
hello doctor (image- gemini)
Hello Doctor: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं एक आम बात बन गई हैं। गैस, एसिडिटी, कब्ज और पाचन की कमजोरी न केवल हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि हमारे मानसिक सुकून को भी छीन लेती है। अक्सर लोग इन समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं या केवल दवाओं पर निर्भर रहते हैं, जबकि समाधान हमारी जीवनशैली और भोजन की आदतों में छिपा है। आइए, डॉ. गोविंद रांकावत से जानते हैं ऐसे 7 सामान्य सवालों के जवाब, जो अक्सर हर व्यक्ति के मन में चलते रहते हैं।
प्रश्न 1: मेरी उम्र 80 वर्ष है और मुझे रात्रि में भोजन करने के बाद जब मैं सो जाता हूं, तो लगभग दो-तीन घंटे बाद पेट में तेज वायु बनने लगती है। इसके साथ घबराहट और बेचैनी महसूस होती है, जिससे मुझे उठकर टहलना पड़ता है और पेशाब भी अधिक आता है। कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हो जाती है, लेकिन दोबारा सोने पर फिर वही समस्या शुरू हो जाती है। बताया गया है कि यह समस्या अपान वायु से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा पेट के बाएं हिस्से में असामान्य महसूस होता है। कृपया इसके कारण और उचित उपचार के बारे में मार्गदर्शन करें।
उत्तर: रात को सोने के कुछ समय बाद होने वाली इस बेचैनी का मुख्य कारण गैस्ट्रिक (एसिडिटी) हो सकता है। जब खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाते हैं, तो भोजन आमाशय में ही पड़ा रहता है और एसिड बनकर ऊपर आने लगता है। उपचार के लिए सोने से कम से कम 3 घंटे पहले भोजन करें। रात का खाना हल्का रखें और खाने के बाद 15-20 मिनट जरूर टहलें। खाने के तुरंत बाद बिल्कुल न लेटें। डाइट में खीरा, पपीता और सेब जैसे फाइबर युक्त पदार्थ शामिल करें।
उत्तर: गेहूं से एलर्जी को सिलियक डिजीज कहा जाता है। इसमें पेट दर्द, बार-बार फ्रेश होने जाना और शरीर का विकास रुकने जैसे लक्षण दिखते हैं। इसका एकमात्र उपाय 'बचाव' है। 'ग्लूटेन फ्री' डाइट लें। गेहूं, मैदा, सूजी, जौ और राई पूरी तरह बंद कर दें। विकल्प के तौर पर रागी, बाजरा, मक्का, चावल, मूंग और चने की दाल का उपयोग करें। आजकल बाजार में ग्लूटेन फ्री आटा और बिस्किट भी उपलब्ध हैं।
उत्तर: जांचें सामान्य होने के बावजूद ये लक्षण खराब जीवनशैली और पुरानी खान-पान की आदतों के कारण होते हैं। खाने की थैली का वाल्व कमजोर होने से एसिड ऊपर आने लगता है। समाधान के लिए एक साथ ज्यादा खाना न खाएं; दिन में 3-4 बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें। भोजन में सलाद (खीरा, पपीता, अमरूद) की मात्रा बढ़ाएं। रोजाना कम से कम 3 किलोमीटर की रनिंग या एक्सरसाइज करें ताकि आंतों की मूवमेंट बनी रहे।
उत्तर: पाइल्स (बवासीर) का मुख्य कारण पुरानी कब्ज (कॉन्स्टिपेशन) है। मैदे और बारीक अनाज के सेवन से मल सख्त हो जाता है, जिससे लैट्रिन के रास्ते पर दबाव पड़ता है और खून आने लगता है। उपचार के लिए सुबह उठकर गुनगुना पानी पिएं और फाइबर्स डाइट ज्यादा लें। मैदा और मिर्च-मसाले वाली चीजें पूरी तरह बंद करें। अगर पाइल्स केवल अंदरूनी हैं, तो जीवनशैली और डाइट बदलकर इन्हें ठीक किया जा सकता है।
उत्तर: कमजोर डाइजेशन के पीछे गट फ्लोरा (बैक्टीरिया) का असंतुलन या आंतों की धीमी गति हो सकती है। उपचार के लिए खाने से आधा घंटा पहले अपने वजन के अनुसार सलाद खाएं (जैसे 80 किलो वजन पर 400 ग्राम सलाद)। भारी या तली-भुनी चीजों से बचें। यदि समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से लीवर या पित्त की जांच करवाएं।
उत्तर: यह IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) या आंतों में अल्सर (IBD) के लक्षण हो सकते हैं। IBS में दिमाग और पेट का गहरा संबंध होता है। उपचार के लिए तनाव और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। डाइट में बदलाव करें। गंभीर मामलों में 'गट माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट' की तकनीक भी अपनाई जाती है। खून आने की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराएं।
उत्तर: अच्छी लाइफस्टाइल के बाद भी समय लगना आदतों से जुड़ा हो सकता है। इसका उत्तम उपाय यह है कि शौच के समय मोबाइल या अखबार का उपयोग न करें, क्योंकि इससे दिमाग आंतों को सही सिग्नल नहीं भेज पाता। साथ ही फाइबर की मात्रा और बढ़ाएं ताकि मल सॉफ्ट बने।
Published on:
21 Jan 2026 05:20 pm
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