो जाना।
  • सुबह उठने पर भी सपने की एक-एक बात याद रहना।
  • चिड़चिड़ापन रहना, सुस्ती छाए रहना।
  • हर समय ऐसा लगना कि बस कहीं सोने को मिल जाए।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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