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Hello Doctor : खाने के बाद क्यों तेज हो जाती है दिल की धड़कन? एक्सपर्ट से जानें हृदय रोग से जुड़े 5 सवालों के जवाब

Hello Doctor : हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार जैन से जानें दिल की धड़कन, सीने में दर्द, कोलेस्ट्रॉल, बीपी और हार्ट टेस्ट से जुड़े सवालों के जवाब।

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भारत

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Nidhi Yadav

Jan 19, 2026

hello doctor

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Hello Doctor : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, नींद की गड़बड़ी और बढ़ती उम्र का असर सीधे दिल की सेहत पर पड़ रहा है। दिल की धड़कन तेज होना, सीने में दर्द, घबराहट, सांस फूलना, थकान, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि 40 की उम्र के बाद और कई बार युवाओं में भी दिखने लगी हैं। जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बावजूद लक्षण बने रहना लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर देता है। तो आइए जानते हैं डॉक्टर से हार्ट की बीमारियों से जुड़े 5 सवालों के जवाब।

प्रश्न: मेरी उम्र 46 वर्ष है और मुझे दिन या शाम का खाना खाने के बाद दिल की धड़कन तेज हो जाती है। मीठा या भारी भोजन करने पर कब्ज की शिकायत भी रहती है। कृपया बताइए कि इसके कारण क्या हो सकते हैं और इससे बचने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?
उत्तर: 46 की उम्र में भारी भोजन और अधिक शुगर लेने से हृदय पर वर्क लोड और प्रेशर बढ़ जाता है। इसके कारण ब्लड प्रेशर और धड़कन बढ़ सकती है। यह सामान्य भी हो सकता है और किसी अंडरलाइंग हार्ट डिजीज का संकेत भी। यदि आपकी फैमिली हिस्ट्री हृदय रोग की है, तो आपको चेकअप करवाना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कोई छुपी हुई बीमारी तो नहीं है।

प्रश्न: मेरी उम्र 65 वर्ष और 2020 में मेरी बायपास सर्जरी हुई थी। वर्तमान में मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या दवाओं में कोई बदलाव आवश्यक है, या फिर इन्हें लंबे समय तक लेना सुरक्षित है? क्या इन दवाओं के कोई दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
उत्तर: हृदय रोगों का उपचार लाइफ टाइम (जीवनभर) होता है। दवाइयां लंबे समय तक लेना सुरक्षित है और इन्हें पूरी उम्र लेना पड़ता है। दवाओं को बदलना हमेशा जरूरी नहीं होता, वे जीवनभर काम कर सकती हैं। हालांकि, चिकित्सक के परामर्श से आवश्यकतानुसार इन्हें कम या ज्यादा किया जा सकता है। आप अपने कार्डियोलॉजिस्ट के नियमित संपर्क में रहें और व्यायाम जारी रखें।

प्रश्न: पिछले एक वर्ष में तीन बार लिपिड प्रोफाइल में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आया है। ईसीजी, टीएमटी और ईको सामान्य हैं। लाइपोप्रोटीन रिपोर्ट 98 आई है। लाइपोप्रोटीन और कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर: लाइपोप्रोटीन (विशेषकर लाइपोप्रोटीन ए) को कम करने के लिए अभी तक कोई निश्चित दवाइयां नहीं आई हैं। इसे कम करने का सबसे प्रभावी उपाय नियमित व्यायाम और संतुलित डाइटरी हैबिट्स हैं। जहां तक बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की बात है, तो इसके लिए दवाइयां ली जा सकती हैं। हालांकि आपकी अन्य जांचें सामान्य हैं, लेकिन बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भविष्य में हृदय रोग का कारण बन सकता है, इसलिए सतर्क रहें।

प्रश्न: मेरी उम्र 40 वर्ष है और मेरे परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है। क्या मुझे अब कोई विशेष हार्ट टेस्ट करवा लेना चाहिए जिससे हृदय रोग का पता पहले ही चल सके?
उत्तर: फैमिली हिस्ट्री होने पर आप हाई रिस्क श्रेणी में आते हैं। आपको जल्द से जल्द सीबीसी, शुगर, यूरिया, क्रिएटिनिन, लिपिड प्रोफाइल और थायराइड की जांच करानी चाहिए। इसके अलावा नॉन-इनवेसिव टेस्ट जैसे टीएमटी और ईकोकार्डियोग्राफी करवानी चाहिए। यदि इनमें कोई शंका होती है, तो सीटी एंजियो या एंजियोग्राफी के माध्यम से ब्लॉकेज का पता लगाया जा सकता है।

प्रश्न: मुझे रात के समय अक्सर बेचैनी महसूस होती है और सीने में दर्द भी होता है। ईसीजी, ईको और टीएमटी रिपोर्ट सामान्य हैं, फिर भी मन में डर बना रहता है। ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए?
उत्तर: ईसीजी, ईको और टीएमटी जैसे टेस्ट 100% सटीक जानकारी नहीं देते, ये केवल संभावना बताते हैं। हृदय की नसों की स्थिति जानने के लिए 'कोरोनरी एंजियोग्राफी' गोल्ड स्टैंडर्ड जांच है। यदि रिपोर्ट्स सामान्य हैं फिर भी लक्षण बने हुए हैं, तो आप विशेषज्ञ की सलाह पर सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी करवा सकते हैं ताकि बीमारी को पूरी तरह रूल आउट किया जा सके।