
Imported Apples vs Indian Apples (Photo- gemini ai)
Imported Apples vs Indian Apples: भारतीय सुपरमार्केट में imported स्टिकर लगे सेब को लोग अक्सर ज्यादा हेल्दी और प्रीमियम मानते हैं। लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो सच्चाई इससे बिल्कुल अलग हो सकती है। Dr Sudhir Kumar, जो न्यूरोलॉजिस्ट हैं, बताते हैं कि महंगे विदेशी सेब खरीदकर आप कम पोषण भी ले सकते हैं। उन्होंने X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि लोकल सेब कई मामलों में ज्यादा फायदेमंद होते हैं।
आजकल तकनीक की मदद से सेब महीनों तक चमकदार और ताजे दिखते हैं। लेकिन अंदर मौजूद पोषण धीरे-धीरे कम हो जाता है। खासतौर पर विटामिन-C बहुत संवेदनशील होता है। लंबे समय तक स्टोरेज में रखने पर सेब अपने विटामिन-C का बड़ा हिस्सा खो सकते हैं। विदेश से आने वाले सेब हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं और हफ्तों तक ट्रांजिट में रहते हैं। वहीं Himachal Pradesh और Kashmir से आने वाले सेब जल्दी बाजार तक पहुंचते हैं, जिससे उनका पोषण बेहतर बना रहता है।
भारतीय पहाड़ी इलाकों के सेब खासतौर पर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व दिल की सेहत सुधारने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करते हैं। कई हिमाचली और कश्मीरी सेबों का गहरा लाल रंग इस बात का संकेत है कि उनमें एंथोसायनिन जैसे शक्तिशाली तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं।
विदेशी फल सिर्फ जेब पर भारी नहीं पड़ते, बल्कि पर्यावरण पर भी असर डालते हैं। लंबी दूरी तक शिपिंग में भारी कार्बन उत्सर्जन होता है। इसके विपरीत, लोकल फल खरीदने से भारतीय किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलता है। आपका पैसा देश के भीतर ही रहता है।
डॉक्टर की सलाह साफ है, चमकदार वैक्स और imported टैग देखकर भ्रमित न हों। ज्यादा विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाने के लिए ताजे और लोकल सेब चुनें। रोज एक सेब खाना अच्छी आदत है, लेकिन अगर वह ताजा और स्थानीय हो, तो आपकी सेहत को और ज्यादा फायदा मिलता है।
Published on:
13 Feb 2026 11:55 am
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