
LPG Shortage India (Photo- gemini ai)
LPG Shortage India: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के घरों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है। लोगों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो एलपीजी गैस की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण कई लोग अब गैस के विकल्प तलाशने लगे हैं।
पिछले कुछ दिनों में ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों पर इंडक्शन चूल्हा, इलेक्ट्रिक कुकर, एयर फ्रायर और माइक्रोवेव ओवन जैसे उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ी है। कई शहरों में लोग इन उपकरणों के बारे में ज्यादा जानकारी लेने और खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल गैस की कोई बड़ी कमी नहीं है, लेकिन कमी की आशंका ही लोगों के व्यवहार को बदलने के लिए काफी है, खासकर शहरों में जहां ज्यादातर घर एलपीजी सिलेंडर पर ही खाना बनाते हैं।
गैस के विकल्प के तौर पर सबसे ज्यादा लोग इंडक्शन कुकटॉप खरीद रहे हैं। यह बिजली से चलने वाला चूल्हा होता है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा से बर्तन को गर्म करता है। इसमें खुली आग नहीं होती, इसलिए इसे काफी सुरक्षित माना जाता है। इंडक्शन पर उबालना, सब्जी बनाना, फ्राई करना और धीमी आंच पर पकाना जैसे काम आसानी से किए जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए स्टेनलेस स्टील या कास्ट आयरन जैसे फ्लैट बॉटम वाले बर्तन जरूरी होते हैं।
इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर और मल्टीफंक्शन कुकर भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन उपकरणों में तापमान और प्रेशर अपने आप नियंत्रित होता है, जिससे दुर्घटना का खतरा कम हो जाता है। इनमें चावल, दाल, सब्जी और कई तरह के भारतीय व्यंजन आसानी से बनाए जा सकते हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार प्रेशर कुकिंग से पोषक तत्व भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि खाना जल्दी पक जाता है।
इन दिनों एयर फ्रायर की मांग भी बढ़ी है। इसमें बहुत कम तेल में खाना बनाया जा सकता है। एयर फ्रायर में गर्म हवा तेजी से घूमती है, जिससे खाना कुरकुरा बनता है। इसमें आलू, पनीर, चिकन या स्नैक्स जैसे व्यंजन बनाए जा सकते हैं। हालांकि यह पूरे भोजन या ग्रेवी वाली डिश बनाने के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं होता।
माइक्रोवेव ओवन भी कई घरों में पहले से मौजूद है। इसका उपयोग खाना गर्म करने, सब्जियां स्टीम करने या फ्रोजन फूड डीफ्रॉस्ट करने के लिए किया जाता है। कुछ आधुनिक माइक्रोवेव में बेकिंग और रोस्टिंग की सुविधा भी होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक उपकरण गैस लीक जैसे जोखिम तो कम करते हैं, लेकिन बिजली से जुड़े कुछ खतरे भी हो सकते हैं। इसलिए हमेशा अच्छी वायरिंग, सही पावर रेटिंग और सुरक्षित जगह पर इन उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए।
बेंगलुरु की न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. नंदिता अय्यर के अनुसार अगर किचन में तीन आदतें अपनाई जाएं, प्रेशर कुकर का इस्तेमाल, दाल या अनाज को पहले भिगोना और ढक्कन लगाकर खाना पकाना तो लगभग 30 प्रतिशत तक गैस की बचत हो सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से इन विकल्पों का इस्तेमाल किया जाए तो गैस पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकती है।
Published on:
13 Mar 2026 02:48 pm
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