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Health Risk: आपकी प्लेट में रखा ये सामान सिगरेट से कम नहीं, नई रिसर्च का बड़ा खुलासा!

Health Risk: हार्वर्ड, मिशिगन और ड्यूक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी ने पूरी फूड इंडस्ट्री में हड़कंप मचा दिया है। रिसर्च के अनुसार, चिप्स, बिस्कुट और इंस्टेंट नूडल्स जैसे अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स (UPF) न केवल सेहत बिगाड़ रहे हैं, बल्कि सिगरेट की तरह लत भी लगा रहे हैं।

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भारत

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Nidhi Yadav

Feb 04, 2026

Health Risk

Health Risk (image- Gemini)

Health Risk: क्या आप जानते हैं कि आपके पसंदीदा पैकेट वाले स्नैक्स धीरे-धीरे आपके शरीर को सिगरेट की तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं? हम अक्सर स्वाद के चक्कर में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट बंद खाना खाते हैं, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि ये चीजें आपके दिमाग को कंट्रोल करती हैं। जिस तरह एक सिगरेट पीने वाले को उसकी लत लग जाती है, ठीक उसी तरह ये प्रोसेस्ड फूड्स इंसान को बार-बार खाने पर मजबूर करते हैं। यह रिपोर्ट फूड रेगुलेशन और पब्लिक हेल्थ के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

हार्वर्ड, मिशिगन और ड्यूक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी ने पूरी फूड इंडस्ट्री में हड़कंप मचा दिया है। रिसर्च के अनुसार, चिप्स, बिस्कुट और इंस्टेंट नूडल्स जैसे अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स (UPF) न केवल सेहत बिगाड़ रहे हैं, बल्कि सिगरेट की तरह लत भी लगा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन खाद्य पदार्थों को अब 'खाना' नहीं, बल्कि सिगरेट की तरह 'नशीला पदार्थ' माना जाना चाहिए।

सिगरेट और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड में क्या समानता है?

स्टडी के मुताबिक, कंपनियां इन फूड्स को इस तरह डिजाइन करती हैं कि इंसान का मन कभी न भरे। इसमें चीनी, नमक और फैट का एक ऐसा मिश्रण (Bliss Point) तैयार किया जाता है, जो सीधे दिमाग के 'रिवॉर्ड सिस्टम' को ट्रिगर करता है। यही वजह है कि एक बार बिस्कुट या चिप्स का पैकेट खुलने के बाद उसे पूरा खत्म किए बिना चैन नहीं मिलता।

दिमाग पर नशे जैसा असर?

मिशिगन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एशले गियरहार्ड्ट के अनुसार, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स दिमाग के उसी हिस्से पर असर डालते हैं, जिस पर शराब और निकोटीन (सिगरेट) असर करते हैं। कई लोग जानते हैं कि यह खाना उनके लिए जहर है, लेकिन चाहकर भी वे खुद को रोक नहीं पाते। यह 'फूड एडिक्शन' (खाने की लत) ही बीमारियों की सबसे बड़ी जड़ है।

क्या सख्त नियम बनाने का समय आ गया है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरह सिगरेट के पैकेट पर वैधानिक चेतावनी (Statutory Warning) लिखी होती है, उसी तरह अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स पर भी सख्त रेगुलेशन होना चाहिए। अगर समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां गंभीर मेटाबॉलिक बीमारियों की चपेट में आ जाएंगी।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।