
Intermittent Fasting (source: gemini)
Intermittent Fasting: अक्सर कहा जाता है कि बार-बार खाने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, लेकिन वजन घटाने में भोजन के समय से ज्यादा कैलोरी और क्वालिटी मायने रखती है। साथ ही, मुंबई के एक डॉक्टर से समझें कि इंटरमिटेंट फास्टिंग और बार-बार खाने के पैटर्न का आपके शरीर और भूख पर क्या असर पड़ता है।
लोगों ने ये सोच बना ली है कि हर 2-3 घंटे में खाने से ब्लड शुगर स्थिर रहती है और मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे वजन घटता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मेटाबॉलिज्म इस बात से तय नहीं होता कि आप दिन में कितनी बार खाते हैं। यह देखा जाता है कि आप कुल कैलोरी कितनी ले रहे हैं, आपकी शारीरिक गतिविधि, हार्मोनल बैलेंस कैसा है। अगर कुल कैलोरी समान है, तो आप कितनी बार खाते हैं, इससे वजन पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई जादुई तरीका नहीं है। यह इसलिए काम करता है क्योंकि इससे कुछ लोग कुल कैलोरी कम खा पाते हैं, न कि खाने के समय की वजह से। उन्होंने यह भी कहा कि व्यस्त दिनचर्या या कंसिस्टेंसी में दिक्कत झेल रहे लोगों के लिए यह तरीका लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होता।
इतनी सारी डाइट सलाहों के बीच कन्फ्यूज होना लाजमी है। लेकिन डॉक्टर का साफ कहना है कि लंबे समय की सेहत और वजन कंट्रोल के लिए बैलेंस्ड डाइट सबसे भरोसेमंद तरीका है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
07 Feb 2026 02:54 pm
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