
Human Seventh Sense (image- gemini)
Human Seventh Sense: अभी तक आपने सिर्फ यह सुना होगा कि मानव की 5 इंद्रियां (Senses) होती हैं—देखना, सुनना, सूंघना, चखना और छूना। थोड़े समय पहले एक अध्ययन में छठी इंद्रिय के होने की बात साबित हुई थी। लेकिन अब आपको यह जानकर हैरानी होगी कि छठी के बाद अब सातवीं इंद्रिय भी खोज ली गई है, यानी अब मानव की कुल सात इंद्रियां हैं।
क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिसर्च के अनुसार, इंसानों में 'रिमोट टच' (Remote Touch) नाम की एक सातवीं इंद्रिय भी होती है। यह वैसी ही शक्ति है जैसी समुद्र के किनारे पाए जाने वाले सैंडपाइपर (Sandpipers) और प्लोवर्स (Plovers) जैसे पक्षियों में होती है। आइए जानते हैं कि क्या है यह अद्भुत खोज और यह हमारे भविष्य को कैसे बदलेगी।
आमतौर पर स्पर्श (Touch) का मतलब होता है किसी चीज से शारीरिक संपर्क (Physical Contact) होना। लेकिन 'रिमोट टच' वह क्षमता है जिसमें हमारी उंगलियां बिना किसी चीज को छुए ही उसके आसपास होने का पता लगा लेती हैं। रिसर्च के दौरान पाया गया कि जब हम रेत या मिट्टी जैसे कणों वाले पदार्थों (Granular Materials) में हाथ हिलाते हैं, तो छिपी हुई वस्तु से टकराकर आने वाली सूक्ष्म तरंगों और दबाव के बदलाव को हमारी उंगलियां महसूस कर लेती हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे रडार या सोनार काम करता है।
वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया जिसमें प्रतिभागियों को रेत के डिब्बे में छिपे हुए एक छोटे से क्यूब का पता लगाने को कहा गया। हैरान करने वाली बात यह थी कि लोगों ने 70.7% सटीकता के साथ बिना छुए ही बता दिया कि वस्तु कहां है। इंसान अपनी उंगलियों से लगभग 7 सेंटीमीटर (करीब 3 इंच) दूर छिपी वस्तु को भी महसूस करने में सक्षम थे। वैज्ञानिकों ने इस क्षमता की तुलना एक AI ट्रेन किए गए रोबोट से की। परिणाम यह रहा कि इंसानों की संवेदनशीलता रोबोटिक सेंसर से कहीं ज्यादा बेहतर और सटीक पाई गई।
यह कोई जादुई शक्ति नहीं है, बल्कि शुद्ध विज्ञान है। जब हम रेत जैसी चीजों में उंगली हिलाते हैं, तो वह एक प्रेशर वेव (Pressure Wave) बनाती है। यदि रेत के अंदर कोई ठोस चीज छिपी है, तो वह लहर उससे टकराकर वापस आती है। हमारे हाथों की नसें इतनी संवेदनशील होती हैं कि वे रेत के कणों में होने वाले इस मामूली से बदलाव या 'मैकेनिकल रिफ्लेक्शन' को पकड़ लेती हैं।
सर्जन बिना किसी ऊतक (Tissue) को सीधा नुकसान पहुंचाए, उसके अंदर छिपी समस्याओं या गांठों को महसूस कर सकेंगे।
मलबे या मिट्टी के नीचे दबे लोगों को बचाने के लिए ऐसे उपकरण बनाए जा सकेंगे जो इंसानी स्पर्श की तरह संवेदनशील हों।
पुरानी और नाजुक चीजों को बिना तोड़े या छुए जमीन के अंदर ढूंढना आसान हो जाएगा।
ऐसी कृत्रिम उंगलियां या हाथ बनाए जा सकेंगे जो अंधेरे या कम दृश्यता वाली जगहों (जैसे समुद्र की गहराई या मंगल ग्रह) में चीजों को महसूस कर सकें।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
03 Feb 2026 03:39 pm

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